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सीने में धंसे 97 छर्रों ने लिया टेनिस बॉल का आकार, जिंदा रहना किसी चमत्कार से कम नहीं

Sat, 06 Jan 2018 04:12 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 06 Jan 2018 04:12 PM IST
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aiims doctors operated a man who was having 97 pellets in his chest for 4 years
एम्स में हुई सर्जरी

नई दिल्ली से एक हैरान करने देने वाली घटना सामने आई है। एक युवक ज‌िसका नाम आरिफ हुसैन है, वह पिछले 4 सालों से अपने सीने में 97 छर्रे लिए घूम रहा है।

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टाइम्स ऑफ इंड‌िया ‌में छपी एक खबर के अनुसार, 4 साल से 97 छर्रे अपने छाती में लिए घूमने वाले इस शख्स की उम्र 27 साल है और इसका जिंदा होना किसी चमत्कार से कम नहीं है। हम बता दें कि इतने छर्रे सीने में गड़े होने के बावजूद यह शख्स इ‌सलिए बच गया क्योंकि उसे जो गोली लगी थी वह उसके फेफड़े, दिल और बाईं धमनी के बीच कहीं खाली जगह पर लगी थी।
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हालांकि गुजरते सालों के साथ उसके सीने में धंसे इन छर्रों ने सड़कर टेनिस बॉल का आकार ले लिया था। ये पस बन चुके थे और इनमें से बदबू आने लगी थी। एम्स के सर्जरी के प्रोफेसर डॉक्टर बिप्लब मिश्रा का कहना है कि अगर इसका तुरंत इलाज नहीं किया जाता तो आरिफ की जान भी जा सकती थी।
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मुरादाबाद का रहने वाला आरिफ अपनी तकलीफ से परेशान हो चुका था और अपने गृहनगर के सभी बड़े डॉक्टरों समेत मेरठ के डॉक्टरों से भी संपर्क कर चुका था लेकिन कोई भी डर की वजह से उसका ऑपरेशन करने को तैयार नहीं था।

उन डॉक्टरों का मानना था कि अगर छोटी सी भी गलती हो गई तो आरिफ के दिल, फेफड़े या बाईं धमनी में से किसी को भी नुकसान हो सकता है जिससे उसकी जान को खतरा हो सकता है।

द‌िल से बस एक सेंटीमीटर ऊपर थे छर्रे

aiims doctors operated a man who was having 97 pellets in his chest for 4 years
एम्स में हुई सर्जरी - फोटो : टाइम्स ऑफ इंड‌िया

इसके बाद सब जगह से हार मानकर आरिफ दिल्ली के एम्स अस्पताल पहुंचा। एम्स में डॉक्टर बिप्लब मिश्रा ने आरिफ की सर्जरी करने का चैलेंज लिया जो चेस्ट के अंदर के ऑर्गन्स की सर्जरी करने के स्पेशलिस्ट हैं।

डॉक्टर मिश्रा ने बताया कि वैसे तो यह ऑपरेशन काफी मुश्किल था और मैंने मरीज को बता दिया था कि इस ऑपरेशन में उसकी जान भी जा सकती है। लेकिन जब मरीज ने कहा कि वो ये चांस लेगा तो मेरे अंदर भी आत्मविश्वास आ गया।

यह केस कितना चैलेंजिंग था ‌इसका पता इसी बात से चलता है कि 97 छर्रों में से अधिकतर एक झुंड में हार्ट वॉल से सिर्फ 1 सेंटीमीटर ऊपर थे और बाईं धमनी और बाएं फेफड़े से बस कुछ ही दूरी पर धंसे हुए थे।

सबसे पहले हमने कई सिटी स्कैन किए। यहां तक कि ऑपरेशन के दौरान भी फ्लोरोस्कोप का इस्तेमाल किया। फ्लोरोस्कोप एक ऐसी तकनीक है जिसमें सर्जरी के दौरान रियल टाइम इमेज एक्सरे के माध्यम से दिखती रहती है।

स‌िर्फ छर्रे ही नहीं ये भी फंसा था आर‌िफ के सीने में...

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एम्स

पहले डॉक्टरों ने ब्रेस्ट की हड्डी को काटा और इंफेक्टेड हिस्से को बाहर निकाला। उसके बाद वो और गहराई में गए और छर्रे निकाले। यहां उन्हें एक चौंकाने वाली बात पता चली। आरिफ के सीने में ना सिर्फ छर्रे अटके थे बल्कि रुई भी अटकी थी।

दरअसल आरिफ को जब गोली लगी तो वह रजाई ओढ़कर सो रहा था। जब गोली मारी गई तो छर्रों के साथ ही रजाई की कुछ रुई भी छर्रों के साथ ही सीने के अंदर चली गई।

चार सालों से शरीर के अंदर छर्रे व रुई घुसे होने से कई घाव हो गए थे, जिन्हें डॉक्टरों ने बहुत संभालकर बाहर किया। सर्जरी पूरी होने के बाद प्लास्टिक सर्जन ने कैविटी से खाली हुए एरिया को किसी दूसरे एरिया से मसल निकालकर भर दिया। ऑपरेशन के चार दिन बाद आरिफ को डिस्चार्ज कर दिया गया।

आरिफ ने बताया कि उसे उसकी शादी से 17 दिन पहले गोली मारी गई थी। इसके पीछे का कारण संपत्ति विवाद था।

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