लोहे के कबाड़ से बनाते थे अवैध हथियार, 30 पिस्तौलों के साथ दो गिरफ्तार
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पुलिस की स्पेशल सेल ने अवैध हथियार बनाकर तस्करी करने वाले गिरोह के दो बदमाशों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों की पहचान पवन सिंह और चंदर सिंह उर्फ चंदन सिंह उर्फ सतनाम सिंह के रूप में हुई है। पुलिस ने आरोपियों के पास से .32 बोर की 30 पिस्तौल बरामद की है। मुख्य आरोपी पवन ने बताया कि वह करीब 10 सालों से हथियार बनाकर दिल्ली-एनसीआर, यूपी, हरियाणा, मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों में सप्लाई कर रहा था। पवन ने बताया कि वह लोहे के कबाड़, साइकिल के फ्रेम और बड़ी गाड़ियों के टायर से निकलने वाले तार से स्प्रिंग बनाकर 0.32 बोर की पिस्तौल बनाता था। एक पिस्तौल बनाने में करीब 7,000 रुपये की लागत आती है, जबकि उसे 25,000 से 30,000 रुपये की बेच देता था।
सेल के पुलिस उपायुक्त मनीषी चंद्रा ने बताया कि मार्च में 52 पिस्तौलों के साथ अमरीकन और शीतल सिंह को पकड़ा गया था। दोनों बताया कि ये हथियार धार (मध्य प्रदेश) निवासी पवन से लेकर आए हैं। पवन खुद हथियार बनाकर बेचता है। जांच के दौरान एक सूचना पर मंगलवार को झील वाला पार्क, रोहिणी सेक्टर-3 से पवन और चंदर को गिरफ्तार कर लिया गया। दोनों ने बताया कि वे दिल्ली के कुछ बदमाशों को हथियार सप्लाई करने आए थे। आरोपियों को रिमांड लेकर पूछताछ की जा रही है।
मुख्य आरोपी के परिवार का 80 साल से यही काम...
आरोपियों ने बताया कि धार में बहुत लोग हथियार बनाना जानते हैं। उनकी कई पीढ़ियां यही काम करती आ रही हैं। पवन ने बताया कि उसका परिवार करीब 80 साल से हथियार बनाने का काम कर रहा है। पवन के खिलाफ मध्य प्रदेश में अवैध हथियार के पांच मामले दर्ज हैं, वहीं चंदन भी कई मामलों में शामिल रहा है। आरोपी ने बताया कि वह पुलिस से बचने के लिए गांव के पास जंगलों में अस्थायी मकान बनाकर हथियार बनाता है। आरोपी सैकड़ों हथियार बनाकर देश में सप्लाई कर चुके हैं।
दिल्ली से हर दिन बरामद हो रहे औसतन 8 हथियार
पुलिस ने अवैध हथियार का धंधा करने वालों और वारदात करने वालों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया हुआ है। यही नतीजा है कि पिछले सालों के मुकाबले इस साल कहीं ज्यादा अवैध हथियार (पिस्तौल और तमंचे) बरामद हुए। एक जनवरी से 31 मई 2019 के आंकड़ों पर गौर करें तो इस साल अब तक 1169 पिस्टल और तमंचे बरामद हुए हैं, जबकि पिछले साल इसी अवधि में इनकी संख्या 842 थी। पुलिस इसे बड़ी कामयाबी मान रही है।
पुलिस के अतिरिक्त प्रवक्ता अनिल मित्तल ने बताया कि स्पेशल सेल, क्राइम ब्रांच के अलावा जिलों की स्थानीय पुलिस की बदमाशों पर है। 2017 में शुरुआती पांच माह के दौरान महज 517 हथियार बरामद किए गए थे। वर्ष 2018 में इसी अवधि में इनकी संख्या 842 और 2019 में इसकी संख्या 1169 पहुंच गई। 2018 की तुलना में 2019 में 38.83 फीसदी अधिक हथियार पकड़े गए। वहीं अगर हथियारों के इस्तेमाल करने की बात की जाए तो पिछले साल 2018 में शुरुआती पांच माह में जहां 354 मामलों में हथियारों का इस्तेमाल किया गया था, वहीं 2019 में इसकी संख्या 334 रही।