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दूसरों का दोष देखना त्याग देना चाहिए : रसिक महाराज
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चंडीगढ़। सिद्ध बाबा बालकनाथ मंदिर मलोया के 41वें वार्षिकोत्सव पर आयोजित पांच दिवसीय शिव कथा के प्रथम दिन नृसिंह पीठाधीश्वर स्वामी रसिक महाराज ने दिव्य प्रवचन दिए। रसिक महाराज ने उपस्थित लोगों को बताया कि मानस रोग सबसे बड़ा रोग है। काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद ये सब मानस रोग ही हैं।
उन्होंने कहा कि शरीर का रोग तो केवल इसी जीवन में दुख देगा और मरने के साथ ही मर जाएगा, लेकिन मानस रोग तो मरने के बाद भी साथ जाएगा। इन मानस रोग को दूर करने के लिए ही सत्संग हैं। सतत सत्संग करिए। दूसरों का दोष देखना सर्वथा त्याग देना चाहिए। सर्वथा न छोड़ सकें तो प्रयास करना चाहिए कि कम से कम दोष दिखें।
कथा प्रारंभ होने से पूर्व सिद्ध बाबा बालकनाथ मंदिर मलोया के संस्थापक गुरु मामचंद राणा, नरेंद्र वर्मा, सुभाष बंसल, संदीप सिंह, प्रताप सिंह, चमेली देवी, पूजा बंसल, अमर सिंह, वीरचंद, अभिलाष सिंह ने माल्यार्पण कर व्यासपीठ का पूजन किया।
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उन्होंने कहा कि शरीर का रोग तो केवल इसी जीवन में दुख देगा और मरने के साथ ही मर जाएगा, लेकिन मानस रोग तो मरने के बाद भी साथ जाएगा। इन मानस रोग को दूर करने के लिए ही सत्संग हैं। सतत सत्संग करिए। दूसरों का दोष देखना सर्वथा त्याग देना चाहिए। सर्वथा न छोड़ सकें तो प्रयास करना चाहिए कि कम से कम दोष दिखें।
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कथा प्रारंभ होने से पूर्व सिद्ध बाबा बालकनाथ मंदिर मलोया के संस्थापक गुरु मामचंद राणा, नरेंद्र वर्मा, सुभाष बंसल, संदीप सिंह, प्रताप सिंह, चमेली देवी, पूजा बंसल, अमर सिंह, वीरचंद, अभिलाष सिंह ने माल्यार्पण कर व्यासपीठ का पूजन किया।
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