असल में दिल्ली को चाहिए ये 5 आजादी
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दिल्ली सरकार को खुद फैसले लेने का पूर्ण अधिकार नहीं है। जमीन, पुलिस से जुड़े फैसले सीधे केन्द्र सरकार के पास हैं तो अंतिम मुहर उपराज्यपाल से लगवानी होती है। दिल्ली सचिवालय और राजनिवास के बीच कई बार वाकयुद्घ हुआ लेकिन दिल्ली सरकार को पूर्ण अधिकार नहीं मिले।
दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने का प्रयास पहली बार 29 अक्तूबर, 1953 को विधानसभा में प्रस्ताव पास करके किया गया। तब से आधा दर्जन बार प्रस्ताव पास हो चुके। चिट्ठी लिखी गई। भाजपा, कांग्रेस और पिछले चुनाव में आम आदमी पार्टी के घोषणापत्र में भी पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाना शामिल था। लेकिन राज्य व केन्द्र के एकमत होने का इंतजार जनता को है।
आजादी नंबर दो
राजधानी में 1639 अवैध कालोनी पंजीकृत हैं। लंबी जद्दोजहद और चुनाव माइलेज लेने की चाहत में कागजी तौर पर 895 कालोनियों नियमित भी की गईं लेकिन वैध तरीके से नक्शा पास करवाकर घर बनाने की स्वतंत्रता नहीं मिली। अनधिकृत कालोनियों को नियमित करने का पहला सर्वे 1993 में हुआ था।
तब से फाईलें दिल्ली सचिवालय, केन्द्र सरकार और कोर्ट के बीच आती-जाती रहीं लेकिन अभी भी एमसीडी, पुलिस, राजस्व अधिकारी को चढ़ावा चढ़ाए बिना अनधिकृत कालोनी में मकान बनाने की आजादी नहीं मिली। इससे पूर्व 1977 में जिन कालोनियों का नियमन हुआ था, अभी तक वहां रजिस्ट्री नहीं होती।
आजादी नंबर तीन
कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान राजधानी को स्लम फ्री बनाने का फैसला सरकार ने किया था। सड़कों किनारे बसीं कुछ झुग्गी हटाई भी गई लेकिन राजधानी में अभी भी 685 झुग्गी बस्ती हैं। इसमें 352 डीडीए की भूमि पर हैं और 333 दिल्ली सरकार के विभिन्न विभागों की जमीन पर बसीं हैं।
दिल्ली आश्रय सुधार बोर्ड ने स्लम फ्री दिल्ली बनाने की योजना बनाई लेकिन अभी तक हालात में सुधार नहीं है। दिल्ली में गरीबों के लिए 64 हजार मकान बनाए जाने हैं लेकिन अभी करीब 9000 ही बन सकी हैं। इतना ही नहीं नई झुग्गी भी पुलिस व स्थानीय एजेंसी की मदद से बस रहीं हैं।
आजादी नंबर चार
दिल्ली में यमुना 22 किमी बहती है लेकिन यहां यमुना का पानी 70 फीसदी प्रदूषित हो जाता है। कोर्ट के दिशा निर्देश पर केन्द्र व राज्य सरकार ने मिलकर यमुना को साफ करने की योजनाओं पर काम किया। देश के कई राज्य व विदेशी नदियों की सफाई का अध्ययन करने का टूर अधिकारी कर आए।
यमुना एक्शन प्लान एक, दो व तीन पर कई हजार करोड़ रुपये खर्च हो गए लेकिन यमुना की गंदगी कम नहीं हो सकी। दिल्ली सरकार ने हाल ही में यमुना किनारे अतिक्रमण हटाने और साफ सफाई की व्यापक योजना बनाई है लेकिन विशेषज्ञ यमुना गंदगी के पीछे सरकार में इच्छा शक्ति की कमी बता रहे हैं।
और आजादी नंबर पांच
इन्द्रदेव की कृपा है कि इस बार मानसून की झमाझम बारिश दिल्ली में नहीं हुई। मानसून की तेज बारिश होते ही जलभराव और ट्रैफिक जाम जाम की खबरें सुर्खियां बनती है। 1911 में भारती की राजधानी बनी दिल्ली केलुटियन जोन में भी अब जलभराव होने लगा तो गोलचक्कर पर ट्रैफिक जाम के चलते लालबत्ती लगानी पड़ी।
न तो ड्रेनेज का मास्टर प्लान बन सका और न ही ट्रैफिक जाम से मुक्ति दिलाने वाली सड़कें बनी। खूब कोशिश के बावजूद पब्लिक ट्रांसपोर्ट की हिस्सेदारी बढ़ने की बजाय दिनों-दिन घट रही है।