BJP को रोकने के लिए राष्ट्रपति से मिलेंगे केजरीवाल
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दिल्ली विधानसभा की वर्तमान स्थिति में भाजपा को सरकार बनाने का न्यौता मिलने से पहले उपराज्यपाल के सक्षम अपना बहुमत दिखाना होगा। वह भाजपा को तभी सरकार बनाने के बुला सकते है, जब उसके पास बहुमत का जादुई आंकड़ा हो।
इस तरह भाजपा को सरकार बनाने से पहले उपराज्यपाल के पास अपने व अकाली दल के 29 विधायकों की सूची देने के साथ-साथ समर्थन देने वाले अन्य कम से कम पांच विधायकों के समर्थन का पत्र देना होगा।
वर्ष 1999 में बिहार में सरकार बनाने के संबंध में राबड़ी देवी के दावे के संबंध में सप्रु जयकर मोतीलाल सीआर दास बनाम केंद्र सरकार के आए फैसले में स्पष्ट है कि राज्यपाल बहुमत प्राप्त दल को सरकार बनाने के लिए न्यौता दे सकते है।
यह मामला कोर्ट में तब गया जब बिहार में किसी भी दल को बहुमत नहीं मिलने की स्थिति में जनता दल यू के नेता नीतीश कुमार सबसे बड़े दल के नेता होने के चलते मुख्यमंत्री बन गए थे, मगर बहुमत साबित होता नहीं दिखने पर उन्होंने त्याग पत्र दे दिया था।
इस दौरान राज्यपाल ने विधानसभा को निलंबित कर दिया था। इसी बीच राबड़ी देवी ने दूसरे बड़े नेता के नाते सरकार बनाने का न्यौता नहीं मिलने पर आपत्ति जताई थी। इस संबंध में संविधान के अनुच्छेद 163 में भी उल्लेख है।
केजरी ने खटखटाया राष्ट्रपति का दरवाजा
इस फैसले के बाद कई बार झारखंड व कर्नाटक में किसी भी दल के पास बहुमत नहीं होने की स्थिति सामने आई। उस दौरान दोनों राज्यों के राज्यपाल ने तभी किसी दल को सरकार बनाने का न्यौता दिया जब उसके विधायक दल के नेता ने सरकार बनाने के लिए सरकार बनाने के लिए आवश्यक विधायकों की सूची राज्यपाल को सौंपी।
वर्तमान में दिल्ली में भी कर्नाटक व झारखंड जैसी स्थिति है। इस तरह उपराज्यपाल ने किसी भी दल को सरकार बनवाने का न्यौता देने से पहले यह सुनिश्चित करना होगा कि उसके पास बहुमत है। इस तरह भाजपा को विधानसभा में बहुमत साबित करने से पहले उन विधायकों के नाम बताने होंगे जो उसका साथ देंगे।
इस दौरान समर्थन देने वाले कांग्रेस या फिर आप के विधायकों की संख्या दो तिहाई नहीं होने पर सरकार बनाने का न्यौता देने की स्थिति में उपराज्यपाल भी विवादों से घिर सकते है। गैर कानूनी तौर पर तोड़फोड़ होने के बाद सरकार बनवाने का उन पर आरोप लगेंगे।
आज केजरीवाल राष्ट्रपति से मिलेंगे
दिल्ली में सरकार बनाने का विरोध और नए सिरे से विधानसभा चुनाव की मांग कर रहे आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने उपराज्यपाल की ओर से सरकार के गठन की शुरू की पहल के बीच राष्ट्रपति का दरवाजा खटखटाया। वह शनिवार की शाम साढ़े छह बजे राष्ट्रपति से मिलेंगे। यह जानकारी अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट करके जानकारी दी।
आम आदमी पार्टी के सूत्रों के अनुसार अरविंद केजरीवाल राष्ट्रपति को बताएंगे की दिल्ली में किसी भी दल के पास बहुमत नहीं है और न ही कोई भी दल एक-दूसरे की सरकार बनवाने के लिए समर्थन देने का तैयार है।
ऐसी स्थिति में भाजपा जोड़तोड़ कर सरकार बनाना चाहती है और उसने सरकार बनाने की पहल शुरू करने के लिए उपराज्यपाल पर दबाव बनाया है। वह राष्ट्रपति से आग्रह करेंगे कि खरीद फरोख्त करके सरकार बनाने की शुरू हुई भाजपा की पहल को रोकने का कार्य करें। वह किसी भी स्थिति में अल्पमत की सरकार नहीं बनने दे।