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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Breaking a marriage after a love affair need not be a breach of promise: High Court

प्रेम प्रसंग के बाद शादी तोड़ना जरूरी नहीं की वादाखिलाफी हो : हाईकोर्ट

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 04 Oct 2025 07:59 PM IST
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- कोर्ट ने एक व्यक्ति को जमानत देते हुए यह टिप्पणी की, एक महिला ने शादी का झूठा वादा कर यौन शोषण और दहेज मांगने का लगाया था आरोप
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संवाद न्यूज एजेंसी

नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने एक मामले में कहा कि प्रेम प्रसंग के बाद शादी न करना, वादा तोड़ने के समान नहीं है और इसे दुष्कर्म नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने एक व्यक्ति को जमानत देते हुए यह टिप्पणी की। एक महिला ने शादी का झूठा वादा कर यौन शोषण और दहेज मांगने का आरोप लगाया था। न्यायमूर्ति अरुण मोंगा ने कहा कि दो वयस्कों ने सहमति से संबंध बनाए और बाद में एक पक्ष ने शादी से इन्कार कर दिया। यह एक वैध निर्णय है और इसे वादा तोड़ना नहीं कहा जा सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रेम प्रसंग का उद्देश्य आपसी अनुकूलता जांचना होता है। अगर कोई बाद में शादी से पीछे हटता है तो यह अपराध नहीं है।



महिला की मुलाकात आरोपी से अप्रैल में एक वैवाहिक वेबसाइट के जरिए हुई थी। महिला ने आरोप लगाया कि व्यक्ति ने खुद को दुबई में बसा बताया और शादी का वादा कर भारत में एक होटल में उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। उसने दावा किया कि व्यक्ति ने उसकी आपत्तिजनक तस्वीरें लीं और बाद में दहेज के रूप में फ्लैट, लक्जरी कार और नकदी की मांग की। महिला ने कहा कि व्यक्ति और उसके परिवार ने धमकी दी कि मांगें पूरी न होने पर शादी नहीं होगी। कोर्ट ने पाया कि महिला ने एक व्हाट्सएप संदेश में कहा था कि कोई शारीरिक संबंध नहीं बने, जो उसकी एफआईआर से मेल नहीं खाता।
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कोर्ट ने कहा कि शादी का इरादा नाकाम होने पर दुष्कर्म का आरोप नहीं लगाया जा सकता। दहेज और ब्लैकमेल के आरोपों को अलग अपराध मानते हुए कोर्ट ने कहा कि ये दुष्कर्म की धारा (बीएनएस 69) के तहत नहीं आते। न्यायमूर्ति मोंगा ने कहा कि दहेज निषेध अधिनियम के तहत मांग का आरोप जमानती है और इस मामले में कोई दहेज लेन-देन नहीं हुआ। कोर्ट ने माना कि आरोपी के साक्ष्य छेड़छाड़ या फरार होने की आशंका नहीं है, क्योंकि वह समाज में स्थापित व्यक्ति है और उसका परिवार है। कोर्ट ने निष्कर्ष दिया कि जमानत का मुख्य उद्देश्य मुकदमे के दौरान आरोपी की उपस्थिति सुनिश्चित करना है।
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