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राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर में तेल का खेल
Updated Wed, 17 Oct 2018 10:16 PM IST
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श्रीनगर। राजकीय मेडिकल कॉलेज में जमकर तेल का खेल हुआ है। कॉलेज से संबद्ध बेस टीचिंग अस्पताल की एंबुलेंसों में करीब 300 किलोमीटर (देहरादून आना-जाना) के सफर के लिए लगभग हर दिन 60 रुपये का डीजल भरवाया गया है। अब जनवरी 2017 से इन्हीं एंबुलेंसों में इतनी ही दूरी के लिए मात्र 38 से 40 लीटर डीजल से काम चल रहा है। इससे जाहिर होता है कि तेल के नाम पर आठ वर्षों में लाखों का गोलमाल हुआ है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि हर साल ऑडिट होने के बावजूद ऑडिट टीम भी इतनी सामान्य सी गड़बड़ी नहीं पकड़ पाई।
राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर मेें एंबुलेंस प्रकरण लंबे समय से विवादों में रहा है। हर साल पेट्रोल पंपों से लाखों रुपये का डीजल खरीदा जाता रहा है। वास्तविकता जानने के लिए श्रीनगर निवासी एक व्यक्ति ने सूचना का अधिकार का प्रयोग कर एंबुलेंसों में भराए जाने वाले डीजल और रेफर किए जाने वाले मरीजों की जानकारी मांगी। आरटीआई में चौंकाने वाले तथ्यों का खुलासा हुआ है। अस्पताल की दो एंबुलेंस में वर्ष 2009 से 2016 तक एक दिन छोड़कर 58 से 60 लीटर डीजल भरवाया गया है, लेकिन अचानक जनवरी 2017 से इन्हीं एंबुलेसों में 38 से 40 लीटर डीजल भरवाया जाने लगा। यानी हर चक्कर में लगभग 20 लीटर की गड़बड़ी की गई।
सामाजिक कार्यकर्ता डा. नवीन प्रकाश नौटियाल का कहना है कि अकसर जरूरतमंदों को एंबुलेंस नहीं मिल पाती है। अकसर एंबुलेंस खराब रहने या ड्राइवर न होने का बहाना किया जाता है। ऐसे में एंबुलेंसों में इतनी मात्रा में डीजल भरवाया जाना संदेह पैदा करता है।
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यूजर चार्जेज के लिए जाते हैं 1650 रुपये
श्रीनगर। बेस अस्पताल से देहरादून के लिए एंबुलेंस बुक कराने पर मरीज को यूजर चार्जेज के रूप में 1650 रुपये जमा कराने होते हैं, जबकि एंबुलेंस में लगभग 3000 रुपये का तेल भरवाया जाता रहा है। कभी भी किसी अधिकारी ने यह सवाल नहीं किया कि इतना घाटा क्यों वहन किया जा रहा है।
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कोट----------
-मैंने जिम्मेदारी संभालने के बाद एंबुलेंसों का माइलेज तकनीशियों से चेक कराया था। इसके बाद माइलेज के हिसाब से तेल की मात्रा नियत कर दी गई थी। वर्ष 2017 से पहले क्या हुआ, इसके बारे में मैं कुछ नहीं बता सकता।
-विवेक स्वरुप, वित्त नियंत्रक, राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर
राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर मेें एंबुलेंस प्रकरण लंबे समय से विवादों में रहा है। हर साल पेट्रोल पंपों से लाखों रुपये का डीजल खरीदा जाता रहा है। वास्तविकता जानने के लिए श्रीनगर निवासी एक व्यक्ति ने सूचना का अधिकार का प्रयोग कर एंबुलेंसों में भराए जाने वाले डीजल और रेफर किए जाने वाले मरीजों की जानकारी मांगी। आरटीआई में चौंकाने वाले तथ्यों का खुलासा हुआ है। अस्पताल की दो एंबुलेंस में वर्ष 2009 से 2016 तक एक दिन छोड़कर 58 से 60 लीटर डीजल भरवाया गया है, लेकिन अचानक जनवरी 2017 से इन्हीं एंबुलेसों में 38 से 40 लीटर डीजल भरवाया जाने लगा। यानी हर चक्कर में लगभग 20 लीटर की गड़बड़ी की गई।
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सामाजिक कार्यकर्ता डा. नवीन प्रकाश नौटियाल का कहना है कि अकसर जरूरतमंदों को एंबुलेंस नहीं मिल पाती है। अकसर एंबुलेंस खराब रहने या ड्राइवर न होने का बहाना किया जाता है। ऐसे में एंबुलेंसों में इतनी मात्रा में डीजल भरवाया जाना संदेह पैदा करता है।
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यूजर चार्जेज के लिए जाते हैं 1650 रुपये
श्रीनगर। बेस अस्पताल से देहरादून के लिए एंबुलेंस बुक कराने पर मरीज को यूजर चार्जेज के रूप में 1650 रुपये जमा कराने होते हैं, जबकि एंबुलेंस में लगभग 3000 रुपये का तेल भरवाया जाता रहा है। कभी भी किसी अधिकारी ने यह सवाल नहीं किया कि इतना घाटा क्यों वहन किया जा रहा है।
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-मैंने जिम्मेदारी संभालने के बाद एंबुलेंसों का माइलेज तकनीशियों से चेक कराया था। इसके बाद माइलेज के हिसाब से तेल की मात्रा नियत कर दी गई थी। वर्ष 2017 से पहले क्या हुआ, इसके बारे में मैं कुछ नहीं बता सकता।
-विवेक स्वरुप, वित्त नियंत्रक, राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर