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सैनिकों की जंग: सालों बाद भी नहीं मिली शहीद के परिजनों को भूमि
Mon, 25 Feb 2019 11:44 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Mon, 25 Feb 2019 11:44 AM IST
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शहीद के माता -पिता
- फोटो : अमर उजाला
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सरहद पर अपनी जिंदगी को दांव पर लगाने के बाद आम नागरिक की भूमिका में आए प्रदेश के हजारों पूर्व सैनिकों की सुविधाओं से जुड़े मसले सरकारी तंत्र में उलझकर दम तोड़ रहे हैं। अमर उजाला ने इन मसलों की गहराई में जाकर उन्हें जिम्मेदारों तक पहुंचाने की कोशिश कर रहा है। यदि आपके पास भी पूर्व सैनिकों की दिक्कत से जुड़ी कोई भी जानकारी है तो उसे साझा कर सकते हैं।
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देश की रक्षा करते हुए शहीद हुए वीर जवान शहीद राइफलमैन विकास सिंह के परिजनों को 18 साल बाद भी भूमि नहीं मिल पाई है। 15 गढ़वाल राइफल्स के वीर जवान राइफलमैन विकास 11 जुलाई 2001 को कश्मीर के राजौरी में आतंकवादियों से लोहा लेते हुए शहीद हो गए थे। जिसके बाद सरकार ने शहीद के परिजनों को एक एकड़ भूमि देने की घोषणा की थी। लेकिन 18 सालों बाद न परिजनों को भूमि मिली और न ही छोटे भाई को कोई नौकरी।
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देश की सुरक्षा में जान न्यौछावर करने वाले शहीद विकास का परिवार शहर से छह किलोमीटर चंद्रोटी गांव में रहता है। सालों बाद भी परिजनों को भूमि का इंतजार है। शहीद विकास के पिता मोहन सिंह चौधरी ने बताया कि विकास देश की रक्षा करते हुए 11 जुलाई 2001 में शहीद हो गए थे। जिसके बाद सरकार ने एक एकड़ भूमि देने की घोषणा की थी। लेकिन सालों बाद भी सरकार की ओर से भूमि नहीं दी गई। इतना ही नहीं बड़े बेटे के शहीद होने के बाद छोटे बेटे को नौकरी भी नहीं मिल पाई है। उन्होंने बताया कि विकास का बचपन से ही सेना में भर्ती होकर देश की रक्षा करने का सपना था। लेकिन देश के लिए शहीद हुए विकास के परिजनों के लिए सरकार ने जो घोषणा की थी, सालों बाद भी पूरी नहीं हो पाई है। शहीद विकास सिंह सेना मेडल विजेता था।
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छोटे बेटे के लिए घर बनाने का है मां का सपना
शहीद राइफलमैन विकास सिंह की माता कृष्णा देवी ने कहा कि सरकार की ओर से मिलने वाली भूमि पर वह अपने छोटे बेटे सुभाष चौधरी के लिए घर बनाना चाहती है। उन्होंने कहा कि छोटे बेटा आर्थिक रूप से ज्यादा मजबूत नहीं है। ऐसे में उसके लिए सरकार की ओर से दी जाने वाली भूमि पर वह घर बनाना चाहती हैं।
शहीद का भाई चलाता है टैक्सी
देश के लिए शहीद हुए विकास सिंह का छोटा भाई पेशे से टैक्सी चालक है। भाई के शहीद होने के बाद कोई नौकरी ने मिलने के कारण छोटा भाई सुभाष चौधरी टैक्सी चलाकर बुजुर्ग मां-बाप का पालन पोषण कर रहा है। सुभाष ने कहा कि भाई के शहीद होने के बाद नौकरी के लिए उन्हाेंने कई बाद स्थानीय विधायक और नेताओं से मुलाकात तो की लेकिन नौकरी की समस्या दूर नहीं हो पाई। ऐसे में उन्होंने टैक्सी चलाने का निर्णय लिया। जिसके बाद दो बहनों की शादी करना भी उनके लिए किसी चुनौती से कम नहीं था।
साल 2012 में प्रशासन को लिखा था पत्र
सरकार की ओर से भूमि देने के संबंध में साल 2012 में जिला सैनिक कल्याण अधिकारी की ओर से उपजिलाधिकारी को पत्र लिखा गया था। जिसमें लिखा गया था कि शहीद विकास सिंह की माता कृष्णा देवी को भूमि आवंटन की जाए। बावजूद उसके सालों बाद भी परिजनों को भूमि नहीं मिल पाई।
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- शूरवीर सिंह