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फर्जी कर्नल ऐसे बनाता था मासूमों को अपना शिकार, सेना प्रमुख के साथ मंच पर होने का करता था दावा
Mon, 20 May 2019 07:50 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Mon, 20 May 2019 07:50 PM IST
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फर्जी कर्नल (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
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फर्जी कर्नल सूर्य प्रताप सिंह (वास्तविक नाम मनोज कुमार सिंह) से ठगी का शिकार हुए पीड़ितों ने रविवार को एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। फर्जी कर्नल यूट्यूब पर आर्मी डे का एक वीडियो दिखाकर दावा करता था कि वह सेना प्रमुख के साथ मंच पर मौजूद था।
इस वीडियो पर विश्वास करके लोग उसके जाल में फंस जाते थे। इंस्पेक्टर दधिबल तिवारी ने बताया कि इसी साल आर्मी डे पर सेना प्रमुख ने अधिकारियों को सम्मानित किया था। इस दौरान मंच पर उनके पीछे तीन सेना के अधिकारी खड़े थे।
चश्मा लगाए वर्दी में खड़े एक अधिकारी को फर्जी कर्नल सूर्य प्रताप सिंह खुद को बताता था। आर्मी इंटेलीजेंस की टीम ने सूर्य प्रताप से पूछताछ के बाद वीडियो की जांच की। इसमें पाया गया कि वीडियो में सेना के अधिकारी हैं। सूर्य प्रताप का दावा झूठा है।
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इस वीडियो पर विश्वास करके लोग उसके जाल में फंस जाते थे। इंस्पेक्टर दधिबल तिवारी ने बताया कि इसी साल आर्मी डे पर सेना प्रमुख ने अधिकारियों को सम्मानित किया था। इस दौरान मंच पर उनके पीछे तीन सेना के अधिकारी खड़े थे।
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चश्मा लगाए वर्दी में खड़े एक अधिकारी को फर्जी कर्नल सूर्य प्रताप सिंह खुद को बताता था। आर्मी इंटेलीजेंस की टीम ने सूर्य प्रताप से पूछताछ के बाद वीडियो की जांच की। इसमें पाया गया कि वीडियो में सेना के अधिकारी हैं। सूर्य प्रताप का दावा झूठा है।
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दिनभर होती रही फर्जी कर्नल से पूछताछ, फिर भेजा गया जेल
वर्दी में जिस तरह की कद काठी में फर्जी कर्नल सूर्य प्रताप सिंह दिखता था, कुछ उसी कद काठी के एक अफसर आर्मी डे पर आयोजित कार्यक्रम के मंच पर मौजूद थे। सूर्य प्रताप इसी का फायदा उठाता था। सूर्य प्रताप के इस फर्जीवाड़े से ये स्पष्ट हो गया कि वह बहुत ही शातिर है।
फर्जी कर्नल से दिन भर अधिकारी पूछताछ में जुटे रहे। एटीएस, आईबी (इंटेलीजेंस ब्यूरो), एमआई (मिलेट्री इंटेलीजेंस), एलआईयू सहित नेवी केअफसरों ने उससे पूछताछ की। उसके दोनों हाथों के पंजे के फिंगर प्रिंट भी लिए गए। इसके बाद शाम को उसे जेल भेज दिया गया।
फर्जी कर्नल से दिन भर अधिकारी पूछताछ में जुटे रहे। एटीएस, आईबी (इंटेलीजेंस ब्यूरो), एमआई (मिलेट्री इंटेलीजेंस), एलआईयू सहित नेवी केअफसरों ने उससे पूछताछ की। उसके दोनों हाथों के पंजे के फिंगर प्रिंट भी लिए गए। इसके बाद शाम को उसे जेल भेज दिया गया।