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पीजी ऑटोनोमस कॉलेज में सेमिनार का आयोजन
Updated Thu, 04 Oct 2018 01:01 AM IST
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फूलों की घाटी में शोध की अपार संभावनाएं : डॉ. जाखी
ब्यूरो/अमर उजाला/ऋषिकेश।
ऋषिकेश। पीजी ऑटोनोमस कॉलेज में कास प्लैट्यू फ्लोरल बास्केट ऑफ महाराष्ट्र (फूलों का कटोरा) विषय पर सेमिनार का आयोजन किया गया। बुधवार को महाविद्यालय में आयोजित सेमिनार में महाराष्ट्र नागपुर के इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस के वनस्पति विज्ञान के प्रोफेसर डॉ. प्रशांत एस जाखी ने कहा कि उत्तराखंड के चमोली जिले में फूलों की घाटी की तरह ही महाराष्ट्र में फूलों का वृहद पठार है। जिसे धरती का स्वर्ग भी बोला जाता है। उन्होंने पठार की भौगौलिक स्थिति और औषधीय पौधों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि फूलों के पठार के ईको सिस्टम को बचाने के लिए पर्यटन के रूप में तीन हजार पर्यटक ही सालभर में पठार में जा सकते हैं। इसके लिए ऑनलाइन बुकिंग होती है। यूनेस्को ने इसे नेशनल हेरिटेज घोषित किया है। यहां 15 दिनों के अंतराल में फूलों के रंगों में बदलाव आता रहता है। फूलों की घाटी में शोध कार्य के लिए अपार संभावनाएं मौजूद हैं। इस दौरान प्राचार्य डॉ. एनपी माहेश्वरी, डॉ. आरके उभान, डॉ. प्रशांत एस जाखी, डॉ. केएस जनबंधु, डॉ. जीके ढींगरा, वनस्पति विज्ञान के डॉ. अनिल कुमार, रश्मि काला, डॉ. पंकज कुमार, देवेंद्र भट्ट, शालिनी कोटियाल, साफिया हसन, अर्जुन, नवीन आदि मौजूद रहे।
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ब्यूरो/अमर उजाला/ऋषिकेश।
ऋषिकेश। पीजी ऑटोनोमस कॉलेज में कास प्लैट्यू फ्लोरल बास्केट ऑफ महाराष्ट्र (फूलों का कटोरा) विषय पर सेमिनार का आयोजन किया गया। बुधवार को महाविद्यालय में आयोजित सेमिनार में महाराष्ट्र नागपुर के इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस के वनस्पति विज्ञान के प्रोफेसर डॉ. प्रशांत एस जाखी ने कहा कि उत्तराखंड के चमोली जिले में फूलों की घाटी की तरह ही महाराष्ट्र में फूलों का वृहद पठार है। जिसे धरती का स्वर्ग भी बोला जाता है। उन्होंने पठार की भौगौलिक स्थिति और औषधीय पौधों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि फूलों के पठार के ईको सिस्टम को बचाने के लिए पर्यटन के रूप में तीन हजार पर्यटक ही सालभर में पठार में जा सकते हैं। इसके लिए ऑनलाइन बुकिंग होती है। यूनेस्को ने इसे नेशनल हेरिटेज घोषित किया है। यहां 15 दिनों के अंतराल में फूलों के रंगों में बदलाव आता रहता है। फूलों की घाटी में शोध कार्य के लिए अपार संभावनाएं मौजूद हैं। इस दौरान प्राचार्य डॉ. एनपी माहेश्वरी, डॉ. आरके उभान, डॉ. प्रशांत एस जाखी, डॉ. केएस जनबंधु, डॉ. जीके ढींगरा, वनस्पति विज्ञान के डॉ. अनिल कुमार, रश्मि काला, डॉ. पंकज कुमार, देवेंद्र भट्ट, शालिनी कोटियाल, साफिया हसन, अर्जुन, नवीन आदि मौजूद रहे।