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गौमूत्र बेचना बना आफत, दो हजार लीटर से ज्यादा हो चुका है स्टोर

Thu, 18 Jan 2018 07:00 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर Updated Thu, 18 Jan 2018 07:00 PM IST
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Goshalas are protective shelters for cows in India
डेमो पिक
बांदा के सांड़ी गांव में सांसद न‌िध‌ि से गाैशाला का निर्माण कराया गया था। इस दाैरान अध‌िकारी ढेराें वादे करके गए थे पर अब वहां काेई नजर नहीं अाता है। गाैशाला में हजाराें लीटर गाै मूत्र डंप पड़ा है पर अब इस अाेर काेई ध्यान नहीं दे रहा है। 


 

सांड़ी गांव के गोशाला में बंद अन्ना गायें

Goshalas are protective shelters for cows in India
डेमो पिक
गाैमूत्र खरीद का ढिंढोरा पीटने के बाद अब अफसर भूल गए। सांड़ी गांव के गोशाला में दो हजार लीटर से ज्यादा गोमूत्र इकट्ठा है, लेकिन कोई खरीददार नहीं है। अन्ना गायों की देखरेख में लगे सेवक भी कोई मदद न मिलने से मायूस हैं।

 

गाैशाला के शुभारंभ अफसरों ने खरीदने का किया था वादा

Goshalas are protective shelters for cows in India
डेमो पिक
कस्बे से आठ किलोमीटर दूर सांड़ी गांव में 12 बीघे में गाैशाला बनाई गई है। इसमें लगभग दो सौ अन्ना गायें बंद हैं। गोशाला निर्माण को सांसद निधि से 23 लाख रुपये मिले थे। अधिकारियों ने जोर-शोर से इसका शुभारंभ किया था। गाैमूत्र बेचने का वादा किया था, लेकिन अब अधिकारी वादे भूल गए हैं।

 
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गाैशाला के शुभारंभ अफसरों ने खरीदने का किया था वादा

Goshalas are protective shelters for cows in India
डेमो पिक
गाैशाला में लगभग 2000 लीटर गोमूत्र डंप है। खरीददार नहीं मिल रहे। गो सेवक इन्हें बेचने के लिए अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं। दूसरी तरफ गायों के चारे-भूसे का इंतजाम चंदे से हो रहा है। गायों की देखरेख में लगे रामस्वरूप यादव, जयकरन निषाद, रामराज निषाद, महादेव निषाद, राधेश्याम, रमेश निषाद, रामराज वाल्मीकि, रामदास निषाद, धर्मराज निषाद आदि सेवकों ने बताया कि ग्राम प्रधान के सहयोग से गायों का पेट भर रहा है।

 
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गाैमूत्र बेचने के लिए लगा रहे अफसरों के चक्कर

Goshalas are protective shelters for cows in India
डेमो पिक
शासन-प्रशासन से कोई मदद नहीं मिल रही। न ही उन्हें कोई मानदेय दिया जा रहा है। प्रधान पतिराखन निषाद ने बताया कि गाैशाला तक पहुंच मार्ग नहीं है। इससे भूसा आदि पहुंचाने में परेशानी हो रही है।
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