बिट कॉइन के फेर में कहीं आप भी तो नहीं लुटा रहे अपनी गाढ़ी कमाई, जानें इसके नुकसान
वर्चुअल करेंसी बिट कॉइन का क्रेज लखनऊ वालों के भी सिर चढ़कर बोल रहा है। एक साल में 2000 डॉलर से बढ़कर 15 डॉलर के करीब पहुंची एक बिट कॉइन की कीमत लोगों को इसकी खरीद-फरोख्त के लिए आकर्षित कर रही है।
इस क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का अनुमान है कि करीब 20 हजार लखनऊ वासी तगड़े मुनाफे की लालच में बिट कॉइन की खरीद-फरोख्त में शामिल हैं। लेकिन इस निवेश में लोगों की गाढ़ी कमाई कभी भी डूब सकती है। क्योंकि रिजर्व बैंक 2013 में ही साफ कर चुका है कि बिट कॉइन असली मुद्रा नहीं है, इनका विनिमय नहीं किया जा सकता। भारतीय मुद्रा के होते हुए इनका विनियम अपराध है।
कहां से हो रही खरीद-फरोख्त
देश में 10 से अधिक मोबाइल एप के जरिए इनकी खरीद-फरोख्त हो रही है। इन एप के पेमेंट गेटवे भारत में ही हैं। इन्हें लाखाें यूजर्स डाउनलोड और इंस्टॉल कर चुके हैं। इनके जरिए ही डीलिंग हो रही है। यूजर्स यहां बिट कॉइन खरीदने-बेंचने के साथ उसकी कीमत और मांग पर नजर रख सकते हैं।
अपनी भाषा में समझिए क्या है बिट कॉइन
साइबर मामलों के विशेषज्ञ नितनेम सिंह बताते हैं कि बिट कॉइन दरअसल एक वर्चुअल या क्रिप्टो करेंसी है। यह ऐसा सिक्का नहीं जिसे आप छू सकें, बल्कि एक कंप्यूटर कोड है, जिसे काफी समय देकर तेज कंप्यूटरों और इंटरनेट कनेक्शन के जरिए तैयार किया जाता है।
इस प्रक्रिया को माइनिंग कहते हैं। तैयार किए जाने वाले कोड को हैश कहते हैं। एक कोड यानी एक बिट कॉइन। जिस तरह हर करेंसी नोट का एक नंबर होता है और उस नंबर का कोई और नोट नहीं हो सकता, उसी तरह यह कोड भी विशिष्ट होता है, वैसा दूसरा कोड नहीं होता।
यह कोड बेहद लंबा होता है। इसे तैयार करने में समय भी लगता है और सुविधाएं भी काफी चाहिए। इसलिए माइनिंग करने वाले कम हैं। नितनेम कहते हैं कि सरकार ने भले ही बिट कॉइन को अवैध घोषित कर रखा है, इसके बावजूद लोग इसके प्रति आकर्षित हो रहे हैं। वहीं राज मिश्रा दावा करते हैं कि भारत में बड़ी संख्या में लोग बिट कॉइन की खरीद-फरोख्त से जुड़ चुके हैं।
न कोई क्रेडिट न कोई गारंटी
भारतीय करेंसी की सबसे कॉमन और विश्वसनीय बात होती है, आरबीआई गवर्नर का वादा। जैसे पांच सौ के नोट पर आप पढ़ेंगे ‘मैं धारक को पांच सौ रुपये अदा करने का वचन देता हूं।’ जो पांच सौ रुपये का नोट है, उसकी अपनी लागत पांच सौ रुपये नहीं है, लेकिन वह इतनी शक्ति रखता है कि पांच सौ रुपये तक की वस्तु के बदले में उसे दिया जाएगा।
यह लोगों का विश्वास है जो सरकार ने दिया है। पूरा तंत्र इस विश्वास को कायम रखता है। बिट कॉइन के साथ ऐसा कोई वादा नहीं है। एक बिट कॉइन सात साल पहले 2 डॉलर की थी, आज 14,000 डॉलर से अधिक की है। कल क्या होगा, कहा नहीं जा सकता।
आप एक बिट कॉइन खरीद लें और दो दिन बाद उसके 14,000 या दो डॉलर भी चुकाने से कोई इंकार कर दे तो आप कहीं शिकायत नहीं कर सकते। दूसरी ओर तकनीक जिस तेजी से आगे बढ़ रही है, बेहतर कंप्यूटर बनते जा रहे हैं, बिट कॉइन कोड बनाना आसान होता जाएगा।
सोने की तरह कतरा-कतरा बिक रहा बिट कॉइन
राजधानी में हाल में बिट कॉइन खरीद-फरोख्त को लेकर जागरूकता के लिए एक सेमिनार आयोजित कर चुके राज कुमार मिश्रा बताते हैं एक बिट कॉइन इस समय 14 हजार डॉलर से पार यानी नौ लाख रुपये से अधिक कीमत का है। ऐसे में लोग 500 से 1000 रुपये तक में एक कॉइन का कुछ अंश खरीदने को भी तैयार हैं और यह पाइंट वैल्यू में मिल भी रहा है।
यही वजह है कि इसके खरीदार भी बढ़ रहे हैं। इसके लिए बैंक अकाउंट के जरिए पेमेंट होता है और कॉइन बेचने पर पैसा भी अकाउंट में आता है।
बार-बार आगाह कर रहा आरबीआई
दिसंबर 2013 में आरबीआई के सहायक महाप्रबंधक रहे अजित प्रसाद ने बिट कॉइन पर नोटिफिकेशन जारी कर लोगों को चेताया था। आरबीआई समय-समय पर इसे जारी करता रहता है। अजित प्रसाद का कहना था कि बिट कॉइन और लाइटकॉइन, बीबीक्यू कॉइन, डॉजकॉइन आदि सभी तरह की वर्चुअल करेंसी को लेकर सतर्क रहें।
सतर्कता इसलिए भी जरूरी
- भारत में इनका लेनदेन बढ़ रहा है, जबकि आरबीआई सहित कोई बैंक इन्हें वैध नहीं मानते और न ही स्वीकार करते हैं। इन्हें यूजर्स के इलेक्ट्रॉनिक वॉलेट में जमा किया जाता है, ऐसे में वे खो सकते हैं, हैक किए जा सकते हैं या डिलीट किए जा सकते हैं।
- चूंकि उनका रजिस्ट्रेशन नहीं है, इसलिए कहीं शिकायत भी नहीं की जा सकेगी।
- इस करेंसी का मूल्य सिर्फ अनुमान के आधार पर बढ़ता-घटता है, ऐसे में यूजर्स को अचानक भारी घाटा हो सकता है।
- इनका उपयोग अवैध व देश विरोधी कार्यों में हो सकता है, मनी लॉड्रिंग से लेकर आतंकवाद तक को इनके जरिए बढ़ावा दिया जा सकता है।
चोरी-छिपे चल रही माइनिंग