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देहरादून: पुश्ता ढहने से चार लोगों की मौत, डीआईजी ने दिए हादसे की जांच के आदेश

Thu, 16 Jul 2020 12:20 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Thu, 16 Jul 2020 12:20 AM IST
सार

  • स्थानीय लोग बार-बार उठा रहे पुश्ते पर सवाल, उत्कृष्ट ड्यूटी करने वालों के नाम पीएम जीवन रक्षक मेडल को भेजे जाएंगे : आईजी

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Dehradun House collapsed Incidence: DIG arun mohan joshi Order to Investigation
- फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

डीआईजी अरुण मोहन जोशी ने देहरादून की इंदिरा कॉलोनी में हुए हादसे की जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। घटना के बाद से मकान के पीछे गिरा पुश्ता सवालों के घेरे में है। स्थानीय लोग बार-बार इसी पुश्ते पर सवाल उठा रहे हैं। यह पुश्ता अवैध था या हादसा का कोई अन्य कारण रहा इसकी जांच कराई जाएगी। डीआईजी के मुताबिक आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। 

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डीआईजी जोशी ने बताया कि हादसा बहुत गंभीर है। पुलिस, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ के जवानों की कड़ी मेहनत से दो लोगों की जान बचाई जा सकी। लेकिन, प्रथमदृष्टया लोगों का जो आरोप है उसकी जांच होनी बहुत जरूरी है। लिहाजा, इस मामले में जांच के आदेश जारी किए गए हैं।
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ताकि, जो भी दोषी पाया जाए उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जा सके। इधर, यदि लोगों के आरोप सही निकले तो माना जा रहा है कि इस मामले में कुछ बड़े लोगों पर भी कार्रवाई हो सकती है। आईजी अभिनव कुमार ने बताया कि रेस्क्यू ऑपरेशन में उत्कृष्ट ड्यूटी करने वालों के नाम पीएम जीवन रक्षक मेडल के लिए भेजे जाएंगे। 
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अफसरों ने बढ़ाया हौसला, पूरे वक्त खड़े रहे डीआईजी 
बचाव कार्य के दौरान आईजी अभिनव कुमार भी मौके पर पहुंचे। जबकि, डीआईजी अरुण मोहन जोशी और अन्य अफसर वहां पहले से मौजूद थे। हादसे के बाद लगभग दस घंटे ऑपरेशन चला। इस दौरान अफसरों ने जवानों का हौसला बढ़ाए रखा। डीआईजी पूरे समय वहीं जवानों के साथ खड़े रहे। जबकि, सीओ सिटी शेखर सुयाल ने वहां जवानों के साथ मिलकर सरिया काटने से लेकर मलबा हटाने तक का काम किया। कई जवान बचाव कार्य के लिए जमींदोंज मकान के अंदर तक गए। 

कब क्या हुआ हादसा एक नजर

करीब मंगलवार रात 1.15 बजे हादसा हुआ।
1.30 बजे: पुलिस को सूचना मिली। 
1.45 बजे: पुलिस मौके पर पहुंची। 
2.30 बजे: कृष को सकुशल निकाला। 
4.30 बजे: समीर को बाहर निकाला। 
5.50 बजे: सृष्टि का शव निकाला। 
4.00 बजे: झाझरा से एनडीआरएफ पहुंची। 
8.20 बजे: विमला का शव निकाला। 
11.00 बजे: प्रमिला का शव निकाला। 

दो साल पहले दो-तीन दिन में हुए थे दो हादसे

राजधानी में इस तरह का यह पहला हादसा नहीं है। बल्कि पहले भी यह शहर इस तरह के हादसों का गवाह बन चुका है। इससे पहले साल 2017 के सितंबर में तीन दिन के भीतर ही दो हादसों में तीन लोगों की मौत हो गई थी। जबकि, दो लोगों को बचा लिया गया 

24 सितंबर 2017: शक्ति रोड डांगवाल मार्ग चुक्खुवाला-मकान के ऊपर निर्माणाधीन पुश्ता गिरने से मलबे में एक व्यक्ति की दबने से मौत हो गई थी। जबकि, एक को सकुशल बचा लिया था।
26 सितंबर 2017: आईटी पार्क के पास सहस्रधारा रोड- कुल्हान गांव के पास पुश्ता ढहने के कारण तीन मजदूर मलबे में दब गए थे। इनमें से एक को बचा लिया था। जबकि, दो मजदूरों की मौत हो गई थी।

चार की मौत के बाद जागा प्रशासन 

दो परिवारों पर मौत बनकर गिरे पुश्ते की स्थानीय लोग लंबे समय से शिकायत कर रहे थे। लेकिन, प्रशासन की नींद नहीं टूटी। हादसा हुआ तो प्रशासन की टीमें आसपास के मकानों को खाली कराने और अन्य कार्रवाई करने के लिए दौड़ लगाने लगी। जांच के लिए राजस्व विभाग से लेकर लोक निर्माण विभाग तक की टीमें पहुंची। लोगों में इस बात को लेकर रोष है यदि प्रशासन शिकायत का संज्ञान लेता तो यह हादसा शायद न होता।

दरअसल, कॉलोनी का यह मकान 25-30 साल पुराना है। इसके पीछे लगभग चार-पांच साल पहले एक बिल्डर ने मिट्टी भरना शुरू किया था। स्थानीय लोगों का यहां तक कहना है कि यह प्लाटिंग नॉन जेडए की भूमि पर की जा रही है। तभी से इस मिट्टी को रोकने के लिए बेतरतीब ढंग से पुश्ता बनाया जा रहा था।

