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सेल्फी से खुला जयकरण के अपहरण का राज

Tue, 01 Dec 2015 01:18 AM IST
अमर उजाला, गाजियाबाद
अमर उजाला, गाजियाबाद Updated Tue, 01 Dec 2015 01:18 AM IST
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The open secret of the kidnapping Selfi Jaykaran.
व्हाट्स एप पर वायरल हुई बदमाश दीपक की एक सेल्फी से ही अपहरण कांड का सुराग पुलिस के हाथ लगा। क्राइम ब्रांच प्रभारी अवनीश गौतम और एसओ सिहानी गेट रणवीर सिंह ने इस सुराग पर काम किया और बदमाशों को धर दबोचा।
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रविवार शाम चार बजे लापता हुए जयकरण की खोज उसके परिजन रिश्तेदारी और अन्य दोस्तों के पास कर रहे थे। सोमवार सुबह जब जयकरण के पिता विवेक महाजन के पास दो करोड़ की फिरौती का फोन आया तो उन्होंने तत्काल पुलिस को सूचना दी।
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फिरौती में मोटी रकम मांगे जाने की खबर लगते ही पुलिस में हड़कंप मच गया। एसएसपी धर्मेंद्र सिंह ने इस मामले की कमान एसपी सिटी अजयपाल शर्मा को सौंपी।

सीओ विजय प्रताप के साथ क्राइम ब्रांच और सिहानी गेट पुलिस की कई टीमें गठित की गईं। पुलिस की जांच अभी चल ही रही थी कि अचानक वीवीआईपी में ही रहने वाले एक युवक से पुलिस को अहम जानकारी मिली।
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युवक के मोबाइल पर वॉटस एप पर एक फोटो वायरल हुआ था, जोकि सोसायटी में ही किराए पर रहने वाले दीपक का था। हाथ में पिस्टल लेकर दीपक ने अपनी फोटो व्हाट्स एप पर डाली थी।

अपहृत जयकरण की भी ऐसी ही एक फोटो व्हाट्स एप पर थी। यहीं से पुलिस को शक हुआ कि दीपक आपराधिक प्रवृति का है। यह भी पता चला था कि दीपक और संदीप अलग-अलग फ्लैट में रहते हैं। 15-15 हजार रुपये किराया देते हैं, जबकि उनके पास कमाई का कोई साधन नहीं है।

परिजनों ने यह भी बताया कि रात भर दीपक और संदीप उनके साथ जयकरण की तलाश में लगे थे, मगर फिरौती मांगे जाने से कुछ समय पूर्व से ही गायब हैं।

पुलिस ने तीन टीमें बनाकर दीपक के रिश्तेदारी और रॉयल किड्स में रहने वाली उसकी मां के कमरे पर भेजी। दो बजे पुलिस और बदमाशों के बीच यहीं मुठभेड़ हुई और बदमाशों को धर दबोचा।

अच्छी माली हालत देख किया था अपहरण
अपहरणकर्ता दीपक और संदीप ने जयकरण के माता-पिता की माली हालत देखकर अपहरण का प्लान बनाया था। उन्होंने बारगेनिंग के लिए फिरौती की रकम दो करोड़ रुपये मांगी थी।

उन्हें उम्मीद थी कि कम से कम एक करोड़ रुपये तो मिल ही जाएंगे। प्लानिंग के तहत दोनों बदमाशों ने करीब ढाई महीने पहले वीवीआईपी सोसायटी में किराए पर फ्लैट लिया।

फिरौती की कॉल भी जयकरण के मोबाइल से की। आवाज न पहचानी जा सके इसलिए दीपक ने अपने भाई बिट्टू से कॉल कराई थी।

पुलिस का कहना है कि क्राइम सीरियल देखकर ही बदमाशों ने इस तरह की प्लानिंग की थी। पकड़े गए अपहणरकर्ता दीपक और बिट्टू दोनों सगे भाई हैं।

पुलिस को भटकाते रहे अपहरणकर्ता
रविवार से सोमवार सुबह तक दीपक पुलिस के साथ था। पुलिस पूछताछ के  लिए जिधर जाती, वह भी वहां खुद जाकर चेक करने की बात कहता।

बदमाशों ने पुलिस को जांच से भटकाने की कोशिश भी की। उन्हें बताया कि दो ऐसे व्यक्ति मिले हैं जिन्होंने जयकरण को देखा है।

एक ने बताया कि जयकरण सिहानीचुंगी चौकी के पास देखा गया है, दूसरे ने कविनगर सी ब्लॉक में बर्गर वाले के पास देखे जाने की बात कही।

पहले दोस्ती, फिर किडनैपिंग
जयकरण की आदत अपने से बड़ी उम्र के लड़कों से दोस्ती करने की थी। दीपक ने इसका फायदा उठाया और जयकरण से दोस्ती कर ली। दोस्ती के  बाद दीपक ने उसे पिस्टल भी दिखाई थी। दीपक को जयकरण ‘भैया’ कहता था।

इंजेक्शन से रखा बेेहोश
जयकरण ने बताया कि बिट्टू ने सिर में पिस्टल की बट मारी थी। सुबह बेहोशी का इंजेक्शन लगाया था। खाने के लिए रात में दाल-रोटी और सुबह ब्रेड दी।

जयकरण घर जाने के लिए कहता तो जान से मारने की धमकी दी। दीपक ने कहा था कि ‘पापा से कहना कि अगर तुमसे प्यार करते हैं तो दो करोड़ रुपये दे दें, नहीं तो वह लोग उसे मार डालेंगे।’

क्रिकेटप्रेमी है जयकरण
जयकरण को क्रिकेट खेलना और क्रिकेट देखना बहुत पंसद है। वह क्रिकेट अच्छा खेलता भी है। इतना शौकीन है कि क्रिकेट के लिए भूख-प्यास की भी परवाह नहीं करता था। यही वजह है कि कई घंटे तक घर न पहुंचने पर परिजनों को शक नहीं हुआ।

आखिरी लोकेशन मिली स्कूल के पास ही
जयकरण के मोबाइल की आखिरी लोकेशन सोमवार शाम करीब चार बजे मेरठ रोड इंडस्ट्रियल एरिया आई थी। वहां पर मोबाइल स्विच ऑफ हो गया था।

यहां से स्कूल की दूरी कुछ कदमों की है। पुलिस को दीपक के गायब होेने, फिर मोबाइल के स्विच ऑफ होने और दीपक की मां का निवास स्थान पास होने पर पुलिस को संदेह हुआ।


मुठभेड़ से हड़कंप

रॉयल किड्स स्कूल में दिनदहाडे़ हुई फायरिंग से हड़कंप मच गया। शुक्र है मुठभेड़ स्कूल टाइम में नहीं हुई। वरना बच्चों की जान पर भी बन सकती थी।

पुलिस को भी परेशानियों का सामना करना पड़ता। बच्चे पहले ही स्कूल से चले गए थे, लेकिन किसी को यह पता न चला कि स्कूल क्वार्टर में जयकरण को अपहरण कर रखा है।
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