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दिल्ली दंगा: आगजनी, तोड़फोड़ के नौ आरोपियों को मिला संदेह का लाभ, कोर्ट ने सभी को किया बरी
Thu, 30 Nov 2023 08:18 AM IST
विजय पुंडीर
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: विजय पुंडीर
Updated Thu, 30 Nov 2023 08:18 AM IST
सार
अदालत ने 2020 के दिल्ली दंगों के दौरान नौ आरोपियों को दंगा, तोड़फोड़ और आगजनी सहित सभी आरोपों से बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष बिना शक उनका अपराध साबित करने में असफल रहा है, ऐसे में वे संदेह का लाभ पाने के हकदार हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
अदालत ने 2020 के दिल्ली दंगों के दौरान नौ आरोपियों को दंगा, तोड़फोड़ और आगजनी सहित सभी आरोपों से बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष बिना शक उनका अपराध साबित करने में असफल रहा है, ऐसे में वे संदेह का लाभ पाने के हकदार हैं।
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अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पुलस्त्य प्रमाचला ने यह आदेश आरोपियों के खिलाफ 25 फरवरी को सांप्रदायिक दंगों के दौरान यहां शिव विहार में एक गोदाम और कुछ वाहनों को जलाने वाली दंगाई भीड़ का हिस्सा होने के आरोप पर दिया है। गोकलपुरी थाना पुलिस ने मोहम्मद शाहनवाज, मोहम्मद शोएब, शाहरुख, राशिद, आजाद, अशरफ अली, परवेज, मोहम्मद फैसल और राशिद के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी।
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अदालत ने अपने समक्ष मौजूद साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए कहा कि गोदाम में तोड़फोड़ और आगजनी की घटना साबित हो गई है। अदालत ने रेखांकित किया कि अभियोजन पक्ष का मामला दो पुलिस अधिकारियों, एक सहायक उप-निरीक्षक (एएसआई), और एक हेड कांस्टेबल की गवाही पर निर्भर है।
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अदालत ने कहा कि एएसआई ने आरोपियों के नामों का उल्लेख इस दलील के साथ किया कि वह उन्हें कथित घटना से पहले से जानता है, लेकिन बाद में पुलिस अधिकारी ने कहा कि वह केवल तीन आरोपी लोगों के नाम जानते हैं। किसी तथ्य को भूल जाना किसी तथ्य को गलत तरीके से पेश करने से बहुत अलग है। अदालत ने कहा कि यह असंभव है कि किसी व्यक्ति को एक समय में किसी का नाम पता होगा, लेकिन बाद के समय में वह उसका नाम नहीं जानता होगा। वह ऐसे नामों को भूल सकता है, लेकिन उस व्यक्ति द्वारा यह नहीं कहा जा सकता कि वह ऐसे नामों को जानता ही नहीं था।