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निगम अस्पतालों में हड़ताल, मरीज बेहाल, डॉक्टरों के समर्थन में कई बड़े अस्पताल

Wed, 28 Oct 2020 05:54 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 28 Oct 2020 05:54 AM IST
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Corporation hospitals strike, patients suffering, many big hospitals in support of doctors
कस्तूरबा अस्पताल... - फोटो : amar ujala

वेतन नहीं मिलने के विरोध में उत्तरी निगम के छह अस्पतालों के डॉक्टर मंगलवार को हड़ताल पर रहे। डॉक्टरों ने काम बंद रखा और अस्पताल परिसर में धरना देते हुए निगम के खिलाफ नारेबाजी की।  इससे इन अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं ठप रहीं। कई मरीज ऐसे थे जो दिल्ली के बाहर से इलाज कराने आए थे, लेकिन डॉक्टरों की हड़ताल होने के कारण उन्हें मायूस लौटना पड़ा। वहीं, कुछ अस्पतालों में इमरजेंसी के बाहर सन्नाटा पसरा रहा। अमर उजाला संवाददाता किशन कुमार और अभिषेक पांचाल ने उत्तरी निगम के चार अस्पतालों की पड़ताल की।

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दूरदराज के इलाकों से आए मरीजों को हुई परेशानी
स्थान : कस्तूरबा अस्पताल
समय : दोपहर 1 बजे

ओपीडी में प्रतिदिन आने वाले मरीजों की संख्या : करीब एक हजार
प्रतिदिन होने वाले ऑपरेशन : करीब 70 
अस्पताल में डॉक्टरों की संख्या : रेजिडेंट डॉक्टर 70 और वरिष्ठ डॉक्टर करीब 100

उत्तरी नगर निगम के अंतर्गत आने वाला कस्तूरबा मैटरनिटी अस्पताल बड़े अस्पतालों में शामिल है। सुबह से यहां डॉक्टरों का प्रदर्शन जारी था। यही वजह थी कि ओपीडी से लेकर ऑपरेशन थियेटर में कामकाज पूरी तरह से ठप था। ऐसे में इलाज के लिए अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। इसमें कुछ मरीज ऐसे भी थे जो दूरदराज के इलाकों से इलाज के लिए पहुंचे थे, लेकिन हड़ताल के संबंध में जानकारी न होने की वजह से उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ा।
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लोगों की प्रतिक्रिया
काफी समय से यहां इलाज चल रहा है। ऐसे में आज भी इलाज के लिए पहुंची थी, लेकिन हड़ताल के संबंध में जानकारी नहीं थी। इलाज न मिलने की वजह से अब दोबारा आना होगा। उम्मीद है कि दोबारा यहां से मायूस न लौटना पड़े।
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-शाहजहां, मरीज, पटेल नगर

मेरा यहां मधुमेह का इलाज चल रहा है, लेकिन डॉक्टरों की हड़ताल के कारण ओपीडी में दिखाना संभव नहीं हो सका। इस वजह से अब निजी डॉक्टर को दिखाना होगा। अब अगले सप्ताह अस्पताल में इलाज के लिए आऊंगी।
-रुखसाना, मरीज, लोनी  

ओपीडी ब्लॉक पूरी तरह खाली दिखा

स्थान : गिरधारी लाल मैटरनिटी अस्पताल
समय : दोपहर 1:45 बजे

ओपीडी में प्रतिदिन आने वाले मरीजों की संख्या : करीब 200 
अस्पताल में डॉक्टर की संख्या : करीब 20
प्रतिदिन होने वाले ऑपरेशन : करीब 10

अजमेरी गेट स्थित गिरधारी लाल मैटरनिटी अस्पताल उत्तरी निगम के कस्तूरबा अस्पताल के बाद मैटरनिटी के लिए बड़े अस्पतालों में आता है। यही वजह है कि पुरानी दिल्ली समेत यहां विभिन्न इलाकों से लोग इलाज के लिए पहुंचते हैं। वेतन के मुद्दों को लेकर डॉक्टरों की हड़ताल के कारण यहां भी पूरी तरह से सन्नाटा पसरा हुआ था। प्रतिदिन मरीजों की भीड़ से भरा रहने वाला ओपीडी ब्लॉक पूरी तरह से खाली दिखा। वहीं, अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचे मरीजों को भी मायूस होकर लौटना पड़ा। 

