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रामदेव को किसानों और किसानों को बाबा की जरूरत
Updated Mon, 14 Aug 2017 12:36 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार। योग गुरु बाबा रामदेव अब देश में कृषि क्रांति के लिए उतर गए हैं। जैविक खाद के बल पर पूरे देश में कृषि क्रांति लाने के लिए न केवल उद्योग खड़े किए गए हैं, बल्कि किसानों की कार्यशालाएं भी बड़े पैमाने पर शुरू हो गई हैं। कृषि अनुसंधान के विश्वस्तरीय अनुसंधान के क्षेत्र में करीब 150 वैज्ञानिक जुटे हैं। बाबा रामदेव का मानना है कि जिस दिन रसायनों को हटाकर वास्तविक जैविक क्रांति हो गई, उस दिन भारत की तस्वीर बदल जाएगी।
बाबा रामदेव को इन दिनों किसानों और किसानों को बाबा रामदेव की खास जरूरत है। बाबा ने करीब छह वर्ष पूर्व ही करीब 12 राज्यों में किसानों की भूमि अग्रिम धन देकर लेना शुरू कर दिया था। जमीन किसानों की है, लेकिन खेती पतंजलि के लिए हो रही है। ऐसी हजारों एकड़ जमीन दर्जनभर राज्यों में ली जा चुकी है। इस जमीन पर बाबा जड़ी बूटियों के साथ-साथ अपने 35 हर्बल उद्योगों और फूड पार्क के लिए विश्वस्तरीय सब्जी और फल तैयार करा रहे हैं। किसानों को उनकी पूर्व फसल से अधिक मूल्य दिया जा रहा है। यही नहीं खेती के इस कार्य में पतंजलि और कुछ सरकारी प्रतिष्ठानों द्वारा तैयार की गई जैविक खाद डलवाई जा रही है। मिलने वाली फसल न केवल सभी प्रकार के कीटनाशकों से मुक्त है, बल्कि कोई भी रसायनिक तत्व इन फसलों में नहीं। किसानों के माध्यम से गोमूत्र भी प्राप्त किया जा रहा है। साथ ही हरी पत्तियों और गोबर से अलग से खाद तैयार कराई जा रही है। बाबा जैविक कचरे का उपयोग करने के लिए प्लांट भी लगा रहे हैं।
बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण ने एक ऐसी योजना तैयार की है, जो देश की आधी आबादी किसानों को सीधे जैविक खाद से जोड़ दे। इसके लिए उन किसानों को भी बड़े पैमाने पर जैविक खाद दी जाएगी, जो अपनी अलग खेती करेंगे। यह उत्पादन किसान सीधे अपने बाजार में बेच देंगे। बाबा की मुहिम का यह लाभ दिखाई दिया है कि बाजार में किसानों को जैविक उत्पादों की कीमत रसायनिक खाद उत्पादनों से कहीं बढक़र मिल रही है। देशवासी भी आम दुकानों से जैविक खादों से खाद्य पदार्थ और जूस मांग रहे हैं। बाबा के अपने स्टोर्स पर जैविक सामग्री लगभग प्रत्यके शहर में उपलब्ध है। विदेशों से भी जैविक माल की भारी मांग आई है। बाबा का मानना है कि जिस दिन युवाओं और किसानों के माध्यम से वास्तविक जैविक क्रांति हो गई उस दिन योग और आयुर्वेद जैसा ही प्रभाव पूरे विश्व पर पड़ेगा। इसके लिए वे देश के सभी राज्यों में युवाओं और किसानों की लगातार कार्यशालाएं कर रहे हैं। पतंजलि योगपीठ में तो यह कार्यशालाएं वर्षभर चलती हैं।
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हरिद्वार। योग गुरु बाबा रामदेव अब देश में कृषि क्रांति के लिए उतर गए हैं। जैविक खाद के बल पर पूरे देश में कृषि क्रांति लाने के लिए न केवल उद्योग खड़े किए गए हैं, बल्कि किसानों की कार्यशालाएं भी बड़े पैमाने पर शुरू हो गई हैं। कृषि अनुसंधान के विश्वस्तरीय अनुसंधान के क्षेत्र में करीब 150 वैज्ञानिक जुटे हैं। बाबा रामदेव का मानना है कि जिस दिन रसायनों को हटाकर वास्तविक जैविक क्रांति हो गई, उस दिन भारत की तस्वीर बदल जाएगी।
बाबा रामदेव को इन दिनों किसानों और किसानों को बाबा रामदेव की खास जरूरत है। बाबा ने करीब छह वर्ष पूर्व ही करीब 12 राज्यों में किसानों की भूमि अग्रिम धन देकर लेना शुरू कर दिया था। जमीन किसानों की है, लेकिन खेती पतंजलि के लिए हो रही है। ऐसी हजारों एकड़ जमीन दर्जनभर राज्यों में ली जा चुकी है। इस जमीन पर बाबा जड़ी बूटियों के साथ-साथ अपने 35 हर्बल उद्योगों और फूड पार्क के लिए विश्वस्तरीय सब्जी और फल तैयार करा रहे हैं। किसानों को उनकी पूर्व फसल से अधिक मूल्य दिया जा रहा है। यही नहीं खेती के इस कार्य में पतंजलि और कुछ सरकारी प्रतिष्ठानों द्वारा तैयार की गई जैविक खाद डलवाई जा रही है। मिलने वाली फसल न केवल सभी प्रकार के कीटनाशकों से मुक्त है, बल्कि कोई भी रसायनिक तत्व इन फसलों में नहीं। किसानों के माध्यम से गोमूत्र भी प्राप्त किया जा रहा है। साथ ही हरी पत्तियों और गोबर से अलग से खाद तैयार कराई जा रही है। बाबा जैविक कचरे का उपयोग करने के लिए प्लांट भी लगा रहे हैं।
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बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण ने एक ऐसी योजना तैयार की है, जो देश की आधी आबादी किसानों को सीधे जैविक खाद से जोड़ दे। इसके लिए उन किसानों को भी बड़े पैमाने पर जैविक खाद दी जाएगी, जो अपनी अलग खेती करेंगे। यह उत्पादन किसान सीधे अपने बाजार में बेच देंगे। बाबा की मुहिम का यह लाभ दिखाई दिया है कि बाजार में किसानों को जैविक उत्पादों की कीमत रसायनिक खाद उत्पादनों से कहीं बढक़र मिल रही है। देशवासी भी आम दुकानों से जैविक खादों से खाद्य पदार्थ और जूस मांग रहे हैं। बाबा के अपने स्टोर्स पर जैविक सामग्री लगभग प्रत्यके शहर में उपलब्ध है। विदेशों से भी जैविक माल की भारी मांग आई है। बाबा का मानना है कि जिस दिन युवाओं और किसानों के माध्यम से वास्तविक जैविक क्रांति हो गई उस दिन योग और आयुर्वेद जैसा ही प्रभाव पूरे विश्व पर पड़ेगा। इसके लिए वे देश के सभी राज्यों में युवाओं और किसानों की लगातार कार्यशालाएं कर रहे हैं। पतंजलि योगपीठ में तो यह कार्यशालाएं वर्षभर चलती हैं।
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