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Delhi NCR News: विरोध प्रदर्शन मामले में अलका लांबा की पुनरीक्षण याचिका खारिज
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- 14 जनवरी को कोर्ट ने अलका लांबा के खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप तय किए थे
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। राउज एवेन्यू कोर्ट ने महिलाओं के आरक्षण के समर्थन में जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़े मामले में पूर्व विधायक अलका लांबा की याचिका खारिज कर दी है। उन्होंने अपने खिलाफ आरोप तय किए जाने के आदेश को चुनौती दी थी। कोर्ट ने कहा कि आरोप तय करने के आदेश में कोई कानूनी खामी नहीं है। विशेष न्यायाधीश दिग्विनय सिंह ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने उपलब्ध सबूतों को देखते हुए यह माना कि मामले में पहली नजर में आरोप बनते हैं। कोर्ट ने कहा कि इस स्तर पर यह देखना जरूरी नहीं है कि आरोप पूरी तरह साबित होंगे या नहीं, बल्कि यह देखना होता है कि केस आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त आधार है या नहीं। अदालत कहा कि स्वतंत्र गवाहों की कमी, चोट न लगने और प्रदर्शन की प्रकृति जैसे तर्कों पर सुनवाई ट्रायल के दौरान होगी, न कि इस चरण में। 14 जनवरी को कोर्ट ने अलका लांबा के खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप तय किए थे। उनके खिलाफ 2024 में संसद मार्ग थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। उन पर सरकारी आदेश के उल्लंघन और सरकारी कर्मचारियों को काम करने से रोकने के आरोप हैं। अलका लांबा ने सभी आरोपों से इन्कार किया है और मामले में ट्रायल की मांग की है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। राउज एवेन्यू कोर्ट ने महिलाओं के आरक्षण के समर्थन में जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़े मामले में पूर्व विधायक अलका लांबा की याचिका खारिज कर दी है। उन्होंने अपने खिलाफ आरोप तय किए जाने के आदेश को चुनौती दी थी। कोर्ट ने कहा कि आरोप तय करने के आदेश में कोई कानूनी खामी नहीं है। विशेष न्यायाधीश दिग्विनय सिंह ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने उपलब्ध सबूतों को देखते हुए यह माना कि मामले में पहली नजर में आरोप बनते हैं। कोर्ट ने कहा कि इस स्तर पर यह देखना जरूरी नहीं है कि आरोप पूरी तरह साबित होंगे या नहीं, बल्कि यह देखना होता है कि केस आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त आधार है या नहीं। अदालत कहा कि स्वतंत्र गवाहों की कमी, चोट न लगने और प्रदर्शन की प्रकृति जैसे तर्कों पर सुनवाई ट्रायल के दौरान होगी, न कि इस चरण में। 14 जनवरी को कोर्ट ने अलका लांबा के खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप तय किए थे। उनके खिलाफ 2024 में संसद मार्ग थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। उन पर सरकारी आदेश के उल्लंघन और सरकारी कर्मचारियों को काम करने से रोकने के आरोप हैं। अलका लांबा ने सभी आरोपों से इन्कार किया है और मामले में ट्रायल की मांग की है।