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रेशम किसानों की फसलों का होगा बीमा : उनियाल
Updated Tue, 27 Feb 2018 02:04 AM IST
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ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
किसान भवन में केंद्रीय रेशम बोर्ड की ओर से आयोजित रेशम कृषि मेले का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि कृषि मंत्री सुबोध उनियाल ने कौकून का न्यूनतम समर्थन मूल्य तीन सौ रुपये घोषित करने और किसानों की फसलों को बीमा योजना से जोड़ने का एलान किया।
कृषि मंत्री ने कहा कि प्रदेश में रेशम की फ सल का उत्पादन 35 मीट्रिक टन तक बढ़ाना है। वर्तमान में प्रदेश में रेशम कीट की केवल दो फसलें ली जा रही है, लेकिन अब तीन फसलें ली जा सके इसके लिए वैज्ञानिकों की सहायता ली जा रही है। इस पर शोध किया जा रहा है कि प्रदेश की जलवायु के अनुकूल यहां तीन फसलें ली जा सकती है या नहीं। कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता प्रदेश में हो रहे पलायन को कम करना है। आज एक हजार से अधिक गांव खंडहर में तब्दील हो चुके हैं। केंद्रीय रेशम बोर्ड के चेयरमैन केएम हनुमन्थरायप्पा ने कहा कि देश में रेशम की खपत पूरी नहीं हो पा रही है। जिसके चलते हमें दूसरे देशों से चीन, जापान और कोरिया से रेशम आयात करना पड़ रहा है। देश में केवल कर्नाटक ही ऐसा राज्य है जो रेशम की 13 फसलें लेता है। उन्होंने केंद्रीय रेशम बोर्ड की योजनाओं की जानकारी दी। रेशम विभाग के निदेशक एके यादव ने कहा कि राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत नानकमत्ता में सौ किसानों के लिए प्रोजेक्ट को मंजूरी मिली है। इसके तहत वृक्षारोपण, भवन, प्रशिक्षण, उपकरण क्रय आदि कार्य किए जाएंगे। कार्यक्रम में निदेशक एमके घोष, डा.पंकज तिवारी, दिनेश चंद्र जोशी आदि मौजूद रहे। संचालन विपिन बिहारी ने किया।
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किसान भवन में केंद्रीय रेशम बोर्ड की ओर से आयोजित रेशम कृषि मेले का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि कृषि मंत्री सुबोध उनियाल ने कौकून का न्यूनतम समर्थन मूल्य तीन सौ रुपये घोषित करने और किसानों की फसलों को बीमा योजना से जोड़ने का एलान किया।
कृषि मंत्री ने कहा कि प्रदेश में रेशम की फ सल का उत्पादन 35 मीट्रिक टन तक बढ़ाना है। वर्तमान में प्रदेश में रेशम कीट की केवल दो फसलें ली जा रही है, लेकिन अब तीन फसलें ली जा सके इसके लिए वैज्ञानिकों की सहायता ली जा रही है। इस पर शोध किया जा रहा है कि प्रदेश की जलवायु के अनुकूल यहां तीन फसलें ली जा सकती है या नहीं। कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता प्रदेश में हो रहे पलायन को कम करना है। आज एक हजार से अधिक गांव खंडहर में तब्दील हो चुके हैं। केंद्रीय रेशम बोर्ड के चेयरमैन केएम हनुमन्थरायप्पा ने कहा कि देश में रेशम की खपत पूरी नहीं हो पा रही है। जिसके चलते हमें दूसरे देशों से चीन, जापान और कोरिया से रेशम आयात करना पड़ रहा है। देश में केवल कर्नाटक ही ऐसा राज्य है जो रेशम की 13 फसलें लेता है। उन्होंने केंद्रीय रेशम बोर्ड की योजनाओं की जानकारी दी। रेशम विभाग के निदेशक एके यादव ने कहा कि राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत नानकमत्ता में सौ किसानों के लिए प्रोजेक्ट को मंजूरी मिली है। इसके तहत वृक्षारोपण, भवन, प्रशिक्षण, उपकरण क्रय आदि कार्य किए जाएंगे। कार्यक्रम में निदेशक एमके घोष, डा.पंकज तिवारी, दिनेश चंद्र जोशी आदि मौजूद रहे। संचालन विपिन बिहारी ने किया।
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