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132 पैक्स में सहकारी विभाग के प्रशासक नियुक्त
Updated Fri, 04 May 2018 10:32 PM IST
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पौड़ी। जिले की 132 पैक्स (प्राथमिक कृषि ऋण सहकारी समिति) का कार्यकाल खत्म होने पर प्रशासक नियुक्त कर दिए गए हैं। सहकारी विभाग के सहायक विकास अधिकारी (सहकारिता) और राजकीय पर्यवेक्षक को विधिवत कमेटी गठित होने तक प्रशासकों की जिम्मेदारी दे दी गई है। इसके अलावा जिला सहायक निबंधक सहकारी समितियां ने 189 निष्क्रिय समितियों को रद्द करने की संस्तुति दी है।
जिले के सहकारिता विभाग में लगभग 372 विभिन्न सहकारी समितियां रजिस्ट्रर्ड हैं। इनमें से 183 समितियां ही सक्रिय हैं, जबकि 189 समितियां निष्क्रिय चल रही हैं। इनमें सर्वाधिक संख्या उत्तराखंड बनने के बाद (वर्ष 2002) उद्योग विभाग से सहकारिता विभाग को हैंडओवर समितियां हैं। ऐसी औद्योगिक सहकारी समितियां 103 हैं। सहकारिता विभाग ने जब इनकी खोज की तो बताए हुए पते पर समितियों के दफ्तर नहीं मिले। इसके अलावा कई समितियों ने अपनी ऑडिट रिपोर्ट भी नहीं दी। इसके चलते ऐसी समितियों को रद्द करने का निर्णय लिया गया।
इधर, 132 पैक्स का कार्यकाल 23 मार्च 2018 को खत्म हो गया था, लेकिन निष्क्रिय पड़ी समितियों पर कोई फैसला न होने पर चुनाव आगे खिसक गए। इस वजह से यहां अब विभागीय अधिकारियों को प्रशासक नियुक्त कर दिया गया है।
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समितियों को प्रत्येक साल 31 मार्च तक ऑडिट के बाद बैलेंस शीट जमा करनी होती है, लेकिन कई समितियों ने ऐसा नहीं किया। पत्र व्यवहार किया गया, तो पते पर कोई नहीं मिला। इसके चलते समितियों को रद्द करने का निर्णय लिया गया। वहीं वार्डों के परिसीमन और आरक्षण का निर्धारण किया जा रहा है। 15 मई तक यह काम भी निपट जाएगा। -सुमन कुमार, सहायक निबंधक, सहकारी समितियां पौड़ी
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जिले के सहकारिता विभाग में लगभग 372 विभिन्न सहकारी समितियां रजिस्ट्रर्ड हैं। इनमें से 183 समितियां ही सक्रिय हैं, जबकि 189 समितियां निष्क्रिय चल रही हैं। इनमें सर्वाधिक संख्या उत्तराखंड बनने के बाद (वर्ष 2002) उद्योग विभाग से सहकारिता विभाग को हैंडओवर समितियां हैं। ऐसी औद्योगिक सहकारी समितियां 103 हैं। सहकारिता विभाग ने जब इनकी खोज की तो बताए हुए पते पर समितियों के दफ्तर नहीं मिले। इसके अलावा कई समितियों ने अपनी ऑडिट रिपोर्ट भी नहीं दी। इसके चलते ऐसी समितियों को रद्द करने का निर्णय लिया गया।
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इधर, 132 पैक्स का कार्यकाल 23 मार्च 2018 को खत्म हो गया था, लेकिन निष्क्रिय पड़ी समितियों पर कोई फैसला न होने पर चुनाव आगे खिसक गए। इस वजह से यहां अब विभागीय अधिकारियों को प्रशासक नियुक्त कर दिया गया है।
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समितियों को प्रत्येक साल 31 मार्च तक ऑडिट के बाद बैलेंस शीट जमा करनी होती है, लेकिन कई समितियों ने ऐसा नहीं किया। पत्र व्यवहार किया गया, तो पते पर कोई नहीं मिला। इसके चलते समितियों को रद्द करने का निर्णय लिया गया। वहीं वार्डों के परिसीमन और आरक्षण का निर्धारण किया जा रहा है। 15 मई तक यह काम भी निपट जाएगा। -सुमन कुमार, सहायक निबंधक, सहकारी समितियां पौड़ी