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खाती की दीवारों पर चढ़ा नयी उम्मीद और जोश का रंग- दी वाइज वॉल प्रोजेक्ट

Thu, 12 Apr 2018 04:52 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 12 Apr 2018 04:52 PM IST
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The Hans Foundation has organised integrated village development programme in pindari uttarakhand
उत्तराखंड की तलहटी में स्थित खाती गांव है। अपनी संस्कृति और परंपराओं से समृद्ध इतिहास होने के बावजूद भी इस गांव को कईं चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।  इसके कई कारण हैं जैसे कई बुनियादी अप्राप्यता, खराब सड़कें, बिजली की कमी, नेटवर्क और इंटरनेट का अनुपस्थित होना।
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यह सारी सुविधाएं आज की मूल आवश्यकताएं हैं। शायद यही वजह है जो खाती के लोगों का व्यवसाय के लिए बाकी शहरों में प्रवास का उच्च कारण बन रहा है। खाती में हर साल दुनिया भर से सैकड़ों ट्रेकर्स पिंडारी ग्लेशियर पर ट्रेकिंग करने आते है, लेकिन आज भी कईं लोग खाती के इतिहास और संस्कृति से अवगत नहीं हैं। 
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द हंस फाउंडेशन ने "इंटेग्रेटिड विलेज डेवलपमेंट प्रोग्राम (IVDP)” शुरू करके खाती को प्राथमिकता दी। द हंस फाउंडेशन ने “फ्यूल प्रोजेक्ट” के सहयोग से एक कला परियोजना को कार्यान्वित किया, जिससे स्थानीय स्वास्थ्य की दृष्टि से दृश्यता और गांववालों की भागीदारी को बढ़ाया जा सके।
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इस आईवीडपी परियोजना के तहत स्थानीय ज्ञान, कहानियां, लोककथाओं और मिथकों को विस्तृत और सुव्यवस्थित तरीके से गांव के घरों में एवं दीवारों पर चित्रांकित किया गया, जिससे खाती की सांस्कृतिक विरासत बनी रहे और शहरी जनसंख्या और गांव दोनों के बीच की दूरी को पार करने में आसानी हो।

इस प्रक्रिया में टीम ने पूरे गांव की जीवन शैली का दस्तावेजीकरण किया और फिर गांव के घरों की दीवारों पर कला के माध्यम से सामूहिक ज्ञान का प्रदर्शन किया। कलाकार पूर्णिमा सुकुमार ने पूरे गांव की दीवारों पर खाती  निवासियों की कहानियों से अपनी कला का नेतृत्व किया, यह शैली कुमाऊं की चित्रकला शैली जिसे “ऐपण” कहते है उससे ली गई है।



 इस चित्रकला में खाती की कहानियों को ध्यान में रख कर दीवारों पर रंग भरा गया। इस प्रोजेक्ट के द्वारा द हंस फाउंडेशन ने खाती के गांव को एक बड़ी कक्षा में बदल दिया है, जिसमें प्रत्येक दीवार एक ब्लैकबोर्ड है, जो एक सरल जीवनशैली को उजागर करती है।


सोशल नेटवर्क के माध्यम से यह पहल लोगों में जागरूकता पैदा करती रहेगी और बाहरी लोगों एवं शहरवासियों द्वारा अक्सर अनदेखी हुई चीजों के बारे में मूल्य सिखाने के लिए प्रोत्साहित भी करेगी।
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