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घोटालेबाज अफसराें को बचाने में जुटे जांच टीम में शामिल कई अधिकारी
Updated Mon, 04 Jun 2018 02:12 AM IST
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घोटालेबाज अफसरों को बचा रहे जांच टीम के कई अधिकारी!
--31 मई तक सौंपनी थी जांच रिपोर्ट, देरी होने पर उठ रहे सवाल
--श्रीनगर-काशीपुर पावर ग्रिड लाइन निर्माण का मामला
--साल 2013 में कोबरा इंस्टालेशिया कंपनी को सौंपा गया था जिम्मा
--पांच साल बाद भी शुरू नहीं हो सका है निर्माण कार्य
अमर उजाला ब्यूरो
देेहरादून।
पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (पिटकुल) की ओर से साल 2013 में श्रीनगर से लेकर काशीपुर तक हाईटेंशन पावरग्रिड लाइन बिछाने का काम बजट जारी होने के बावजूद नहीं शुरू होने के मामले की जांच में अब लीपापोती की तैयारी है। सूत्रों की मानें तो जांच टीम में शामिल कई अधिकारी लापरवाह अफसरों व कर्मचारियों को बचाने की कोशिश में लगे हैं। इसके चलते 31 मई तक दी जाने वाली जांच रिपोर्ट आज तक सौंप नहीं गई है।
बता दें, श्रीनगर स्थित 400 केवी के पावर हाउस से लेकर काशीपुर पावर हाउस तक पावर ग्रिड लाइन बिछाने का काम करना था। लाइन बिछाने का काम कोबरा इंस्टालेशिया कंपनी को सौंपा गया, लेकिन साल 2013 में कंपनी को ठेका दिए जाने के बावजूद इस परियोजना पर आजतक कुछ भी काम नहीं हो सका है। परियोजना के लिए 530 करोड़ का बजट भी जारी हो चुका है। इसके बावजूद पिटकुल के आला अफसरों ने पांच साल तक न तो नया टेंडर जारी किया और न ही निर्माण कार्यों की कोई सुध ली।
इस मामले में प्रबंध निदेशक कैप्टन आलोक शेखर तिवारी के निर्देश पर प्रकरण की जांच की जा रही है। निदेशक वित्त अमिताभ मोइत्रा, निदेशक परिचालन संजय मित्तल की अगुवाई में गठित छह सदस्यीय जांच कमेटी प्रकरण की जांच कर रही है। सचिव ऊर्जा ने पिछले दिनों बोर्ड बैठक के दौरान 31 मई तक जांच पूरी करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद जांच रिपोर्ट अभीतक सौंपी नहीं गई है। सूत्राें का कहना है कि प्रकरण की निष्पक्षता से जांच की गई तो पिटकुल के कई अफसरों की नौकरी खतरे में पड़ सकती है। यही कारण है कि जांच टीम में शामिल कुछ अफसर दोषी अफसरों व कर्मचारियों को बचाने की फिराक में हैं और जानबूझ कर देरी की जा रही है। दूसरी ओर पिटकुल प्रबंध निदेशक कैप्टन आलोक शेखर तिवारी का कहना है कि प्रकरण की निष्पक्षता से जांच कराई जाएगी और जो भी अधिकारी, कर्मचारी दोषी पाए जाएंगे उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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--31 मई तक सौंपनी थी जांच रिपोर्ट, देरी होने पर उठ रहे सवाल
--श्रीनगर-काशीपुर पावर ग्रिड लाइन निर्माण का मामला
--साल 2013 में कोबरा इंस्टालेशिया कंपनी को सौंपा गया था जिम्मा
--पांच साल बाद भी शुरू नहीं हो सका है निर्माण कार्य
अमर उजाला ब्यूरो
देेहरादून।
पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (पिटकुल) की ओर से साल 2013 में श्रीनगर से लेकर काशीपुर तक हाईटेंशन पावरग्रिड लाइन बिछाने का काम बजट जारी होने के बावजूद नहीं शुरू होने के मामले की जांच में अब लीपापोती की तैयारी है। सूत्रों की मानें तो जांच टीम में शामिल कई अधिकारी लापरवाह अफसरों व कर्मचारियों को बचाने की कोशिश में लगे हैं। इसके चलते 31 मई तक दी जाने वाली जांच रिपोर्ट आज तक सौंप नहीं गई है।
बता दें, श्रीनगर स्थित 400 केवी के पावर हाउस से लेकर काशीपुर पावर हाउस तक पावर ग्रिड लाइन बिछाने का काम करना था। लाइन बिछाने का काम कोबरा इंस्टालेशिया कंपनी को सौंपा गया, लेकिन साल 2013 में कंपनी को ठेका दिए जाने के बावजूद इस परियोजना पर आजतक कुछ भी काम नहीं हो सका है। परियोजना के लिए 530 करोड़ का बजट भी जारी हो चुका है। इसके बावजूद पिटकुल के आला अफसरों ने पांच साल तक न तो नया टेंडर जारी किया और न ही निर्माण कार्यों की कोई सुध ली।
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इस मामले में प्रबंध निदेशक कैप्टन आलोक शेखर तिवारी के निर्देश पर प्रकरण की जांच की जा रही है। निदेशक वित्त अमिताभ मोइत्रा, निदेशक परिचालन संजय मित्तल की अगुवाई में गठित छह सदस्यीय जांच कमेटी प्रकरण की जांच कर रही है। सचिव ऊर्जा ने पिछले दिनों बोर्ड बैठक के दौरान 31 मई तक जांच पूरी करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद जांच रिपोर्ट अभीतक सौंपी नहीं गई है। सूत्राें का कहना है कि प्रकरण की निष्पक्षता से जांच की गई तो पिटकुल के कई अफसरों की नौकरी खतरे में पड़ सकती है। यही कारण है कि जांच टीम में शामिल कुछ अफसर दोषी अफसरों व कर्मचारियों को बचाने की फिराक में हैं और जानबूझ कर देरी की जा रही है। दूसरी ओर पिटकुल प्रबंध निदेशक कैप्टन आलोक शेखर तिवारी का कहना है कि प्रकरण की निष्पक्षता से जांच कराई जाएगी और जो भी अधिकारी, कर्मचारी दोषी पाए जाएंगे उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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