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Haryana: गांव हथवाला में 2106 एकड़ जमीन की गलत चकबंदी रद्द करने की सिफारिश, अधिकारियों ने बाग, ट्यूबवेल रिकॉर्ड में दिखाए खाली
Thu, 07 Jul 2022 01:56 PM IST
निवेदिता वर्मा
यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Thu, 07 Jul 2022 01:56 PM IST
सार
गांव में चकबंदी के खिलाफ विभाग को कुल 246 अपील मिली। इस पर राजस्व विभाग ने 17 नवंबर 2021 को चकबंदी पर रोक लगा दी।
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गांव हथवाला में खड़ी फसल।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पानीपत जिले के हथवाला गांव की 2106 एकड़ जमीन की गलत चकबंदी रद्द होगी। नियमों को ताक पर रखकर की गई चकबंदी को रद्द करने की सिफारिश पानीपत की एडीसी वीना हुड्डा की अध्यक्षता वाली चार सदस्यीय समिति ने सरकार को कर दी है। अतिरिक्त मुख्य सचिव राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग और निदेशक चकबंदी के पास जांच रिपोर्ट पहुंच गई है। जल्दी चकबंदी रद्द करने की अधिसूचना जारी होने की संभावना है।
चकबंदी अधिकारियों ने बाग-बगीचे, ट्यूबवेल और फसल वाले खेत रिकॉर्ड में पूरी तरह खाली दिखा दिए थे। सेवानिवृत्त सहायक चकबंदी अधिकारी दलबीर सिंह, पटवारी सिकंदर कुमार और कृष्ण कुमार (अब कानूनगो) पर कुछ लोगों के साथ सांठगांठ कर गलत तरीके से चकबंदी करने का आरोप है। सहायक चकबंदी अधिकारी दलबीर सिंह करनाल के कैरवाली अमृतपुर कलां में बुर्द हुई जमीन की चकबंदी करने के दौरान गलत दस्तावेज बनाने और धोखाधड़ी करने के मामले में विजिलेंस जांच का सामना कर रहे हैं। उन्होंने इस मामले में केस दर्ज होने पर ही स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली थी। बावजूद इसके राजस्व विभाग ने उन्हें हथवाला गांव का सहायक चकबंदी अधिकारी लगा दिया।
2019 में 21 (1) के तहत हुई तकसीम चकबंदी में अधिकारियों ने कुछ लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए अधिक शेयर बांट दिए। जो दो किले जमीन का हकदार था, उसे कागजों में 25-35 किले जमीन का हिस्सेदार बना दिया। इसे देखते हुए शामलात देह के असल मालिकान रामदिया त्यागी, आकाश त्यागी, अमरीश त्यागी, अशोक त्यागी, कृष्ण त्यागी, राहुल त्यागी, मनोज त्यागी, विरेंद्र त्यागी, आकाश त्यागी, सेंसर त्यागी, सतबीर नंबरदार, श्रीभगवान त्यागी इत्यादि ने वित्तायुक्त राजस्व, के पास चकबंदी में भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए शिकायत की। चकबंदी के खिलाफ विभाग को कुल 246 अपील मिली। इस पर राजस्व विभाग ने 17 नवंबर 2021 को चकबंदी पर रोक लगा दी।
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चकबंदी अधिकारियों ने बाग-बगीचे, ट्यूबवेल और फसल वाले खेत रिकॉर्ड में पूरी तरह खाली दिखा दिए थे। सेवानिवृत्त सहायक चकबंदी अधिकारी दलबीर सिंह, पटवारी सिकंदर कुमार और कृष्ण कुमार (अब कानूनगो) पर कुछ लोगों के साथ सांठगांठ कर गलत तरीके से चकबंदी करने का आरोप है। सहायक चकबंदी अधिकारी दलबीर सिंह करनाल के कैरवाली अमृतपुर कलां में बुर्द हुई जमीन की चकबंदी करने के दौरान गलत दस्तावेज बनाने और धोखाधड़ी करने के मामले में विजिलेंस जांच का सामना कर रहे हैं। उन्होंने इस मामले में केस दर्ज होने पर ही स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली थी। बावजूद इसके राजस्व विभाग ने उन्हें हथवाला गांव का सहायक चकबंदी अधिकारी लगा दिया।
