पड़तालः दिल्ली और तमिलनाडु में एक जैसा है कोरोना वायरस का रूप
- कोरोना वायरस के अब तक मिल चुके हैं 10 स्ट्रेन
- केवल दिल्ली-तमिलनाडु में कोरोना वायरस का सबसे ज्यादा ए3आई स्ट्रेन
- वैज्ञानिक लगा रहे हैं पता ए3आई स्ट्रेन प्रभावी है या नहीं
- देश के 10 राज्यों में सबसे ज्यादा हैं कोरोना मरीज
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देश के वैज्ञानिकों को कोरोना वायरस के भौगोलिक फैलाव का पता लगाने में कामयाबी मिलने के बाद अब यह भी साबित हो चुका है कि दिल्ली और तमिलनाडु में एक जैसा वायरस देखने को मिल रहा है।
अभी तक देश में इस वायरस के 10 स्ट्रेन मिल चुके हैं जिनमें से एक ए3आई नामक दिल्ली और तमिलनाडु के अधिकांश मरीजों में मिल रहा है। जबकि बाकी राज्यों के मरीजों में सबसे ज्यादा ए2ए स्ट्रेन मिल रहा है।
हैदराबाद स्थित सीसीएमबी के निदेशक डॉ. राकेश मिश्रा ने बताया कि देश में कोरोना संक्रमण से सर्वाधिक महाराष्ट्र, दिल्ली और तमिलनाडु प्रभावित हैं लेकिन तीनों राज्यों में वायरस का एक जैसा रूप देखने को नहीं मिल रहा है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि महाराष्ट्र में अगर 40 मरीजों में कोरोना वायरस का ए2ए क्लैड मिल रहा है तो वहीं 26 में ए3आई, 10 में बी4, पांच में ए3 और एकाध मरीज में बी1 क्लैड मिल रहा है।
ठीक इसी तरह तमिलनाडु और दिल्ली की बात करें तो 19 राज्यों में केवल यही दो राज्य हैं जहां एकजैसा क्लैड देखने को मिल रहा है। उदाहरण के तौर पर तमिलनाडु में 20 कोरोना मरीजामें ए3आई मिल रहा है तो वहां 16 में ए2ए है।
ठीक इसी तरह दिल्ली में अगर 52 मरीजों में ए3आई मिल रहा है तो 18 में ए2ए मिल रहा है। हालांकि ए2ए और ए3आई क्लैड में कौन कितना प्रभावी है? इसका पता लगाने के लिए वैज्ञानिक अभी अध्ययन कर रहे हैं।
दिल्ली के कई मरीजों में नहीं हो रही पहचान
वैज्ञानिकों का कहना है कि वायरस के जीनोम का पता लगाने के लिए हर राज्य से मरीजों के सैंपल एकत्रित किए जा रहे हैं। दिल्ली में कई सैंपल ऐसे हैं जिनमें अब तक वे जीनोम का पता नहीं लगाए पाए हैं। दिल्ली में अब तक कोरोना वायरस के चार क्लैड वैज्ञानिकों को मिल चुके हैं।
इनमें ए3आई और ए2ए सर्वाधिक है जबकि कई मरीजों में क्लैड बी और ए1ए मिल चुका है जोकि वैज्ञानिक तौर पर ज्यादा प्रसारित होने की क्षमता रखता है जबकि तमिलनाडु के कोरोना संक्रमित मरीजों में केवल दो ही तरह के क्लैड अब तक मिले हैं। महाराष्ट्र, दिल्ली, गुजरात, ओड़िशा और पश्चिम बंगाल ऐसे राज्य हैं जहां के मरीजों में दो से अधिक क्लैड मौजूद हैं।
81 जीनोम किए सुरक्षित
डॉ. मिश्रा ने बताया कि दिल्ली से आए कोरोना मरीजों के सैंपल में से अब तक 81 जीनोम सुरक्षित किए गए हैं जिनके परीक्षण के बाद ही क्लैड का पता लगाया है। यह प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी। ताकि यह पता लगाया जा सके कि देश के किस हिस्से में कोरोना वायरस का कौन सा रूप ज्यादा असरदार है या कम।
दिल्ली में कब-कब मिले कोरोना के नए रूप
दिनांक क्लैड
13 मार्च ए2ए
15 मार्च ए2ए, ए1ए
16 मार्च बी
31 मार्च ए3आई
(नोट: अप्रैल से लेकर अब तक दिल्ली में ए3आई और ए2ए क्लैड ही मिल रहे हैं।)