प्रेम विवाह का ऐसा अंजाम, 55 साल तक भुगतनी पड़ी 'अनोखी' सजा
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55 साल पहले प्रेम विवाह करने वाले एक शख्स के परिवार को अब जाकर न्याय मिल पाया। पंचायत ने इन्हें अनोखी सजा दे डाली। मामला हिमाचल के जिला सिरमौर के शिलाई की है। यहां जातिवाद की बेड़ियों में जकड़े समाज में आज भी कई लोग सामाजिक तिरस्कार का दंश झेल रहे हैं।
उपमंडल शिलाई में एक ऐसा ही मामला सामने आया है जिसमें एक परिवार स्वर्ण जाति का होने के बावजूद 55 साल तक अनुसूचित जाति के दायरे में रखा गया। कसूर सिर्फ इतना था कि परिवार के एक व्यक्ति ने जातिवाद की बेड़ियों को तोड़कर दूसरी जाति की एक महिला से प्रेम विवाह कर लिया था।
इससे पंचायत ने उन्हें जबरन अनुसूचित जाति में रखने का निर्णय लिया। परिवार ने लंबे समय तक इस फैसले का विरोध किया लेकिन पंचायत नहीं मानी। फिर परिवार ने दो साल पहले एसडीएम कोर्ट में इस बारे में अपील दर्ज की। अब सुनवाई के बाद फैसला परिवार के हक में हुआ।
दूसरी जाति की महिला से किया था प्रेम विवाह
एसडीएम की अदालत ने पंचायत को आदेश दिए हैं कि पंचायत रिकॉर्ड में परिवार की जाति में संशोधन किया जाए। जानकारी के अनुसार शिलाई क्षेत्र के एक पंचायत का परिवार वर्षों से अपने हक की लड़ाई लड़ रहा था।
दरअसल, परिवार के एक व्यक्ति ने 70 के दशक में दूसरी जाति की महिला से प्रेम विवाह किया था। इसके बाद परिवार को भी अनुसूचित जाति की श्रेणी में रखा गया और पंचायत रिकॉर्ड में भी उनकी जाति अनुसूचित दर्शाई गई। इससे परिवार एससी श्रेणी में आ गया।
लेकिन, राजस्व रिकॉर्ड में स्वर्ण जाति होने की वजह से वह आरक्षण आदि के भी हकदार नहीं बन पाए। एसडीएम शिलाई विकास शुक्ला ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि इस बारे में याचिका लंबित थी। संबंधित पंचायत को आदेश दिए गए हैं कि वह पंचायत रिकॉर्ड का दुरुस्त करें।