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झाझरा ट्रांसफार्मर प्रकरण की नए सिरे से होगी जांच, ऊजा्र सचिव ने जांच रिपोर्ट लौटायी
Updated Sun, 05 Aug 2018 02:28 AM IST
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झाझरा ट्रांसफार्मर प्रकरण की नए सिरे से होगी जांच
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (पिटकुल) के झाझरा स्थित पावर सब स्टेशन में पिछले साल ऊर्जीकृत करते समय करोड़ों की कीमत के 80 एमवीए क्षमता के ट्रांसफार्मर फुंकने की जांच नए सिरे से कराई जाएगी। इस संबंध मेें पिटकुल प्रबंधन की ओर से शासन को भेजी गई जांच रिपोर्ट ऊर्जा सचिव ने लौटा दी है। ऊर्जा सचिव ने जांच में तमाम खामियां गिनाने के साथ ही उन बिंदुओं पर नए सिरे से जांच करने की बात कही है। ऊर्जा सचिव की इस कार्रवाई से पिटकुल के अभियंताओं व अफसरों मेें हड़कंप की स्थिति है।
उल्लेखनीय है कि पिटकुल के झाझरा स्थित पावर सब स्टेशन में निजी कंपनी आईएमपी की मदद से 80 एमवीए का करोड़ों रुपये कीमत का भारी भरकम ट्रांसफार्मर लगाया गया था। 15 मार्च 2017 को जैसे ही ट्रांसफार्मर में पावर दी गई तो वह तेज धमाके साथ जल गया। पिटकुल सूत्रों के मुताबिक घटिया क्वालिटी होने की वजह से निगम को भारी नुकसान हो गया। आखिरकार करोड़ों रुपये कीमत के ट्रांसफार्मर फुंकने की घटना के बाद इसकी जांच शुरू हुई। आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञों के साथ ही सीपीआरआई के विशेषज्ञों की मदद से जले ट्रांसफार्मर की जांच कराई गई।
आईआईटी के विशेषज्ञों ने अपनी रिपोर्ट में ट्रांसफार्मर की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए बंगलूरू स्थित सेंट्रल पावर रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीपीआरआई) के तकनीकी विशेषज्ञों से इसकी जांच कराने की बात कही। सीपीआरआई के विशेषज्ञों ने भी इसकी जांच की। जिसकी रिपोर्ट आना बाकी है।
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उधर पिटकुल के स्तर पर इस प्रकरण में छह सदस्यीय समिति गठित कर जांच करायी गई। जांच समिति ने मुख्य अभियंता समेत 12 अभियंताओं को आरोप पत्र भी जारी कर दिया। बाद में दो सदस्यीय समिति गठित अभियंताओं के बयानों का सत्यापन कराया गया। तमाम पहलुओं की जांच करने के बाद रिपोर्ट शासन को भेजी गई। इसके बाद ऊर्जा सचिव ने रिपोर्ट को लौटाते हुए कई अन्य बिंदुओं पर जांच के आदेश दिए हैं। इससे अभियंताओं को डर है कि कहीं प्रकरण की गंभीरता से जांच हुई तो उनकी नौकरी खतरे में पड़ सकती है।
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (पिटकुल) के झाझरा स्थित पावर सब स्टेशन में पिछले साल ऊर्जीकृत करते समय करोड़ों की कीमत के 80 एमवीए क्षमता के ट्रांसफार्मर फुंकने की जांच नए सिरे से कराई जाएगी। इस संबंध मेें पिटकुल प्रबंधन की ओर से शासन को भेजी गई जांच रिपोर्ट ऊर्जा सचिव ने लौटा दी है। ऊर्जा सचिव ने जांच में तमाम खामियां गिनाने के साथ ही उन बिंदुओं पर नए सिरे से जांच करने की बात कही है। ऊर्जा सचिव की इस कार्रवाई से पिटकुल के अभियंताओं व अफसरों मेें हड़कंप की स्थिति है।
उल्लेखनीय है कि पिटकुल के झाझरा स्थित पावर सब स्टेशन में निजी कंपनी आईएमपी की मदद से 80 एमवीए का करोड़ों रुपये कीमत का भारी भरकम ट्रांसफार्मर लगाया गया था। 15 मार्च 2017 को जैसे ही ट्रांसफार्मर में पावर दी गई तो वह तेज धमाके साथ जल गया। पिटकुल सूत्रों के मुताबिक घटिया क्वालिटी होने की वजह से निगम को भारी नुकसान हो गया। आखिरकार करोड़ों रुपये कीमत के ट्रांसफार्मर फुंकने की घटना के बाद इसकी जांच शुरू हुई। आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञों के साथ ही सीपीआरआई के विशेषज्ञों की मदद से जले ट्रांसफार्मर की जांच कराई गई।
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आईआईटी के विशेषज्ञों ने अपनी रिपोर्ट में ट्रांसफार्मर की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए बंगलूरू स्थित सेंट्रल पावर रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीपीआरआई) के तकनीकी विशेषज्ञों से इसकी जांच कराने की बात कही। सीपीआरआई के विशेषज्ञों ने भी इसकी जांच की। जिसकी रिपोर्ट आना बाकी है।
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उधर पिटकुल के स्तर पर इस प्रकरण में छह सदस्यीय समिति गठित कर जांच करायी गई। जांच समिति ने मुख्य अभियंता समेत 12 अभियंताओं को आरोप पत्र भी जारी कर दिया। बाद में दो सदस्यीय समिति गठित अभियंताओं के बयानों का सत्यापन कराया गया। तमाम पहलुओं की जांच करने के बाद रिपोर्ट शासन को भेजी गई। इसके बाद ऊर्जा सचिव ने रिपोर्ट को लौटाते हुए कई अन्य बिंदुओं पर जांच के आदेश दिए हैं। इससे अभियंताओं को डर है कि कहीं प्रकरण की गंभीरता से जांच हुई तो उनकी नौकरी खतरे में पड़ सकती है।