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एक पल सुनी शादी की तारीख, दूसरे पल मौत
राजुद्दीन जंग, अमर उजाला, दिल्ली एनसीआर
Updated Sat, 30 Sep 2017 10:01 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
‘आगाह है अपनी मौत से कोई बसर नहीं, सामान सौ बरस का एक पल की खबर नहीं’ सुबह नावेद जल्दी खड़ा हुआ और नमाज पढऩे के बाद सीधा अपने दोस्तों को अपनी शादी की आने वाली तारीख पर घर रखे कार्यक्त्रस्म में शामिल होने का न्यौता दोपहर 3 बजे का देकर आया था उसे नहीं पता कि उसकी शादी की तारीख जो खलीफा शुक्त्रस्वार को लेकर आया है उसे वह सुनना भी नसीब नहीं होगी।
इधर खलीफा (जज्मान) नावेद की शादी 12 नवम्बर को बारात लेकर आने की तारीख सुना रहा था तो दूसरे पल लोगों ने ही उसे दुल्हे की मौत की खबर सुना दी। उसी का एक दोस्त उसकी खुशियों के लिए उसके घर में तैयारियां कराने में जुटा था उसे भी नहीं पता था कि उसका दोस्त उसे आखिरी बार मिलकर गया है।
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इधर खलीफा (जज्मान) नावेद की शादी 12 नवम्बर को बारात लेकर आने की तारीख सुना रहा था तो दूसरे पल लोगों ने ही उसे दुल्हे की मौत की खबर सुना दी। उसी का एक दोस्त उसकी खुशियों के लिए उसके घर में तैयारियां कराने में जुटा था उसे भी नहीं पता था कि उसका दोस्त उसे आखिरी बार मिलकर गया है।
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मदद को आगे आए पड़ोसी
अपनी शादी की तारीख सुनना भी नसीब नहीं हुआ नावेद को
दिल्ली अलवर हाईवे पर शुक्त्रस्वार दोपहर बाद नावेद की गाडी संतुलन खो बैठी और उसके दो अन्य दोस्तों के अलावा तीनों दोस्तों की मौत हो गई। नावेद मेवात के गंडूरी (नगीना) का रहने वाला था। वह दिल्ली के बीएससी डीएमएलटी का कोर्स एक कॉलेज से कर हा था।
दिल्ली अलवर हाईवे पर शुक्त्रस्वार दोपहर बाद नावेद की गाडी संतुलन खो बैठी और उसके दो अन्य दोस्तों के अलावा तीनों दोस्तों की मौत हो गई। नावेद मेवात के गंडूरी (नगीना) का रहने वाला था। वह दिल्ली के बीएससी डीएमएलटी का कोर्स एक कॉलेज से कर हा था।
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खलीफा ने एक पल सुनाई 12 नवम्बर तो दूसरे पल सुना मौत हो गई
नावेद अपने 7 बहन भाईयों में 6 नम्बर का था कुछ पहले ही उसकी सगाई फरीदाबाद के गांव मादलपुर (बल्लभगढ़) में तीन महीने पहले हुई थी। उसके पिता अब्दुलहक उर्फ इसलाम खेती बाड़ी का काम करते है। उसकी दो बहनें है। और दोनो की शादी हो चुकी है।
नावेद अपने 7 बहन भाईयों में 6 नम्बर का था कुछ पहले ही उसकी सगाई फरीदाबाद के गांव मादलपुर (बल्लभगढ़) में तीन महीने पहले हुई थी। उसके पिता अब्दुलहक उर्फ इसलाम खेती बाड़ी का काम करते है। उसकी दो बहनें है। और दोनो की शादी हो चुकी है।
प्रतीकात्मक चित्र
दोस्तों को शादी की तारीख सुनने के लिए बुलाने गया था
गंडूरी गांव के नफीस अहमद, नावेद के साथ एक ही कोर्स कर रहा है। उसने बताया कि मेरे दोस्त जैसा ईमानदार, मेहनती और होनहार लडका मुझे दिखाई नहीं देता। उसकी बहन शाहिना व शाहिदा का रो रोकर बुरा हाल है वह बताती है कि ऐसा भाई हर किसी बहन को नसीब हो लेकिन वह बीच मझधार में छोडकर न जाऐ। आज हमसे खुदा ये कहता कि कुछ भी मांग लो तो हम सिर्फ एक भाई नावेद ही मांगते।
गंडूरी गांव के नफीस अहमद, नावेद के साथ एक ही कोर्स कर रहा है। उसने बताया कि मेरे दोस्त जैसा ईमानदार, मेहनती और होनहार लडका मुझे दिखाई नहीं देता। उसकी बहन शाहिना व शाहिदा का रो रोकर बुरा हाल है वह बताती है कि ऐसा भाई हर किसी बहन को नसीब हो लेकिन वह बीच मझधार में छोडकर न जाऐ। आज हमसे खुदा ये कहता कि कुछ भी मांग लो तो हम सिर्फ एक भाई नावेद ही मांगते।