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नीती-माणा घाटियों से शुरू हो कैलाश मानसरोवर यात्रा
Updated Wed, 04 Jul 2018 10:44 PM IST
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जोशीमठ। चमोली जिले के सीमांत क्षेत्र जोशीमठ के जनप्रतिनिधियों ने कैलाश मानसरोवर यात्रा जिले की नीती-माणा घाटी से शुरू करने की मांग उठाई है। जनप्रतिनिधियों ने इस संबंध में उपजिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ज्ञापन भेजा है। कहा गया कि विगत वर्ष 2017 में चीन के साथ भारत की व्यापारिक स्तर पर हुई सफल वार्ता से नीती-माणा घाटियों से कैलाश मानसरोवर यात्रा शुरू किए जाने की उम्मीद जगी थी, लेकिन इस संबंध में कोई सकारात्मक पहल न होने से सीमावर्ती गांवों के ग्रामीणों में मायूसी है।
पैनखंडा संघर्ष समिति के अध्यक्ष रमेश सती, पुष्कर भुजवाण, मनमोहन सिंह, प्रकाश रावत, बलवीर रावत, कुशाल कम्दी, रघुवीर सिंह और लक्ष्मण सिंह बुटोला ने कहा कि दिल्ली-ऋषिकेश-मलारी-सुमना तक 561 किमी है, जो यातायात के लिए पूरी तहर से ठीक है। सुमना से बाड़ाहोती होकर तिब्बत (चीन) की सीमा पर तेनजुनला पास तक 22 किमी मोटर मार्ग भी लगभग तैयार हो गया है। वहीं, दिल्ली से नीती तक मोटर मार्ग उपलब्ध है, जिसकी दूरी 558 किमी है। नीती से ग्यालडुंग होते हुए 32 किमी दूरी पर तिब्बत (चीन) सीमा है। कहा गया कि वर्तमान में सीमांत जिले आपदा से त्रस्त हैं। कैलाश मानसरोवर यात्रा शुरू होने से सीमांत गांवों में आबादी बढ़ेगी और तीर्थाटन व पर्यटन की संभावनाएं भी बढे़ंगी।
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पैनखंडा संघर्ष समिति के अध्यक्ष रमेश सती, पुष्कर भुजवाण, मनमोहन सिंह, प्रकाश रावत, बलवीर रावत, कुशाल कम्दी, रघुवीर सिंह और लक्ष्मण सिंह बुटोला ने कहा कि दिल्ली-ऋषिकेश-मलारी-सुमना तक 561 किमी है, जो यातायात के लिए पूरी तहर से ठीक है। सुमना से बाड़ाहोती होकर तिब्बत (चीन) की सीमा पर तेनजुनला पास तक 22 किमी मोटर मार्ग भी लगभग तैयार हो गया है। वहीं, दिल्ली से नीती तक मोटर मार्ग उपलब्ध है, जिसकी दूरी 558 किमी है। नीती से ग्यालडुंग होते हुए 32 किमी दूरी पर तिब्बत (चीन) सीमा है। कहा गया कि वर्तमान में सीमांत जिले आपदा से त्रस्त हैं। कैलाश मानसरोवर यात्रा शुरू होने से सीमांत गांवों में आबादी बढ़ेगी और तीर्थाटन व पर्यटन की संभावनाएं भी बढे़ंगी।
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