आपके बच्चे को है कंप्यूटर, लैपटॉप की लत तो हो जाइए सावधान
- कंप्यूटर, लैपटॉप की लत से चिड़चिड़े हो रहे बच्चे
- हिंसक वीडियो गेम्स देख बाल मानसिकता पर भी बुरा असर
- ज्यादा लैपटॉप से चिपकने पर दिमाग और आंखों पर दुष्प्रभाव
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अगर आप के बच्चों को घंटों कंप्यूटर, मोबाइल और लैपटॉप पर चिपके रहने की लत लग गई है, तो जरा सावधान हो जाएं। ऐसी आदत से बच्चों की मानसिकता पर दुष्प्रभाव पड़ सकता है। इससे नौनिहाल मोटापे के शिकार, हिंसक प्रवृति, चिड़चिड़ापन और जिद्दी होते जा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टरों का कहना है कि इससे बच्चों की मानसिकता पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है।
अकसर देखा जाता है कि कई बच्चे सुबह शाम खेल मैदान में कम नजर आते हैं। ज्यादातर वीडियो गेम्स, कंप्यूटर, लैपटॉप और आधुनिक एंड्रायड मोबाइल पर चिपके रहते हैं। धीरे-धीरे इतनी लत लग जाती है कि बच्चे बाहरी दुनिया से कट जाते हैं। बच्चों का इनडोर और आउट डोर गेम्स से मानसिक और शारीरिक विकास होता है।
सुबह के समय मैदान पर खेलकूद से जहां ताजी हवा मिल पाती है, वहीं बच्चों के शरीर में स्फूर्ति का संचार बना रहता है। वहीं, कंप्यूटर से घंटों तक चिपकने वाले बच्चों में आलस, मोटापा, चिड़चिड़ापन, हिंसक प्रवृति बढ़ने के आसार रहते है। सबसे ज्यादा खतरा ग्लैमर और नग्नता की तरफ रुझान बढ़ने की आशंका बनी रहती है। इसलिए अभिभावकों को बच्चों की शिक्षा, टाइम टेबल और खेलों के प्रति विशेष तौर से ध्यान देना जरुरी है।
बच्चों का टाइम टेबल तय कर रखें नजर: डा. जैन
स्वास्थ्य विभाग सिरमौर के शिशु रोग विशेषज्ञ डा. अमिताभ जैन का कहना है कि बच्चों में लैपटॉप, कंप्यूटर गेम्स और एंड्रायड माबोइल पर अधिकतर समय व्यतीत करने के दुष्परिणाम नजर आने लगे हैं। इन पर कई घंटों चिपके रहने वाले 3 से 15 आयु वर्ग के बच्चों में मोटापे की शिकायतें ज्यादा आने लगी हैं।
बच्चों में कम उम्र में ही शूगर, बीपी, आंखों से पानी बहना और आंखें कमजोर हो रही हैं। इसलिए नौनिहालों का टाइम टेबल जरूर तय करें। बच्चों को दिन में आधा या 1 घंटे से ज्यादा समय तक लैपटॉप या कंप्यूटर पर व्यतीय न करने दें। रोज कुछ समय के लिए खेलने मैदान में भेजें। खेलों समेत शारीरिक व मानसिक विकास वाली गतिविधियों में बच्चों को जरूर शामिल करें।