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मंदिर-गुरुद्वारे के बाद जामा मस्जिद पहुंचे चंद्रशेखर, सीएए और एनआरसी के खिलाफ दर्ज कराया विरोध
Fri, 17 Jan 2020 02:50 PM IST
पूजा त्रिपाठी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: पूजा त्रिपाठी
Updated Fri, 17 Jan 2020 02:50 PM IST
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भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर पहुंचे जामा मस्जिद
- फोटो : ANI
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तिहाड़ जेल से बाहर आने के बाद शुक्रवार को भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर मंदिर और गुरुद्वारे के बाद जामा मस्जिद पहुंचे। यहां सैकड़ों समर्थकों के बीच उन्होंने संविधान पढ़ा और सीएए व एनआरसी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि देश के हर नागरिक की जिम्मेदारी संविधान की रक्षा करना है।
जुमे की नमाज के बाद जामा मस्जिद के बाहर सैकड़ों लोग विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। अदालत से चंद्रशेखर को किसी भी पूजा स्थल पर जाने की अनुमति मिली थी, लेकिन 24 घंटे के अंदर उन्हें दिल्ली छोड़ना जरूरी था। इसीलिए वे शुक्रवार सुबह 10 बजे गुरु रविदास मंदिर, फिर गुरुद्वारा शीशगंज साहेब, भगवान वाल्मीकि मंदिर और दोपहर करीब 1 बजे जामा मस्जिद पहुंचे। यहां विरोध प्रदर्शन के बाद वे शाहीन बाग स्थित धरना स्थल पर भी गए। इसके बाद, नई दिल्ली स्थित वूमेन प्रेस क्लब में पत्रकारों से वार्ता के बाद वे सहारनपुर रवाना हुए।
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चंद्रशेखर को बीते बृहस्पतिवार की रात ही तिहाड़ जेल से रिहा किया गया था। पुरानी दिल्ली के दरियागंज में सीएए के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हिंसा के सिलसिले में उन्हें गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने पुलिस की अनुमति के बगैर 20 दिसंबर को सीएए के खिलाफ जामा मस्जिद से जंतर-मंतर तक मार्च का आयोजन किया था। इसके बाद उन्हें 21 दिसंबर को न्यायिक हिरासत में भेजा गया था।
जामा मस्जिद की सीढ़ियों पर प्रदर्शनकारियों के साथ बैठकर संविधान की प्रस्तावना पढ़ने के बाद उन्होंने कहा कि वह अपने परिवार के लोगों से मिलने आए हैं। यही वो जगह है, जहां उन्हें अपने परिवार से दूर किया गया था। शांतिपूर्ण विरोध हमारी ताकत है। सभी धर्मों के लोग जो हमारा समर्थन करते हैं, उन्हें बड़ी संख्या में साथ आकर साबित करना चाहिए कि यह विरोध सिर्फ मुस्लिम समाज का नहीं है। उन्होंने सीएए और एनआरसी को काला कानून बताते हुए इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते रहने की बात भी कही।
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जुमे की नमाज के बाद जामा मस्जिद के बाहर सैकड़ों लोग विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। अदालत से चंद्रशेखर को किसी भी पूजा स्थल पर जाने की अनुमति मिली थी, लेकिन 24 घंटे के अंदर उन्हें दिल्ली छोड़ना जरूरी था। इसीलिए वे शुक्रवार सुबह 10 बजे गुरु रविदास मंदिर, फिर गुरुद्वारा शीशगंज साहेब, भगवान वाल्मीकि मंदिर और दोपहर करीब 1 बजे जामा मस्जिद पहुंचे। यहां विरोध प्रदर्शन के बाद वे शाहीन बाग स्थित धरना स्थल पर भी गए। इसके बाद, नई दिल्ली स्थित वूमेन प्रेस क्लब में पत्रकारों से वार्ता के बाद वे सहारनपुर रवाना हुए।
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चंद्रशेखर को बीते बृहस्पतिवार की रात ही तिहाड़ जेल से रिहा किया गया था। पुरानी दिल्ली के दरियागंज में सीएए के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हिंसा के सिलसिले में उन्हें गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने पुलिस की अनुमति के बगैर 20 दिसंबर को सीएए के खिलाफ जामा मस्जिद से जंतर-मंतर तक मार्च का आयोजन किया था। इसके बाद उन्हें 21 दिसंबर को न्यायिक हिरासत में भेजा गया था।
जामा मस्जिद की सीढ़ियों पर प्रदर्शनकारियों के साथ बैठकर संविधान की प्रस्तावना पढ़ने के बाद उन्होंने कहा कि वह अपने परिवार के लोगों से मिलने आए हैं। यही वो जगह है, जहां उन्हें अपने परिवार से दूर किया गया था। शांतिपूर्ण विरोध हमारी ताकत है। सभी धर्मों के लोग जो हमारा समर्थन करते हैं, उन्हें बड़ी संख्या में साथ आकर साबित करना चाहिए कि यह विरोध सिर्फ मुस्लिम समाज का नहीं है। उन्होंने सीएए और एनआरसी को काला कानून बताते हुए इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते रहने की बात भी कही।