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लोन दिलाने के नाम पर ठगी, चार छात्र गिरफ्तार
अमर उजाला, गाजियाबाद
Updated Mon, 18 Jan 2016 12:39 PM IST
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लोन दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले चार ग्रेजुएट छात्रों को कविनगर पुलिस ने गिरफ्तार किया है। छात्रों ने नौकरी न मिलने पर अपोलो बिजनेस सोल्यूशन के नाम से एक फर्जी फाइनेंस कंपनी बनाई।
एजेंटों के जरिए ग्राहकों से संपर्क कर उन्हें सस्ती ब्याज दर पर रकम दिलाने का झांसा देकर जाल में फंसाते थे। आरडीसी में ठगी का कॉल सेंटर खोल लिया था। एक युवक की शिकायत पर पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार किया।
इनके कब्जे से दस हजार रुपये, एलसीडी, सीपीयू, यूपीएस और प्रिंटर बरामद हुए हैं। गैंग के सदस्य अधिवक्ता बताकर भी ठगी करते थे।
एसएचओ कविनगर अशोक सिसौदिया ने बताया कि पकड़े गए आरोपी फुरकान और मेराज अहमद मेरठ के लिसाड़ी, फरीद अहमद माधवपुरम और जाकिर अली विकासपुरी का है। गैंग के मास्टर माइंड फुरकान और मेराज हैं।
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दोनों एमए पास हैं। फरीद और जाकिर इंटरमीडिएट किए हुए हैं। साहिबाबाद निवासी वीरेंद्र से लोन देने के बहाने इस गैंग ने 29 हजार रुपये ठग लिए थे। वीरेंद्र ने रविवार को कविनगर थाने में शिकायत की।
पुलिस ने कंपनी ऑफिस पर छापामारी कर ठगों को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों ने बताया कि उन्होंने कई जगह नौकरी की तलाश की, नौकरी न मिलने पर ठगी का प्लान बनाया।
लोगों को बैंक से सस्ती ब्याज दर पर लोन दिलाने का झांसा देकर ठगी करने लगे। गैंग के कई सदस्य खुद को अधिवक्ता बताकर भी ठगते थे।
ठगों से पता चला कि छात्र पढ़ाई के लिए लोन मांगते हैं, जबकि दूसरे लोग प्रॉपर्टी खरीदने के लिए। लोन मांगने वाले ज्यादातर नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ और दिल्ली के रहने वाले हैं।
ऐसे हुई ठगी
वीरेंद्र ने बताया कि फोन कर उसे लोन के बारे में जानकारी दी गई थी। मिलने के लिए किराए पर लिए गए आरडीसी स्थित ऑफिस पर बुलाया गया, फुरकान, फरीद, मेराज और जाकिर मिले।
वीरेंद्र को 15 लाख रुपये का लोन चाहिए था। वीरेंद्र से चार हजार रुपये फाइल चार्ज लिया और पांच हजार रुपये जल्दी लोन दिलाने का बहाना कर ले लिए। वेरिफिकेशन के लिए फुरकान वकील बनकर वीरेंद्र से मिलने उनके घर गया।
वीरेंद्र से जमीन के कागज लिए और जल्द लोन दिलाने का झांसा देकर 20 हजार रुपये ले लिए। आरोप है कि इसके बाद आरोपियों ने कागज में कमी बता लोन देने से इंकार कर दिया। वीरेंद्र से 29 हजार रुपये हड़प लिए, न तो लोन दिया न ही रकम वापस की।
ठगों का कनेक्शन तलाश रही पुलिस
पिछले तीन दिन में गाजियाबाद पुलिस ऐसी तीन फर्जी कंपनियों का पर्दाफाश कर चुकी है, जो लोन दिलाने के नाम पर ठगते हैं। लिहाजा पूरी जांच पड़ताल के बाद ही लोन के लिए अप्लाई करें।
पुलिस का दावा है कि ये गैंग अब तक 20 से ज्यादा लोगों से ठगी कर चुका है। 50 से ज्यादा ठगी के ऐसे सेंटर दिल्ली-एनसीआर में चल रहे हैं।
एसपी सिटी डॉ. अजयपाल शर्मा ने बताया कि शहर में कई गैंग ऐसे हैं जो कि सस्ते ब्याज दर पर लोन दिलाने का दावा कर रहे हैं। शहरवासियों को ऐसे गैंग से बचकर रखना चाहिए। कंपनी के बारे में जांच पड़ताल कर ही लोन लें।
लड़कियां करती थी कॉल
करीब सात-आठ एजेंट गैंग ने रखे थे, जो ग्राहकों की तलाश करते थे। ऑफिस में लड़कियां कार्यरत थीं, जो कॉल करती थीं। वहीं, कुछ बदमाश अधिवक्ता बनते थे, जो कि ग्राहक की फाइल लोन लेने के लिए अटकाने के बदले तीन हजार रुपये लेते थे।
3 पर्सेंट के चक्कर में गंवाए हजारों
आरोपियों ने बताया कि कुल रकम के तीन पर्सेंट रुपये की ब्याज दर पर वह लोन दिलाने का झांसा देते थे, जिसके चक्कर में आकर ग्राहक उनसे लोन के लिए संपर्क करते थे। अखबारों में पर्चे डलवाकर वह गाजियाबाद समेत एनसीआर में प्रचार करते थे।
लोन के बहाने छात्रा से ठगी
