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रंजीत नगर दुष्कर्म केस: 72 घंटे बाद भी छह वर्षीय मासूम की नहीं थम रही चीखें, डॉक्टर बोले- कब सामान्य होगी कहना मुश्किल

Tue, 26 Oct 2021 12:15 AM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Tue, 26 Oct 2021 12:15 AM IST
सार

अस्पताल में नीचे की मंजिल पर स्थित एक वार्ड में भर्ती मरीज सुरेश ने तो यहां तक कहा कि दिल्ली ऐसे घिनौने अपराध का अड्डा बनता जा रहा है, पुलिस को एक मजबूत संदेश देना चाहिए। लोगों में डर होना चाहिए। उस बच्ची के दर्द के आगे उन्हें अपना भी दर्द महसूस नहीं हो रहा है।

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ranjit nagar 6 year old girl sexual assault case even after 72 hours little is not out of mental trauma doctor say normalcy may take long time
फाइल फोटो

विस्तार

दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती रंजीत नगर दुष्कर्म पीड़ित मासूम की सेहत में बेशक धीरे-धीरे सुधार आ रहा है, लेकिन 72 घंटे बाद भी वह मानसिक आघात से उबर नहीं सकी है। दिन का उजाला हो, रात का अंधेरा, उसकी चीखें हर उस शख्स को अपने दर्द का हिस्सा बना रही हैं, जो जाने अनजाने अस्पताल के जनरल वार्ड से गुजर रहा होता है। चिकित्सकों का कहना है कि अभी यह बता पाना मुमकिन नहीं कि वह सामान्य कब हो सकेगी। मासूम के दिमाग पर इतना गहरा असर पड़ा है कि संभव है कि इसमें लंबा वक्त लग जाए।

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डॉक्टर से लेकर मरीज तक हर कोई बच्ची की चीखें सुन दर्द में
दरअसल, शुक्रवार को रंजित नगर इलाके में एक छह वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म का मामला सामने आया था। वह इस वक्त राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती है। दुष्कर्म की शिकार बच्ची की सेहत में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है, लेकिन मानसिक आघात से वह उबर नहीं सकी है। वह अभी भी सदमे में है। हर मिनट चीखती है। अपने दर्द को शब्दों में भी बयां न कर पाने वाली यह मासूम असहनीय पीड़ा और खौफ का सामना कर रही है। हालात इस कदर हैं कि आसपास वार्ड में भर्ती मरीज, डॉक्टर, नर्स, पैरामेडिकल स्टाफ और तीमारदार हर कोई बच्ची के लिए भगवान से इंसाफ मांग रहा है।
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डॉक्टर बोले- ऐसे मामले देख गुस्सा और दुख दोनों आता है
ऑपरेशन के बाद एक दिन आईसीयू निगरानी और फिर सामान्य वार्ड में पहुंची बच्ची को लेकर एक डॉक्टर ने यहां तक कहा कि बच्ची के दिल-दिमाग पर वह घटना इस तरह हावी है कि उसे ठीक होने में लंबा वक्त लग सकता है। उन्होंने बताया, 'जब भी मैं ऐसे मामले देखता हूं तो गुस्सा और दुख दोनों ही रहता है। उस बच्ची का जीवन अभी शुरू भी नहीं हुआ है और उसे ऐसे दर्द से सामना करना पड़ रहा है जिसका अंत कब हो पाएगा, इसका जबाव चिकित्सीय विज्ञान के पास नहीं है। हम चाहकर भी उसे सामान्य जिंदगी नहीं दे सकते, जब तक वह या उसका परिवार न संभाल ले।'
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'उसकी हर चीख रोंगटे खड़े कर देती है'
पास के ही वार्ड में अपने पति का इलाज करा रहीं सविता ने बताया कि शनिवार और रविवार दो दिन से वह लगातार बच्ची की चीखें सुन रहीं हैं। पहले उन्हें नहीं पता था लेकिन एक नर्स से पता चला तो उसकी हर चीख रोंगटे खड़ा कर देती है। भगवान ऐसा किसी के साथ न करे, बच्चों के साथ तो बिलकुल भी नहीं। मुझे नहीं पता कि यह सब कैसे और किसने किया है? लेकिन जिसने भी यह अपराध किया है उसे सरेआम फांसी होनी ही चाहिए।


वहीं नीचे की मंजिल पर स्थित एक वार्ड में भर्ती मरीज सुरेश ने तो यहां तक कहा कि दिल्ली ऐसे घिनौने अपराध का अड्डा बनता जा रहा है, पुलिस को एक मजबूत संदेश देना चाहिए। लोगों में डर होना चाहिए। उस बच्ची के दर्द के आगे उन्हें अपना भी दर्द महसूस नहीं हो रहा है।

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