प्रतिक्रिया
मेरी पत्नी गर्भवती है। उसका यहां इलाज चल रहा है। आज भी पत्नी को ओपीडी में दिखाने के लिए पहुंचा था, लेकिन डॉक्टरों की हड़ताल की वजह से वापस लौटना पड़ा। पत्नी को काफी परेशानी हुई।
-मोहम्मद नईम, नूर-ए-इलाही इलाका 

 

अस्पताल में नहीं आया कोई मरीज

स्थान : बाड़ा हिंदूराव अस्पताल
समय : दोपहर 2:30 बजे

ओपीडी में प्रतिदिन आने वाले मरीज : दो से ढाई हजार
प्रतिदिन होने वाले ऑपरेशन : 100 से अधिक
रेजिडेंट डॉक्टरों की संख्या : 90

उत्तरी निगम के सबसे बड़े अस्पताल हिंदूराव में बीते 23 दिन से डॉक्टर हड़ताल पर हैं। यहां डॉक्टर मुख्य प्रवेश द्वार के पास ही भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं। अस्पताल में डॉक्टरों और अन्य स्टाफ के अलावा कोई मरीज नजर नहीं आया। अस्पताल के ओपीडी ब्लॉक में भी कोई मरीज नहीं था। सिर्फ अस्पताल के डॉक्टर और अन्य स्वास्थ्य कर्मी मौजूद थे। इसका बड़ा कारण यह रहा कि इतने दिन से अस्पताल के डॉक्टर हड़ताल पर हैं। इससे मरीजों को पहले ही अस्पताल में काम बंद होने की जानकारी थी। 

उम्मीद थी कि कोई कर्मचारी खिड़की खोलेगा, पर नहीं

स्थान : महर्षि वाल्मीकि अस्पताल
समय : दोपहर 3 बजे

महर्षि वाल्मीकि अस्पताल की ओपीडी में सेवाएं बंद थीं। हालांकि तीन मरीज यहां ओपीडी ब्लॉक के काउंटर के पास खड़े थे। उन्हें उम्मीद थी कि कोई कर्मचारी आकर खिड़की खोलेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके बाद मरीज वापस लौट गए। इस अस्पताल में भी डॉक्टर कई दिन से हड़ताल कर रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि जब तक पूरा वेतन नहीं मिल जाता, हड़ताल जारी रहेगी। 

कई बड़े अस्पतालों के डॉक्टरों ने ओपीडी में दो घंटे काम बंद रखा

उत्तरी निगम के डॉक्टरों की हड़ताल के समर्थन में राजधानी के कई बड़े अस्पतालों के रेजिडेंट डॉक्टरों ने मंगलवार को ओपीडी में दो घंटे काम बंद रखा। इस दौरान अस्पतालों के नॉन-कोविड के अलावा सभी वार्डों में काम का बहिष्कार किया गया।

उत्तरी निगम के अस्पतालों के डॉक्टरों को कई महीने से वेतन नही मिला है। उनकी वेतन संबंधी मांग के समर्थन में सफदरजंग, राम मनोहर लोहिया, लेडी हार्डिंग, एलएनजेपी और जीटीबी अस्पताल के डॉक्टरों ने काम के दौरान हाथों पर काली पट्टी बांधकर विरोध जताया। इनमें सफदरजंग, राममनोहर लोहिया और लेडी हार्डिंग अस्पताल के रेजिडेंट डॉक्टरों ने ओपीडी में दो घंटे काम बंद रखा।

सफदरजंग अस्पताल के रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन (आरडीए) के अध्यक्ष डॉ. मनीष ने कहा कि निगम के अस्पतालों के डॉक्टरों को वेतन न मिलने की समस्या काफी पुरानी है। उच्च न्यायालय के आदेश के बाद भी समय पर वेतन जारी नहीं किया जा रहा है। कोविड के दौर पर डॉक्टर मरीजों की सेवा में लगे हैं, ऐसे में समय पर वेतन न मिलना काफी दुर्भाग्यपूर्ण है।

सफदरजंग अस्पताल का आरडीए निगम के डॉक्टरों के साथ खड़ा है। लेडी हार्डिंग अस्पताल के आरडीए के अध्यक्ष डॉक्टर सुनील ने कहा कि वेतन न मिलने से डॉक्टरों को काफी समस्या हो रही है। निगम को जल्द से जल्द वेतन जारी कर देना चाहिए।

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