फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   second day of ganga mahotsav, geeta chandran presents bharatanatyam

गंगा महोत्सवः स्वर लहरियों संग बलखाईं गंगा की लहरें, गीता चंद्रन का भरतनाट्यम देख दर्शक भाव विभोर

Thu, 02 Nov 2017 01:16 AM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी Updated Thu, 02 Nov 2017 01:16 AM IST
विज्ञापन
second day of ganga mahotsav, geeta chandran presents bharatanatyam
गंगा महोत्सव में भरतनाट्यम प्रस्तुत करती गीता चन्द्रन - फोटो : अमर उजाला
मोक्षदायिनी गंगा की लहरें बुधवार की शाम सुरों और स्वरों की लहरियों संग देर रात तक बलखाती रहीं। चार दिवसीय गंगा महोत्सव के दूसरे दिन बुधवार को राजेंद्र प्रसाद घाट पर गीता चंद्रन ने भरनाट्यम की भाव-भंगिमाओं से दर्शकों की तालियां बटोरीं।
विज्ञापन


इसके पहले रोनू मजूमदार की बांसुरी, कुमार बोस के तबले और देबज्योति बोस के सरोद की जुगलबंदी ने श्रोताओं के हृदय के तार झंकृत कर दिए। शास्त्रीय गायिका अश्विनी भिडे़ ने अपने सुरों से गंगा के सुरम्य तट पर भक्तिभाव की सरिता बहाई।
विज्ञापन


गीता चंद्रन ने भरतनाट्यम में अलारिपु पेश किया। अलारिपु का अर्थ है- खिलता हुआ कमल। इसके बाद शिव स्वरूप के रूप में कौतुअम की प्रस्तुति से सबको मोहित कर दिया। इसके बाद शुद्ध नृत्य प्रस्तुत किया।
विज्ञापन
विज्ञापन


इससे पहले बांसुरी वादक रोनू मजूमदार ने राग देश में अलाप जोड़ झाला फिर गत और धमार बजाया। अश्विनी भिडे़ देशपांडे ने पहले सुनाया- हरि के चरण कमल...। इसके बाद द्रुत तीन ताल में प्रस्तुति दी।

मुख्य अतिथि पद्मभूषण पं. छन्नूलाल मिश्र, संकट मोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र और सतुआ बाबा ने कलाकारों को स्मृति चिह्न और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया। संचालन अलका निवेदन ने किया।

कार्यक्रम से पहले बातचीत के दौरान गीता चंद्रन ने कहा कि ठुमरी साम्राज्ञी गिरिजा देवी के जाने से एक युग का अंत हो गया। उन्होंने जीवन शान से जीया। जीवन के आखिरी दिन तक सुर उनके साथ रहे। कहा कि काशी उत्तर और दक्षिण की कला का मिलन केंद्र है। यहां की संस्कृति ऐसी है कि लोगों के दिलों में संगीत बसता है। 

पद्म अलंकरण से कलाकार बड़ा नहीं होता

second day of ganga mahotsav, geeta chandran presents bharatanatyam
गंगा महोत्सव में बांसुरी प्रस्तुत करते रोनू मजूमदार व देबज्योति बोस व तब‌ला पर कुमार बोस - फोटो : अमर उजाला
बातचीत में रोनू मजूमदार ने कहा कि पद्म अलंकरण किसी कलाकार की योग्यता मापने की कसौटी नहीं है। कई ऐसे कलाकार भी हैं ऐसे अलंकरण से सम्मानित हैं लेकिन उन्हें कोई सुनने तक नहीं जाता।

वहीं, कई कलाकार ऐसे हैं जिन्हें कोई सम्मान नहीं मिला पर उन्हें सुनने के लिए लोग इंतजार करते हैं। अब तो ऐसे-ऐसे लोगों को सम्मानित किया जा रहा है कि सम्मान की शोभा घट रही है।

सांस्कृतिक संकुल में आयोजित कार्यक्रम में प्रथम स्थान पाने वाले छात्रों की प्रस्तुति ने सबको मोहित कर लिया। गोपी राधा बालिका इंटर कॉलेज की छात्राओं ने नौ दुर्गा स्वरूप का दर्शन कराया।

सीएम एंग्लो बंगाली इंटर कॉलेज के छात्र त्रिभुवन, अजय, दीपक, हिमांशु ने लोकगीत प्रस्तुत किया। सारस्वत खत्री विद्यालय ने उप शास्त्रीय नृत्य की प्रस्तुति की। बंगाली टोला के सोमेश ने एकल तबला वादन किया।  
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed