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नैतिकता में गिरावट की समस्या से जूझ रहा पूरा विश्व
Updated Fri, 06 Apr 2018 10:36 PM IST
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श्रीनगर। गढ़वाल विवि के फैकल्टी डेवलपमेंट सेंटर की ओर से उच्च शिक्षा में व्यावसायिक नैतिकता विषय पर तीन दिवसीय संगोष्ठी का शुभारंभ किया गया। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि नैतिकता में गिरावट भारत की ही नहीं बल्कि पूरे विश्व की समस्या है। कहा कि उच्च शिक्षा में निरंतर हो रहे नैतिक अवनयन को रोकने, नैतिक मूल्यों के संवर्धन तथा प्रसारण के लिए यह गोष्ठी महत्वपूर्ण साबित होगी।
शुक्रवार को चौरास परिसर स्थित एकेडमिक एक्टिविटी सेंटर में गोष्ठी के शुभारंभ अवसर पर मुख्य अतिथि सीएसआईआर व निसकेयर के निदेशक डा. मनोज कुमार पटोरिया ने कहा कि शोध के विविध चरणों में नवीनता और प्रायोगिकता होनी जरूरी है। प्लेजरिज्म से बचने के लिए शिक्षकों में नैतिकता का होना आवश्यक है। गढ़वाल विवि की कुलपति प्रो. अन्नपूर्णा नौटियाल ने कहा कि शिक्षकों को एक आदर्श के रूप में देखा जाता है, इसलिए उनको नीतिगत अवधारणाओं का पालन करना चाहिए। प्रो. नौटियाल ने शिक्षा में गुणवत्ता के सुधार और आदर्श शोध के लिए शिक्षकों एवं विद्यार्थियों से कठोर परिश्रम करने की बात कही। 6 से 8 अप्रैल तक आयोजित होने वाली इस गोष्ठी में देश भर के विशेषज्ञ प्रतिभाग कर रहे हैं। संयोजक प्रो. इूंद पांडे खंडूड़ी ने बताया कि संगोष्ठी में छह राज्यों हरियाणा, राजस्थान, छत्तीसगढ़, पश्चिमी बंगाल, उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड के विशेषज्ञ शामिल हो रहे हैं। कार्यक्रम का संचालन डा. विजय कुमार ने किया। पर्यावरण विज्ञान के प्रो. आरसी शर्मा व प्रो. एससी सूद ने नैतिकता की अवधारणा स्पष्ट की। गोष्ठी में प्रो. सुरेखा डंगवाल, प्रो. विनोद नौटियाल, प्रो. पीके जोशी, प्रो. एससी बागड़ी आदि ने भी विचार व्यक्त किए।
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शुक्रवार को चौरास परिसर स्थित एकेडमिक एक्टिविटी सेंटर में गोष्ठी के शुभारंभ अवसर पर मुख्य अतिथि सीएसआईआर व निसकेयर के निदेशक डा. मनोज कुमार पटोरिया ने कहा कि शोध के विविध चरणों में नवीनता और प्रायोगिकता होनी जरूरी है। प्लेजरिज्म से बचने के लिए शिक्षकों में नैतिकता का होना आवश्यक है। गढ़वाल विवि की कुलपति प्रो. अन्नपूर्णा नौटियाल ने कहा कि शिक्षकों को एक आदर्श के रूप में देखा जाता है, इसलिए उनको नीतिगत अवधारणाओं का पालन करना चाहिए। प्रो. नौटियाल ने शिक्षा में गुणवत्ता के सुधार और आदर्श शोध के लिए शिक्षकों एवं विद्यार्थियों से कठोर परिश्रम करने की बात कही। 6 से 8 अप्रैल तक आयोजित होने वाली इस गोष्ठी में देश भर के विशेषज्ञ प्रतिभाग कर रहे हैं। संयोजक प्रो. इूंद पांडे खंडूड़ी ने बताया कि संगोष्ठी में छह राज्यों हरियाणा, राजस्थान, छत्तीसगढ़, पश्चिमी बंगाल, उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड के विशेषज्ञ शामिल हो रहे हैं। कार्यक्रम का संचालन डा. विजय कुमार ने किया। पर्यावरण विज्ञान के प्रो. आरसी शर्मा व प्रो. एससी सूद ने नैतिकता की अवधारणा स्पष्ट की। गोष्ठी में प्रो. सुरेखा डंगवाल, प्रो. विनोद नौटियाल, प्रो. पीके जोशी, प्रो. एससी बागड़ी आदि ने भी विचार व्यक्त किए।
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