लाहौल में ट्रैप कैमरों से वन्य प्राणियों को मिला सुरक्षा कवच
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हिमाचल के जनजातीय क्षेत्र लाहौल की पहाड़ियों के विचरने वाले वन्य प्राणियों की सुरक्षा पुख्ता हो गई है। भारत सरकार की ओर से प्राणी शास्त्र के वैज्ञानिकों ने यहां के जंगलों में डेढ़ दर्जन से अधिक ट्रैप कैमरे लगाए हैं। इनसे पिछले छह महीने से वन्य प्राणियों पर लगातार नजर रखी जा रही है।
जंगल में तीसरी आंख के पहरे का असर ये हुआ है कि इस दौरान वन काटू से लेकर जड़ी-बूटी के तस्कर और शिकारी भी जंगल में दाखिल होने की हिम्मत नहीं कर पा रहे हैं। इसी के चलते वन्य प्राणियों को प्राकृतिक माहौल में बेखौफ घूमते देखा जा रहा है।
लाहौल घाटी में हैं ये जंगली जानवर
गौर हो कि लाहौल घाटी में बर्फानी तेंदुआ, आइबेक्स, काला एवं भूरा भालू सहित कई तरह के जंगली जानवरों को देखा जा रहा है। वैसे तो लाहौल घाटी में महिला मंडलों की सख्ती को देखते हुए लोग वन्य जीवों से छेड़छाड़ से लोग पहले ही दूर रहते हैं, लेकिन वन्य प्राणी अध्ययन व खोज के लिए लगाए गए ट्रैप कैमरे वन्य जीवों के लिए सुरक्षा कवच बन गए हैं।
हालांकि, यहां की पहाड़ियों पर बहने वाले झरने माइनस तापमान के बीच जम गए हैं। ऐसे में वन्य जीव प्यास बुझाने के लिए लगातार निचले क्षेत्रों की ओर रुख कर रहे हैं। वन्य प्राणियों के अध्ययन व खोज पर आए प्राणी शास्त्र के वैज्ञानिक मनीष कुमार ने बताया कि उनकी टीम लाहौल घाटी में पिछले पांच-छह माह से लगातार इस अध्ययन में जुटी है।
विभिन्न प्रजातियों के वन्य प्राणी लगातार कैमरों की नजर में हैं, जिससे उनके अध्ययन में मदद मिल रही है। जगह-जगह डेढ़ दर्जन से अधिक ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं। वन मंडलाधिकारी लाहौल जयराम ठाकुर ने कहा कि इस बार लाहौल घाटी में वन्य प्राणी पहले के मुकाबले ज्यादा महफूज हैं। वैज्ञानिक वन्य प्राणियों के अध्ययन व खोज में लगे हैं।