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2019 में 21 (1) के तहत हुई तकसीम चकबंदी में अधिकारियों ने कुछ लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए अधिक शेयर बांट दिए। जो दो किले जमीन का हकदार था, उसे कागजों में 25-35 किले जमीन का हिस्सेदार बना दिया। इसे देखते हुए शामलात देह के असल मालिकान रामदिया त्यागी, आकाश त्यागी, अमरीश त्यागी, अशोक त्यागी, कृष्ण त्यागी, राहुल त्यागी, मनोज त्यागी, विरेंद्र त्यागी, आकाश त्यागी, सेंसर त्यागी, सतबीर नंबरदार, श्रीभगवान त्यागी इत्यादि ने वित्तायुक्त राजस्व, के पास चकबंदी में भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए शिकायत की। चकबंदी के खिलाफ विभाग को कुल 246 अपील मिली। इस पर राजस्व विभाग ने 17 नवंबर 2021 को चकबंदी पर रोक लगा दी।
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फरवरी 2022 में अधिकारियों के खिलाफ दी लिखित शिकायत
गलत तरीके से चकबंदी करने वाले अधिकारियों पर कोई कार्रवाई होने के बाद 14 फरवरी 2022 को शिकायतकर्ता निदेशक चकबंदी के पास पहुंचे। उन्होंने दलबीर सिंह, कृष्ण व सिकंदर पटवारी इत्यादि के खिलाफ लिखित शिकायत दी। बावजूद इसके कार्रवाई न होने पर 23 मार्च को हथवाला गांव निवासी लामबंद हुए और आत्मदाह की चेतावनी दे डाली। इसके बाद सरकार ने 29 मार्च 2022 को एडीसी पानीपत वीना हुड्डा की अध्यक्षता में जांच के लिए एसडीएम पानीपत, एसडीएम और तहसीलदार समालखा की समिति गठित कर दी। समिति ने चकबंदी को तो गलत ठहरा दिया और रदद करने की सिफारिश की, लेकिन दोषी अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई न करने से शिकायतकर्ता नाराज हैं। उन्होंने कड़ी कार्रवाई की मांग की है।1125 साल पहले बसा यह गांव
यमुना किनारे यह गांव 1125 साल पहले बसा। अभी पानीपत जिले की समालखा तहसील में आता है। यहां 1908-09 तक यमुना के बार-बार बहाव बदलने से ग्रामीणों की मालिकान शामलात देह जमीन बुर्द होती रही। 1879-80 में पहली बार स्थायी बंदोबस्त और 1965-66 में चकबंदी हुई। 2003 में दोबारा चकबंदी की अधिसूचना जारी कर गई, जिससे विवाद खड़ा हो गया। 2106 एकड़ जमीन यमुना में बुर्द होने के बाद प्राप्त हुई गांव के 85 प्रतिशत मालिकान की शामलात देह है।एडीसी की जांच रिपोर्ट में सिफारिशें
- चकबंदी अफसरों ने चकबंदी से पहले प्रारंभिक रिकॉर्ड की पड़ताल नहीं की
- कुल रकबा के जोड़ में 36 कनाल 10 मरले की कमी मिली
- चकबंदी में बाग, टयूबवेल, मकान नहीं दिखाए गए, ये दिखाना जरूरी थे, रकबा कीमत अनुसार ठीक नहीं बांटा
- रकबा किसी को 2-4 आने की जगह 16 आने दे दिया गया, श्रेणी अनुसार भी बंटवारा नहीं किया
- नियम विरुद्ध हुई चकबंदी को रद्द कर नए सिरे से गांव की मशविरा कमेटी गठित कर तकसीम चकबंदी की जाए