{"_id":"5fddf1c08ebc3e3f5f6bca64","slug":"child-suffering-from-rare-disease-file-plea-in-court-for-his-treatment","type":"story","status":"publish","title_hn":"दुर्लभ रोग से ग्रस्त बच्चे के इलाज के लिए चाहिए साढ़े तीन करोड़, हाईकोर्ट में दायर की याचिका","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दुर्लभ रोग से ग्रस्त बच्चे के इलाज के लिए चाहिए साढ़े तीन करोड़, हाईकोर्ट में दायर की याचिका
Sat, 19 Dec 2020 05:58 PM IST
पूजा त्रिपाठी
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: पूजा त्रिपाठी
Updated Sat, 19 Dec 2020 05:58 PM IST
विज्ञापन
दिल्ली हाईकोर्ट
- फोटो : एएनआई
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दुर्लभ रोग 'डुचेर्न मैकुलर डिस्ट्रॉफी' (डीएमडी) से पीड़ित 4 वर्ष के बच्चे अविराज गर्ग ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर इलाज करवाने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय को निर्देश देने का आग्रह किया है। याची ने तर्क रखा कि उसके इलाज पर करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये का खर्च आएगा जिससे परिवार के सदस्य वहन करने में असमर्थ है।
विज्ञापन
अधिवक्ता अशोक अग्रवाल के जरिए दायर याचिका में कह गया है कि बच्चे अविराज गर्ग का जन्म 8 जनवरी 2017 को हुआ था। वर्ष 2018 तक सब कुछ सामान्य रहा लेकिन इसके बाद उसकी तबीयत खराब होने लगी। उनके परिवार के सदस्यों ने कई टेस्ट करवाए तो पता चला कि वह दुर्लभ रोग 'डुचेर्न मैकुलर डिस्ट्रॉफी' (डीएमडी) से पीड़ित है।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि याची के पिता नोएडा में एक कंपनी में सीनियर मैनेजर व मां खतोली यूपी में सरकार स्कूल में टीचर है। दोनों की वार्षिक आय 18 लाख के करीब है।
विज्ञापन
उन्होंने एम्स में इलाज के लिए संपर्क किया लेकिन इलाज का खर्च ज्यादा होने के चलते डॉक्टरों ने इलाज से मना कर दिया। अधिवक्ता अशोक अग्रवाल ने उक्त बीमारी में दवाएं अत्याधिक महंगी है और अधिकांश दवाएं विदेशों से मंगवाई जाती हैं। उन्होंने कहा संविधान के अनुच्छेद के तहत उनके मुवक्किल को जीने व निशुल्क इलाज करवाने का अधिकार है।
उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि सरकार को निर्देश दिया जाए कि उनके मुवक्किल को एंटीसेंस ओलिगोन्यूलोटाइड थेरेपी के माध्यम से मुफ्त में उपचार प्रदान किया जाए। इस याचिका पर 21 दिसंबर को सुनवाई होगी।