{"_id":"58a406314f1c1b564fd84f9d","slug":"new-facts-in-arms-surrender-issue-in-gurugram","type":"story","status":"publish","title_hn":"शस्त्र लाइसेंस मामले में एक और खुलासा ","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
शस्त्र लाइसेंस मामले में एक और खुलासा
ब्यूरो/अमर उजाला, गुरुग्राम
Updated Wed, 15 Feb 2017 01:11 PM IST
विज्ञापन
- फोटो : SELF
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शस्त्र लाइसेंस के नाम पर होने वाले गोल-माल की जांच में एक के बाद एक खुलासे हो रहे हैं। गिरोह एनओसी मंगाने के लिए भेजे जाने वाले पत्र को डाक से प्राप्त करते थे। जबकि एनओसी फर्जी होती थी। एनओसी भेजने वाला दूसरे जिले में जा कर डाक से उसे भेजता था।
विज्ञापन
शस्त्र बनाने में फर्जीवाड़े का धंधा कई साल से चल रहा था। अब तक 15 ऐसे लाइसेंस सामने आ चुके हैं। पुलिस के अनुसार लाइसेंस बनवाने वालों का कहना है कि उन्हें कुछ नहीं पता है। वह केवल पैसा ज्यादा मांगते थे, पैसा दे दिया।
विज्ञापन
लाइसेंस बनवाने वाले गिरोह के लोग पहले फर्जी लाईसेंस जमा करते थे। उसके बाद उक्त जिले व राज्य की एनओसी मंगवाते थे। विभागीय कर्मचारी की मदद से उसे खुद ले जाते थे और वहां की डाक से खुद पोस्ट करते थे। डाक से यहां आने पर यह मान लिया जाता था कि लाइसेंस असली है।
विज्ञापन
इसके साथ उक्त लाइसेंस पर हथियार भी फर्जी गन हाउस के नाम पर बेचते थे। जो अवैध हथियार 60 हजार की कीमत का होता था, उसे असली गन हाउस से खरीदा दिखा कर 5 लाख रुपये ऐंठ लेते थे।
जानकारों की मानें तो इस मिलीभगत में विभागीय लोगों पर भी गाज गिर सकती है। गौरतलब है कि गिरोह के एक सदस्य मोहन लाल को पुलिस 6 दिन की रिमांड पर लेकर जांच कर रही है। मामले की जांच कर रही एसआईटी के प्रभारी एसीपी सदर अनिल कुमार का कहना है कि मामले की जांच चल रही है। अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद ही पूरी तस्वीर साफ होगी।