फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   uttarakhand double engine government fail in haridwar doon highway

हरिद्वार-दून हाईवे पर लाचार, डबल इंजन की सरकार

Fri, 29 Sep 2017 01:25 PM IST
राकेश खंडूड़ी/ अमर उजाला, देहरादून
राकेश खंडूड़ी/ अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 29 Sep 2017 01:25 PM IST
विज्ञापन
uttarakhand double engine government fail in haridwar doon highway
cm trivendra singh rawat

हरिद्वार-देहरादून के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग पर डबल इंजन की सरकार लाचार नजर आ रही है। हरिद्वार से देहरादून के मध्य सड़क चौड़ीकरण का कार्य पूरी तरह से ठप है।

विज्ञापन


जबकि, डबल इंजन की सरकार से हाईवे निर्माण में तेजी दिखाने की उम्मीद की जा रही थी। हाईवे की दुर्दशा से क्षेत्र के लोगों की नाराजगी मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक के खाते में दर्ज हो रही है। मुख्यमंत्री की डोईवाला विधानसभा का बड़ा हिस्सा हाईवे में स्थित है।  
विज्ञापन

राजमार्ग का निर्माण भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) कर रही है। एनएचआई ने ईरा इन्फ्रा इंजीनियरिंग को हाईवे निर्माण का कार्य सौंपा है। सूत्रों की मानें तो काम को आगे बढ़ाने के लिए कंपनी को करोड़ों रुपये की दरकार है।
विज्ञापन
विज्ञापन


चिंता की बात यह है कि अभी हाईवे निर्माण का कार्य आधे से भी अधिक बाकी है। जगह-जगह से मार्ग खोद दिए जाने से ये असुरक्षित हो गया है। उस पर आए दिन हादसे हो रहे हैं। यही मुख्यमंत्री व हरिद्वार सांसद की सबसे बड़ी चिंता का कारण है। मुख्यमंत्री हाईवे निर्माण में तेजी लाने का मसला केंद्रीय सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से भी उठा चुके हैं।

एनएचएआई के उत्तराखंड प्रोजेक्ट डायरेक्ट प्रदीप गुसाईं का कहना है कि कंपनी ने हाईवे निर्माण के लिए 280 करोड़ रुपये की मांग की है। उसकी ये मांग भारत सरकार में विचाराधीन है। तब तक हाईवे की हालत सुधारने का काम को जारी रखने के लिए केंद्र सरकार से करीब 11 करोड़ रुपये मांगे गए हैं।

कंपनी को लेकर दुविधा ही दुविधा
कार्यदायी एजेंसी पर कार्रवाई को लेकर केंद्र व राज्य सरकार दुविधा में है। आधिकारिक सूत्रों की मानें तो कंपनी ने हाईवे निर्माण के लिए करीब 790 करोड़ रुपये का ऋण उठा रखा है। मगर हाईवे निर्माण में ये राशि व्यय नहीं की है। काम में सुस्ती से नाराज केंद्र सरकार एक बार तो कंपनी से कांट्रेक्ट छीनने जा रही थी, मगर बैंकों ने अपनी चिंता से अवगत कराया कि उनका करोड़ों रुपये फंस जाएगा। करार निरस्त होने के बाद इसके कानूनी पचड़े में फंसना तय है। इस दुविधा में केंद्र सरकार कोई रास्ता निकालने की सोच रही है। मगर कंपनी के ट्रैक रिकार्ड को देखकर वह आशंकित है कि वह 280 करोड़ रुपये की मदद के बाद भी हाईवे निर्माण का कार्य क्या पूरा कर पाएगी या नहीं।


केंद्र का प्रोजेक्ट, प्रदेश सरकार की जवाबदेही
नेशनल हाईवे के चौड़ीकरण का प्रोजेक्ट एनएचएआई के पास है, मगर सुस्त निर्माण को लेकर सवालों का सामना प्रदेश सरकार के लोक निर्माण विभाग को करना पड़ रहा है। अपर मुख्य सचिव लोनिवि ओम प्रकाश को कई बार व्यक्तिगत रूप से हाईवे को लेकर मोर्चा संभालना पड़ा है। राजधानी को जोड़ने वाले इस सबसे महत्वपूर्ण मार्ग की हालत को सुधारने का दबाव उस पर लगातार बना हुआ है। सूत्रों की मानें तो राष्ट्रपति व भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के उत्तराखंड दौरे के दौरान मार्ग को गड्ढामुक्त बनाने के लिए करीब 40 लाख रुपये खर्च करने पड़े।

प्रमुख बिंदु
-नवंबर 2011 को प्रोजेक्ट पर काम शुरू हुआ था।
-वर्ष 2013 में प्रोजेक्ट का काम पूरा हो जाना चाहिए था।
-कंपनी को 2016 तक निर्माण पूरा करने के लिए विस्तार मिला।
-राजमार्ग पर अभी भी करीब 50 फीसदी कार्य होना बाकी है।
-प्रोजेक्ट की लागत 478 करोड़ रुपये थी, जिसके बढ़ने के आसार हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed