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आंदोलन का असरः टीकरी बॉर्डर पर 20 दिन में 30 फीसदी किरायदारों ने छोड़े कमरे
Thu, 24 Dec 2020 05:46 AM IST
दुष्यंत शर्मा
किशन कुमार, नई दिल्ली
किशन कुमार, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Thu, 24 Dec 2020 05:46 AM IST
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फिर पलायन...
- फोटो : amar ujala
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टीकरी बार्डर पर करीब तीन सप्ताह से आंदोलनरत किसानों के हटे होने से ठप पड़ी अर्थव्यवस्था का असर अब स्थानीय किरायदारों पर पडने लगा है। यही वजह है कि पिछले 20 दिनों में करीब 30 फीसदी किरायेदार किराये का कमरा छोड़ गांव की ओर चल चुके हैं। साथ ही अन्य लोगों का भी जाना जारी है। दरअसल, टीकरी बॉर्डर पर बसी बाबा हरिदास कॉलोनी में अधिकतर किरायेदारी का काम होता है। यहां हजारों की संख्या में बने मकानों में 10 हजार से भी अधिक किरायेदार रहते हैं जो मजदूरी कर गुजारा बसर कर रहे हैं।
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नजदीकी फैक्टरियां भी हैं रोजगार का साधन
यहां रहने वाले कुछ मजदूर पास में ही रिक्शा चलाते हैं, कुछ काम की तलाश में दूर निकलते हैं तो कुछ नजदीक में औद्योगिक क्षेत्र में बसी फैक्टरियों में मजदूरी करते हैं, लेकिन लॉकडाउन के बाद से पटरी पर लौटती अर्थव्यवस्था पर प्रदर्शन की वजह से लगे ब्रेक से मजदूर भी प्रभावित हो रहे हैं। कुछ फैक्टरियों में प्रदर्शन की वजह से काम बहुत हल्का हो गया है। क्योंकि, आंदोनलन की वजह से बंद हुए मार्ग के कारण फैक्टरियों में भी कच्चा माल नहीं पहुंच पा रहा है जिसका खामियाजा मजदूरों को भुगतना पड़ रहा है।
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यूपी, बिहार व बंगाल के रहते हैं किरायेदार
स्थानीय मकानदार वीर प्रताप ने बताया कि यहां बने अधिकतर मकानों में यूपी, बिहार व बंगाल से अधिक किरायेदार रहने के लिए पहुंचते हैं। वहीं, कुछ नेपाल से भी मजदूरी के लिए पहुंचते हैं। कुछ किरायेदार लॉकडाउन में कमरा खाली करने के लिए तैयार हो गए थे, जबकि अब धीरे धीरे वही हालात बन रहे हैं। इसका सीधा असर मकान मालिकों पर भी पड़ेगा।
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प्रदर्शन खत्म होने पर लौटने की आस
स्थानीय मकान मालिक सुरेंद्र ने बताया कि कुछ किरायदारों को आस है कि कृषि कानूनों को लेकर जल्द ही किसानों और सरकार के बीच कोई हल निकलेगा और पहले की टीकरी बॉर्डर पर सब सामान्य होगा जिससे आर्थिक विकास के पहिये को भी रफ्तार मिलेगी और आमदनी के रास्ते खुलेंगे। तब एक बार फिर परिवार समेत यहां का रूख किया जाएगा।