इसकी जद् में और भी कई मकान हैं। जिसकी स्थानीय लोग शिकायत भी कर रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ता और पूर्व पार्षद अजय सोनकर ने बताया कि उन्होंने कोविड काल में भी प्रशासन से शिकायत की थी। लेकिन किसी ने गौर नहीं किया। पुश्ते पर काफी समय से दरार आ रहीं थी, लेकिन प्रशासन ने झांकना तक ठीक नहीं समझा। यदि समय रहते इस पर कार्रवाई की जाती तो शायद हादसा न होता।

पांच मकान और भी हैं जद में 

इस पुश्ते की जद में पांच मकान और भी हैं। पुश्ते पर जगह जगह दरारें आई हैं। इसके चलते आसपास के मकान की नींवों के पास भी दरारें आई हैं। यदि प्रशासन अब भी नहीं जागा तो यहां और हादसे हो सकते हैं। 

सीवर पानी सब इस पुश्ते के किनारे 
पुश्ते का निर्माण इतनी बेतरतीब ढंग से किया गया है कि वहां पानी निकासी तक का कोई साधन नहीं है। प्लाट में मौजूद मकानों और बारिश का पानी लंबे समय से इस पुश्ते के पास भर रहा था। जानकारों की मानें तो इसकी वजह से पुश्ता कमजोर होता गया और अब भरभराकर गिर गया। 

दो मंजिला होता मकान तो और बड़ा होता नुकसान 
मकान गिरने से सामने खड़ी पड़ोसी की कार भी क्षतिग्रस्त हो गई है। माना जा रहा है कि यदि मकान दो मंजिला होता तो और नुकसान होता। इस मकान के सामने बमुश्किल 15 फीट चौड़ी सड़क है। ऐसे में यदि मकान की ऊंचाई होती तो सामने वाले मकानों को भी नुकसान पहुंच सकता था।

ढहे मकान के आसपास वाले होंगे शिफ्ट 

इंद्रा नगर चुक्खुवाला में मंगलवार की देर रात मकान ढहने से चार लोगों की मौत के मामले को देखते हुए जिला प्रशासन ने आसपास के मकान में रहने वाले लोगों को दूसरी जगह शिफ्ट होने के निर्देश् दिए हैं। साथ ही अगर उनके पास शिफ्ट होने की व्यवस्था नहीं है तो प्रशासन उन्हें धर्मशाला या रैन बसेरों में शिफ्ट करेगा। 

डीएम डॉ. आशीष कुमार श्रीवास्तव ने एडीएम एफआर को पीडब्ल्यूडी और सिंचाई विभाग के अधिकारियों से बात कर घटना स्थल के आसपास के मकानों को खतरा होने की स्थिति पर वहां रहने वाले लोगों को दूसरी जगह शिफ्ट करने के निर्देश दिए।

जिसके बाद एडीएम एफआर बीर सिंह बुदियाल पीडब्ल्यूडी और सिंचाई विभाग के अधिकारियों के साथ निरीक्षण किया। उन्होंने खतरे को देखते हुए तहसीलदार दयाराम को वहां के मकानों में रहने वालों कोदूसरी जगह शिफ्ट कराने को कहा। जिस पर तहसीलदार ने वहां रहने वालों को बरसात का सीजन में खतरे को देखते हुए शिफ्ट होने की बात कही। साथ ही शिफ्टिंग में दिक्कत होने पर उन्हें धर्मशाला या रैन बसेरों में शिफ्ट करने को कहा।

दूसरे मकान में भी पहुंचा मलबा
हादसे में यह मकान तो पूरी तरह तबाह हो गया। इसके बराबर वाले मकान को भी नुकसान पहुंचा है। मकान का मलबा छिटककर दूसरे मकान में पहुंचा है। गनीमत रही कि कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ। परिवार के मुताबिक उनकी एसी क्षतिग्रस्त हुआ है। इससे परिवार की जान को खतरा हो सकता था। जिस मकान पर क्षतिग्रस्त मकान का मलबा गिरा है उसके कमरे में तीन माह का बच्चा अपने माता पिता के साथ सो रहा था। इस मकान का प्लास्टर भी उखड़कर गिरा गया है।

मकान की खिड़कियां तक क्षतिग्रस्त हुई हैं। गनीमत यह रही कि इस मकान के पीछे वाले पुश्ता अभी सलामत है। हालांकि, इस पर कई जगह दरारें आ गई हैं। इस हादसे के बाद पड़ोसियों का कहना है कि वे यहां से खुद खाली करके दूसरी जगह जा रहे हैं। जब तक इस पुश्ते को यहां से नहीं हटाया जाता वे आसपास के मकानों में नहीं रहे सकते। 

डीएम ने तलब की पीडब्ल्यूडी और सिंचाई विभाग से रिपोर्ट
जिलाधिकारी डॉ. आशीष कुमार श्रीवास्तव ने मंगलवार की देर रात इंद्रा नगर चुक्खूवाला में मकान ढहने से चार लोगों की मौत के मामले को लेकर पीडब्ल्यूडी और सिंचाई विभाग से रिपोर्ट तलब की है। जिसमें इस तरह की घटनाओं की वजह पूछी है। जिससे भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। 

गिरासू भवनों पर कार्रवाई करें अधिकारी 
डीएम डॉ. आशीष कुमार श्रीवास्तव ने जिले के सभी नगर निगमों, नगर पालिकाओं के साथ ही सभी एसडीएम को बरसात को देखते हुए गिरासू भवनों पर कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन गिरासू भवनों के मामले कोर्ट में चल रहे हैं, उन्हें भले ही बाद में देखें, लेकिन अन्य गिरासू भवनों पर तत्काल कार्रवाई करें। जिससे बरसात में किसी भी तरह के हादसों से लोगों को बचाया जा सके।

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