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Chandigarh News: प्रतिबंधित इंजेक्शन और आर्म्स एक्ट के मामले युवक बरी
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चंडीगढ़। प्रतिबंधित इंजेक्शन और आर्म्स एक्ट में जिला अदालत ने एक आरोपी को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। बरी होने वाले युवक की पहचान रामदरबार निवासी समदर्श उर्फ जोसफ के रूप में हुई है। सेक्टर-39 थाना पुलिस ने जोसफ के खिलाफ जून 2020 में मामला दर्ज किया था।
पुलिस का आरोप था कि उसे 26 प्रतिबंधित टीकों और देसी कट्टे के साथ गिरफ्तार किया है, लेकिन ये आरोप अदालत में साबित नहीं हुए। इसके अलावा पुलिस के पास मौके का कोई गवाह नहीं था। जो गवाह थे वह सभी पुलिसकर्मी थे, जिनके बयानों में भी मतभेद रहा।
जोसफ का केस लड़ने वाले वकील यादविंदर सिंह संधू ने कहा कि वह पुलिसकर्मियों के खिलाफ रिश्वत मामले में सीबीआई का अहम गवाह है। उसे इसमें गवाही न देने के लिए पुलिसकर्मियों से ही धमकियां मिल रही थीं। उसने गिरफ्तारी से चार महीने पहले ही सीबीआई कोर्ट को इस बारे में जानकारी भी दी थी। जोसफ ने चंडीगढ़ पुलिस के चार इंस्पेक्टर के खिलाफ शिकायत भी दी थी। पुलिस ने खुद को बचाने के लिए उसे ही झूठे केस में फंसा दिया।
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रिश्वत मामले में अहम गवाह है समदर्श...
सेक्टर-31 थाना पुलिस के सब इंस्पेक्टर मोहन सिंह को वर्ष 2017 में सीबीआई ने एक लाख रुपये की रिश्वत मांगने के आरोप में गिरफ्तार किया था। उस केस में एक इंस्पेक्टर का नाम भी सामने आया था, लेकिन सीबीआई ने उसे आरोपी नहीं बनाया। इस केस में समदर्श अहम गवाह है।
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पुलिस का आरोप था कि उसे 26 प्रतिबंधित टीकों और देसी कट्टे के साथ गिरफ्तार किया है, लेकिन ये आरोप अदालत में साबित नहीं हुए। इसके अलावा पुलिस के पास मौके का कोई गवाह नहीं था। जो गवाह थे वह सभी पुलिसकर्मी थे, जिनके बयानों में भी मतभेद रहा।
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जोसफ का केस लड़ने वाले वकील यादविंदर सिंह संधू ने कहा कि वह पुलिसकर्मियों के खिलाफ रिश्वत मामले में सीबीआई का अहम गवाह है। उसे इसमें गवाही न देने के लिए पुलिसकर्मियों से ही धमकियां मिल रही थीं। उसने गिरफ्तारी से चार महीने पहले ही सीबीआई कोर्ट को इस बारे में जानकारी भी दी थी। जोसफ ने चंडीगढ़ पुलिस के चार इंस्पेक्टर के खिलाफ शिकायत भी दी थी। पुलिस ने खुद को बचाने के लिए उसे ही झूठे केस में फंसा दिया।
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रिश्वत मामले में अहम गवाह है समदर्श...
सेक्टर-31 थाना पुलिस के सब इंस्पेक्टर मोहन सिंह को वर्ष 2017 में सीबीआई ने एक लाख रुपये की रिश्वत मांगने के आरोप में गिरफ्तार किया था। उस केस में एक इंस्पेक्टर का नाम भी सामने आया था, लेकिन सीबीआई ने उसे आरोपी नहीं बनाया। इस केस में समदर्श अहम गवाह है।