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शरीर के अंदर ही फट गया इस शख्स का दिल, निकल रहा था गाढ़ा पदार्थ

Sat, 06 Jan 2018 10:44 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 06 Jan 2018 10:44 AM IST
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delhi accountant heart blast in his body after attack, apollo hospital doctors saved him
व‌िनोद कुमार - फोटो : अमर उजाला

क्रिसमस यानि 25 दिसंबर का दिन। एक ओर जहां हर कोई क्रिसमस डे मनाने में जुटा था। वहीं, हर दिन की तरह दिल्ली के ही निवासी विनोद कुमार कालकाजी स्थित अपने ऑफिस पहुंचे। चूंकि वे पेशे से एक अकाउंटेंट हैं।

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इसलिए ऑफिस पहुंचते ही काम में जुट गए। इसी बीच उन्हें अटैक आया और कुर्सी से गिर पड़े। जब ऑफिस के अन्य लोगों ने उन्हें अपोलो अस्पताल पहुंचाया तो पता चला कि विनोद कुमार का दिल शरीर के अंदर ही फट गया है। उसके दिल में सुराख हो गया था।
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यह एक ऐसी बीमारी की वजह से होता है, जोकि दुनिया भर में हार्ट अटैक के करीब 2 फीसदी मरीजों में होती है। इसकी वजह से मरीज की मौत की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। अपोलो अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि यह पहला ऐसा केस है, जिसमें मरीज ऑपरेशन के बाद सुरक्षित है और स्वस्थ्य हो रहा है।
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दरअसल, अस्पताल पहुंचने के बाद मरीज विनोद की इकोकार्डियोग्राफी हुई, जिसमें ह्दय के फट जाने की स्थिति सामने आई थी। डॉक्टरों ने बताया कि इसके बाद मरीज का ऑपरेशन करीब 5 घंटे तक चला। मरीज सर्जरी के दो दिन बाद अपने आप चलने भी लगा।

न पीता हैं शराब, न सिगरेट 

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दिल का दौरा - फोटो : फाइल फोटो

वैसुकलर सर्जन डॉक्टर मुकेश गोयल ने प्रेस वार्ता में बताया कि अभी तक इस तरह के मरीज सिर्फ उन्हें दो बार ही नजर आए हैं। ये दोनों ही मरीज उपचार से पहले दम तोड़ चुके थे।

लेकिन विनोद के मामले में ऐसा नहीं हुआ। जिस दिन मरीज को अस्पताल लाया गया था, तब वहां उनके परिवार ने बताया कि वह कुछ दिन से बुखार महसूस कर रहे थे, हालांकि मरीज की मेडिकल हिस्ट्री जांची गई तो पता चला कि वह वह न तो शराब पीने के आदी थे और न ही सिगरेट पीने के। ऐसे में हार्ट अटैक होने की वजह समझ नहीं आई।

निकल रहा था गाढ़ा पदार्थ
डॉ. गोयल के अनुसार, इको कार्डियोग्राफी में ह्दय से गाढ़ा पदार्थ निकलने की पुष्टि हुई थी। जिससे स्पष्ट हो चुका था कि हृदय के पास में कोई जख्म है। इसके बाद उन्हें हार्ट-लंग मशीन में रखा जो हृदय और फेफड़े का काम संभालता है और कार्डियैक सर्जरी संभव होती है। निरीक्षण किया तो पता चला कि हृदय के बाईं तरफ एक इंच लंबा जख्म था। इसे नियंत्रित करने के लिए पोटाशियम इंजेक्ट किया गया और जख्म ठीक हो गया।

इमरजेंसी डॉक्टर बचा सकते हैं जान
अस्पताल के वरिष्ठ ह्दय रोगविशेषज्ञ डॉ. महेश गर्ग बताते हैं कि इस तरह की बीमारी में मरीज को सबसे पहले जरूरत इमरजेंसी केयर की होती है। ताकि तत्काल जांच से मरीज की सटीक स्थिति का अंदाजा लगाया जा सके। उनका कहना है कि मरीज को कम समय में बेहतर उपचार देना ही इस केस की बड़ी चुनौतियों में से एक है।

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