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सुनपेड़: अब घर में नहीं रहा कोई कमाने खाने वाला

Sat, 24 Oct 2015 10:19 AM IST
Updated Sat, 24 Oct 2015 10:19 AM IST
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Accused family asking for justice in sunped village faridabad

जो खुद एक साल से टूटा पड़ा हो वो भला क्या बदला लेगा? यह दर्द आरोपी पक्ष की महिलाओं की आंखों और जुबान पर था। पिछले साल अक्तूबर में सुनपेड़ गांव तब सुर्खियों में आया था, जब मोबाइल के विवाद में राजपूत परिवार के तीन लोग मारे गए थे।

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इस घटना में मारे गए इंद्राज की पत्नी नीरज ने बताया कि घटना के बाद उनके घर में कमाने वाला भी कोई नहीं रहा। सालभर बाद पटरी से उतरी जिंदगी संभालने की कोशिश कर रहे थे कि 20 अक्तूबर की घटना ने फिर से तोड़कर रख दिया है।
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नीरज ने कहा कि घर में कमाने वाला भी कोई नहीं रहा है। तिहरे हत्याकांड का मामला कोर्ट में चल रहा है। अदालत जो फैसला देगी हमें मान्य होगा। उन्होंने बताया कि अब जब कोर्ट का फैसला आने वाला है तो जितेंद्र और उसके घरवालों ने षड्यंत्र रच डाला।
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मामला एक साल से शांत पड़ा था। ऐसे में मामले को बेवजह उलझाने के लिए यह कदम उठाया गया है। राजपूत परिवार के लोगों का कहना है कि उनके मन में बदला लेने जैसी कोई भावना नहीं थी।

नहीं तो पिछले साल तीन मौतों के मामले में हुई एफआईआर में जितेंद्र का भी नाम लिखवा सकते थे। लेकिन उस समय जितेंद्र गांव में नहीं था, ऐसे में निर्दोष का नाम लिखवाना उचित नहीं था।

मुआवजा नहीं, मुझे मेरे बच्चे वापस दे दो

Accused family asking for justice in sunped village faridabad

‘साहब, दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। हमें तो कोई मुआवजा राशि नहीं चाहिए। मुझे मेरे बच्चे वापस दे दो। हम अपना शरीर बेचकर उतने पैसे दे देंगे।

गांव में रहना छोड़ दूंगा। बस मेरे बच्चों को वापस ला दो’। ये कहना है अग्निकांड में घायल पीड़ित जितेंद्र का। वह मीडिया से बार-बार अपने बच्चों को वापस लाने की मांग कर रहा है।

बृहस्पतिवार की शाम जितेंद्र को सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया। इससे पहले उसके घर में मीडिया और नेताओं का जमावड़ा लगा रहा। जब जितेंद्र से सवाल किया गया कि सरकार की दी हुई मुआवजा राशि स्वीकार है।

एक मिनट की चुप्पी के बाद उसने कहा कि हमें कोई मुआवजा राशि नहीं चाहिए। मुझे मेरे बच्चे दे दो और हम उतना पैसा दे देंगे। उन्होंने कहा कि दबंगों ने पूरे वंश को खत्म करने की चेतावनी दी थी।

उन लोगों ने मेरा वंश खत्म कर दिया। अब मैं गांव में नहीं रहना चाहता। हम गांव छोड़ कर चले जाएंगे। स्थानीय प्रशासन पर अब हमें विश्वास नहीं है।

मां की कोख हो गई सूनी

Accused family asking for justice in sunped village faridabad

जितेंद्र और रेखा की शादी पांच साल पहले ही पलवल जिले के हसनपुर के गांव बेलाबाता में हुई थी। तीन सगे भाइयों में जितेंद्र सबसे बड़ा है। जितेंद्र के चचेरे भाई हुकुमचंद ने बताया कि इसके दोनों छोटे भाई पवन और सतेंद्र तिहरे हत्याकांड में जेल में हैं।

अभागी मां रेखा ने सपने में भी नहीं सोचा था कि शादी के पांच साल में ही उसकी कोख सूनी हो जाएगी। लेकिन शायद कुदरत को यही मंजूर था।

परिजनों के मुताबिक, अग्निकांड की शिकार हुई रेखा को सफदरजंग अस्पताल के आईसीयू में रखा गया है। अभी उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। परिजनों के मुताबिक डॉक्टर किसी को मिलने नहीं दे रहे हैं।

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