फिल्मी स्टाइल में अस्पताल से गायब खूंखार कैदी
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बीके अस्पताल में भर्ती एक कैदी शुक्रवार रात हथकड़ी खोल कर फरार हो गया। सुबह कैदी को न पाकर सुरक्षा में लगे दोनों बंदी रक्षकों में हड़कंप मच गया।
आनन-फानन में पुलिस और आला अधिकारियों को सूचना दी गई। नीमका जेल प्रशासन ने लापरवाही बरतने की वजह से दोनों बंदी रक्षकों को निलंबित कर दिया।
एसजीएम नगर के एसएचओ ने बताया कि कत्ल के जुर्म में सजा भुगत रहे नांगलोई, दिल्ली निवासी तरुण आजाद ने बृहस्पतिवार की शाम नीमका जेल में बवाल किया था।
जेल से अस्पताल को भेजे गए प्रार्थनापत्र के मुताबिक तरुण ने जेल में दीवारों से टकरा कर सिर फोड़ने और ब्लेड निगलने की कोशिश की थी। बंदीरक्षक हरिपाल और राजवीर की सुरक्षा में उसे इलाज के लिए बीके लाया गया था।
यहां तीसरे तल पर बने कैदी वार्ड उसे में भर्ती किया गया था। उसका एक हाथ हथकड़ी के जरिए बेड से लॉक कर दिया गया था। रात को दोनों बंदी रक्षक और ड्यूटी पर तैनात मेडिकल स्टाफ सो गए।
फिल्मी स्टाइल में खोली हथकड़ी
मौके का फायदा उठाकर तरुण ने फिल्मी स्टाइल में बंदीरक्षक की जेब में रखी चाभी निकाल कर हथकड़ी खोल भाग निकला। जेल के डिप्टी सुपरिंटेंडेंट धर्मवीर ने दोनों सिपाहियों को निलंबित करने की पुष्टि की है।
प्लान बनाकर तो नहीं हुआ फरार
तरुण जिस तरह फरार हुआ है लगता है कि उसने भागने का प्लान बना रखा था। शायद इसी वजह से उसने बृहस्पतिवार की शाम खुद का सिर तोड़कर और ब्लेड खाने का प्रयास कर प्रशासन को दबाव में लिया। जेल में कैदी की मौत न हो जाए इस डर से प्रशासन ने उसे अस्पताल भिजवाया यानि सब कुछ उसके प्लान के मुताबिक हुआ।
नशे में तो नहीं थे बंदी रक्षक
दो बंदी रक्षकों के बावजूद शातिर तरुण आजाद फरार हो गया। कहीं सिपाहियों ने नशा तो नहीं किया था या फिर तरुण ने ही उन्हें कोई नशीला पदार्थ खिलाया। बंदी रक्षकों का इतनी गहरी नींद में सोना कि करीब ढाई फुट दूर दूसरे बेड पर हथकड़ी से बंधा मरीज आराम से उनकी जेब से चाभी निकाल ले और उन्हें पता भी न चले कुछ शक तो पैदा करता ही है।
यहां अपनी सुरक्षा स्वयं करें
बीके अस्पताल में इलाज कराने जा रहे हैं
तो सावधान। यहां मरीज, तीमारदार और उनके सामान की सुरक्षा के कोई इंतजाम
नहीं किए गए हैं। मेन गेट से लेकर तीसरी मंजिल तक कहीं भी जाएं सुरक्षा की
कोई व्यवस्था नहीं है।
इलाज के लिए आए कैदी तरुण आजाद के फरार होने के बाद ‘अमर उजाला’ ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था परखी तो यह हकीकत सामने आई।
मुख्य
दरवाजा: यहां एक भी सिपाही तैनात नहीं दिखा। हां, साइकिल स्टैंड वाले ने
जरूर रस्सा लगा रखा है, लेकिन वह सुरक्षा के लिए नहीं बल्कि बिना पर्ची
कटाए जाने वाले वाहनों को रोकने के लिए है।
इमरजेंसी गेट पर कोई
सुरक्षा नहीं, वार्ड में एक मरीज सिर पर पट्टी बांधे जाने के इंतजार में
गंदे से बेड पर लेटा है। एक कोने में रखी इमरजेंसी दवाओं और सिरिंज को
रिपोर्टर ने छुआ लेकिन कोई पूछने वाला नहीं।
ओपीडी, छुट्टी होने की
वजह से बंद, लेकिन मुख्य गेट खुला हुआ। कोई भी इस गेट से आराम से आ जा सकता
है। यहां हॉल में एक सीसीटीवी कैमरा लगा है, लेकिन यह बंद गैलरी और रैंप
की ओर की तस्वीर लेता है। यानि बाहर से आने जाने वाले के लिए इस कैमरे का
इस्तेमाल नहीं होता।
कोई भी कर सकता है आपराधिक घटना
प्रथम तल :
जच्चा बच्चा वार्ड और प्रसव कक्ष में कोई भी आ जा सकता है। कुछ बच्चे और
एक महिला वार्ड में आराम से घूम रहे हैं, कोई रोक टोक नहीं। मालूम हो कि
प्रसव कक्ष और जच्चा बच्चा वार्ड में पुरुषों का प्रवेश मना होता है।
तीसरा तल : यहीं
कैदी वार्ड से शुक्रवार रात एक कैदी भाग हथकड़ी खोल कर फरार हो गया था।
यहां सिक्योरिटी तो क्या कोई स्टाफ भी नहीं दिखा, हां कैदी वार्ड में ताला
डालने एक फोर्थ क्लास कर्मचारी जरूर आई।
अस्पताल में कोई भी व्यक्ति
आपराधिक घटना कर आसानी से भाग सकता है, मरीज तीमारदार का ही नहीं अस्पताल
का भी सामान बेखौफ चोरी किया जा सकता है।
अराजक तत्व तीसरे तल पर
बने हॉल का इस्तेमाल पनाह लेने के लिए कर सकते हैं। ऐसे हालात में मरीज और
तीमारदार को अपनी और अपने सामान की हिफाजत खुद ही करनी होगी।