विजयनगर की स्वाति ने बताया कि एजुकेशन लोन दिलाने के बहाने उनसे व उनके एक रिश्तेदार से आरडीसी में एक फाइनेंस कंपनी के कर्मचारियों ने 40 हजार रुपये की ठगी की।
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एजेंटों के जरिए ग्राहकों से संपर्क कर उन्हें सस्ती ब्याज दर पर रकम दिलाने का झांसा देकर जाल में फंसाते थे। आरडीसी में ठगी का कॉल सेंटर खोल लिया था। एक युवक की शिकायत पर पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार किया।
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इनके कब्जे से दस हजार रुपये, एलसीडी, सीपीयू, यूपीएस और प्रिंटर बरामद हुए हैं। गैंग के सदस्य अधिवक्ता बताकर भी ठगी करते थे।
एसएचओ कविनगर अशोक सिसौदिया ने बताया कि पकड़े गए आरोपी फुरकान और मेराज अहमद मेरठ के लिसाड़ी, फरीद अहमद माधवपुरम और जाकिर अली विकासपुरी का है। गैंग के मास्टर माइंड फुरकान और मेराज हैं।
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दोनों एमए पास हैं। फरीद और जाकिर इंटरमीडिएट किए हुए हैं। साहिबाबाद निवासी वीरेंद्र से लोन देने के बहाने इस गैंग ने 29 हजार रुपये ठग लिए थे। वीरेंद्र ने रविवार को कविनगर थाने में शिकायत की।
पुलिस ने कंपनी ऑफिस पर छापामारी कर ठगों को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों ने बताया कि उन्होंने कई जगह नौकरी की तलाश की, नौकरी न मिलने पर ठगी का प्लान बनाया।
लोगों को बैंक से सस्ती ब्याज दर पर लोन दिलाने का झांसा देकर ठगी करने लगे। गैंग के कई सदस्य खुद को अधिवक्ता बताकर भी ठगते थे।
ठगों से पता चला कि छात्र पढ़ाई के लिए लोन मांगते हैं, जबकि दूसरे लोग प्रॉपर्टी खरीदने के लिए। लोन मांगने वाले ज्यादातर नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ और दिल्ली के रहने वाले हैं।
ऐसे हुई ठगी
वीरेंद्र ने बताया कि फोन कर उसे लोन के बारे में जानकारी दी गई थी। मिलने के लिए किराए पर लिए गए आरडीसी स्थित ऑफिस पर बुलाया गया, फुरकान, फरीद, मेराज और जाकिर मिले।
वीरेंद्र को 15 लाख रुपये का लोन चाहिए था। वीरेंद्र से चार हजार रुपये फाइल चार्ज लिया और पांच हजार रुपये जल्दी लोन दिलाने का बहाना कर ले लिए। वेरिफिकेशन के लिए फुरकान वकील बनकर वीरेंद्र से मिलने उनके घर गया।
वीरेंद्र से जमीन के कागज लिए और जल्द लोन दिलाने का झांसा देकर 20 हजार रुपये ले लिए। आरोप है कि इसके बाद आरोपियों ने कागज में कमी बता लोन देने से इंकार कर दिया। वीरेंद्र से 29 हजार रुपये हड़प लिए, न तो लोन दिया न ही रकम वापस की।
ठगों का कनेक्शन तलाश रही पुलिस
पिछले तीन दिन में गाजियाबाद पुलिस ऐसी तीन फर्जी कंपनियों का पर्दाफाश कर चुकी है, जो लोन दिलाने के नाम पर ठगते हैं। लिहाजा पूरी जांच पड़ताल के बाद ही लोन के लिए अप्लाई करें।
पुलिस का दावा है कि ये गैंग अब तक 20 से ज्यादा लोगों से ठगी कर चुका है। 50 से ज्यादा ठगी के ऐसे सेंटर दिल्ली-एनसीआर में चल रहे हैं।
एसपी सिटी डॉ. अजयपाल शर्मा ने बताया कि शहर में कई गैंग ऐसे हैं जो कि सस्ते ब्याज दर पर लोन दिलाने का दावा कर रहे हैं। शहरवासियों को ऐसे गैंग से बचकर रखना चाहिए। कंपनी के बारे में जांच पड़ताल कर ही लोन लें।
लड़कियां करती थी कॉल
करीब सात-आठ एजेंट गैंग ने रखे थे, जो ग्राहकों की तलाश करते थे। ऑफिस में लड़कियां कार्यरत थीं, जो कॉल करती थीं। वहीं, कुछ बदमाश अधिवक्ता बनते थे, जो कि ग्राहक की फाइल लोन लेने के लिए अटकाने के बदले तीन हजार रुपये लेते थे।
3 पर्सेंट के चक्कर में गंवाए हजारों
आरोपियों ने बताया कि कुल रकम के तीन पर्सेंट रुपये की ब्याज दर पर वह लोन दिलाने का झांसा देते थे, जिसके चक्कर में आकर ग्राहक उनसे लोन के लिए संपर्क करते थे। अखबारों में पर्चे डलवाकर वह गाजियाबाद समेत एनसीआर में प्रचार करते थे।
लोन के बहाने छात्रा से ठगी
विजयनगर की स्वाति ने बताया कि एजुकेशन लोन दिलाने के बहाने उनसे व उनके एक रिश्तेदार से आरडीसी में एक फाइनेंस कंपनी के कर्मचारियों ने 40 हजार रुपये की ठगी की।