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मतदानकर्मी की मौत से बेखबर जिले के अधिकारी

Wed, 17 Apr 2019 01:59 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Wed, 17 Apr 2019 01:59 AM IST
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मतदानकर्मी की मौत से बेखबर जिले के अधिकारी
मतदानकर्मी की मौत से बेखबर जिले के अधिकारी
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। मतदान के दौरान बूथ पर एक कर्मचारी को ब्रेन हैमरेज हुआ और दो दिन बाद उसकी मौत हो गई। हैरानी की बात ये है कि जिले के आला अधिकारी इससे बेखबर हैं। मृतक की पत्नी का आरोप है कि प्रशासन ने उनके पति के इलाज में लापरवाही बरती और बाद में परिवार की सुध तक नहीं ली। अब जिस अफसर से बात करो तो वह परिवार को बीमा दिलाने की बात कह रहा है।
जानकारी के अनुसार मनीराम अवस्थापना खंड डाकपत्थर में चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी थे। चुनाव में उनकी ड्यूटी रिंग रोड स्थित लाडपुर के ऑकवुड मांटेसरी स्कूल में लगी थी। वहां उद्यान निरीक्षक रघुवीर सिंह कोहली पीठासीन अधिकारी थे। मतदान के दिन 11 अप्रैल को मनीराम ने पोलिंग पार्टी के साथ खाना खाया। इसके तुरंत बाद ही उन्हें चक्कर आने लगे और वे फर्श पर गिर गए। इस स्थिति में घबराए अन्य कार्मिकों ने उन्हें सुरक्षाकर्मियों की मदद से अस्पताल पहुंचाया। वहां से मनीराम के परिजनों को भी सूचना दे दी गई थी। इसके बाद परिजनों ने उन्हें सहारनपुर चौक के पास स्थित प्रेमसुख अस्पताल पहुंचाया। वहां मनीराम दो दिनों तक कोमा में रहे और 13 अप्रैल को दम तोड़ दिया। मनीराम की पत्नी मीना देवी का कहना है कि प्रशासन ने उनके पति के इलाज में लापरवाही बरती है। उन्होंने अधिकारियों पर पति की हालत की सूचना भी देरी से देने का आरोप लगाया है। इस संबंध में जब अधिकारियों से बात की गई तो उन्होंने इस घटना से अनभिज्ञता जताई। मामला जब संज्ञान में लाया गया तो अब नियमानुसार मृतक के परिवार की मदद का आश्वासन दिया है।
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मुझे अभी तक इस बारे में जानकारी नहीं थी। यदि कर्मचारी की तबीयत बूथ पर बिगड़ी और बाद में उनकी मौत हुई, तो घटनाक्रम की जांच की जाएगी। क्या परिस्थिति थी और किस तरह यह घटना हुई इसके बाद ही कुछ कहा जा सकता है। नियमों के अनुसार परिवार की हरसंभव मदद की जाएगी।
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- एसए मुरुगेशन, जिलाधिकारी/जिला निर्वाचन अधिकारी
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20 लाख रुपये के बीमा का है प्रावधान
निर्वाचन ड्यूटी के दौरान मतदानकर्मी की मृत्यु होने पर 20 लाख रुपये का बीमा दिए जाने का प्रावधान है। अपर जिलाधिकारी ने बताया कि इस मामले में जो भी प्रावधान हैं उनके आधार पर मृतक के परिवार की मदद की जाएगी। जहां तक उनकी पत्नी के आरोपों की बात है तो उनकी भी जांच कराई जाएगी।
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एआरओ ने क्यों नहीं दी सूचना?
मनीराम की तबीयत खराब होने पर वहां रिजर्व कर्मचारी को तैनात किया गया। नियमों के अनुसार इसकी जानकारी एआरओ रिजर्व और क्षेत्रीय एआरओ को इसकी जानकारी अवश्य होनी चाहिए। जब पीठासीन अधिकारी ने इन अधिकारियों को जानकारी दी तो उन्होंने आला अधिकारियों को अवगत क्यों नहीं कराया? जानकारों की माने तो इस तरह की लापरवाही पर एआरओ के खिलाफ भी कार्रवाई का प्रावधान है।

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ड्यूटी पर न जाता तो सजा मिलती, मौत हुई तो सुध तक नहीं ली
- पत्नी की ओर से दिया गया था बीमारी का शपथपत्र, नहीं मिली थी राहत
देहरादून। प्रशासन का फंडा भी अजीब है। मनीराम यदि ड्यूटी पर नहीं जाते तो उन्हें शायद निलंबन या बर्खास्तगी की मार तक झेलनी पड़ती। अब जब उनकी ड्यूटी के दौरान मौत हो गई तो प्रशासन ने उनके परिवार की सुध तक नहीं ली। जबकि उनकी पत्नी अपने पति की बीमारी से संबंधित शपथपत्र प्रशासन को दे चुकी थीं। बावजूद इसके उन्हें कोई राहत नहीं दी गई। मीना देवी का कहना है कि यदि उनके शपथपत्र पर गौर कर उन्हें ड्यूटी से राहत दे दी जाती तो शायद उनके पति आज उनके साथ होते।
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