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जावेद अख्तर के मन की बात: पंचकूला पहुंचे गीतकार का फलसफा-जिंदगी आसानी से नहीं मानती, फिर उठेगी, ठीक होगी
Mon, 13 Mar 2023 10:18 AM IST
निवेदिता वर्मा
दीपक शाही, अमर उजाला, पंचकूला
दीपक शाही, अमर उजाला, पंचकूला
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Mon, 13 Mar 2023 10:18 AM IST
सार
जावेद अख्तर ने कहा कि जिंदगी इतनी आसान नहीं होती है। जिंदगी आपको लाइफ़ पैकेज आफर करती है। हम सोचते रह जाते हैं कि कौन सा पैकेज लें और जिंदगी निकल जाती है। जरूरी है कि आप क्या चयन करते हैं।
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जावेद अख़्तर
- फोटो : Social Media
विस्तार
प्रसिद्ध लेखक और गीतकार जावेद अख्तर लेखक अरविंद द्वारा उनके ऊपर लिखी गई किताब जादूनामा का विमोचन करने के लिए पंचकूला के इंद्रधनुष आडिटोरियम आए। उन्होंने इस दौरान अपने बचपन से जुड़े किस्से भी सुनाए और कुछ प्रेरणादायक कहानियां भी।
तो जावेद साहब आपके दिल में क्या चल रहा है ? इतनी सी बात सुनते ही प्रसिद्ध लेखक और गीतकार जावेद अख्तर बोले, आपकी बात से तो गोली कान के पास से निकली, अच्छा हुआ आपने मन की बात नहीं पूछी।
जावेद अख्तर ने कहा कि जिंदगी इतनी आसान नहीं होती है। जिंदगी आपको लाइफ़ पैकेज आफर करती है। हम सोचते रह जाते हैं कि कौन सा पैकेज लें और जिंदगी निकल जाती है। जरूरी है कि आप क्या चयन करते हैं। एक लाइफ़ पैकेज में कुछ होता है तो दूसरे में कुछ और। उन्होंने अपने बचपन को याद करते हुए बताया कि उनका नाम बचपन में जादू रखा गया था। जावेद नाम तो तब मिला जब स्कूल जाने का वक्त आ गया। लम्हा लम्हा जादू नाम की पिता जी की रचना से उनका नाम सेलेक्ट किया गया था।
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जावेद साहब से जब उनकी मां और उनके संबंधों के बारे में पूछा गया तो बोले, कि हरेक बेटे का उसकी मां से खास संबंध होता है। उन्होंने एक उदाहरण दिया कि अगर बड़े को सुलाया जाए और थपकी दी जाए तो शायद वह सो नहीं पाएगा, लेकिन बच्चा थपकी पाते ही सो जाता है। यह लगाव मां के संबंधों का होता है। जिसका असर बच्चे पर कोख में पालन के दौरान ही हो जाता है। उन्होंने कहा कि जिंदगी में आरजू सबसे ज्यादा समस्या है। यदि आरजू पूरी हो जाती है तो खाली हो जाता है, इसी तरह यदि पूरी नहीं होती तब भी परेशानी होती है। इसके बीच का गैप भरना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि उनका पूरा ख़ानदान शायरों का रहा है, लेकिन उन्होंने 32 वर्ष में पहली शायरी लिखी जिसको उन्होंने अपनी किताब में स्थान नहीं दिया।
गब्बर और मोगैंबो को ज्यादा पसंद करते हैं बच्चे
जावेद अख्तर से जब पूछा गया कि विलेन के किरदारों पर आपने काफ़ी मेहनत की है, तो बोले- वास्तव में बच्चों को विलेन का केरैक्टर ज्यादा पसंद आता है। आप चाहे गब्बर देखें या फिर मोगैम्बो, उनके कैरेक्टरों ने बच्चों के बीच धमाल मचाया। उन कैरेक्टरों को पेश करने का अंदाज जरूरी था।
युवा नकारात्मक न हों
जावेद अख्तर ने कहा कि युवाओं से यही कहूंगा कि आपको नकारात्मक नहीं होना चाहिए। जिंदगी जिंदा चीज है। जिंदगी आसानी से नहीं मानती। फिर उठेगी फिर ठीक होगी। ये धूल जो बदन पर लगी है फिर झाड़कर चल पड़ेगी। फिर वही गहमागहमी, वही हंगामा होगा। ये अजीब प्लेनेट है।
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तो जावेद साहब आपके दिल में क्या चल रहा है ? इतनी सी बात सुनते ही प्रसिद्ध लेखक और गीतकार जावेद अख्तर बोले, आपकी बात से तो गोली कान के पास से निकली, अच्छा हुआ आपने मन की बात नहीं पूछी।
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जावेद अख्तर ने कहा कि जिंदगी इतनी आसान नहीं होती है। जिंदगी आपको लाइफ़ पैकेज आफर करती है। हम सोचते रह जाते हैं कि कौन सा पैकेज लें और जिंदगी निकल जाती है। जरूरी है कि आप क्या चयन करते हैं। एक लाइफ़ पैकेज में कुछ होता है तो दूसरे में कुछ और। उन्होंने अपने बचपन को याद करते हुए बताया कि उनका नाम बचपन में जादू रखा गया था। जावेद नाम तो तब मिला जब स्कूल जाने का वक्त आ गया। लम्हा लम्हा जादू नाम की पिता जी की रचना से उनका नाम सेलेक्ट किया गया था।
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जावेद साहब से जब उनकी मां और उनके संबंधों के बारे में पूछा गया तो बोले, कि हरेक बेटे का उसकी मां से खास संबंध होता है। उन्होंने एक उदाहरण दिया कि अगर बड़े को सुलाया जाए और थपकी दी जाए तो शायद वह सो नहीं पाएगा, लेकिन बच्चा थपकी पाते ही सो जाता है। यह लगाव मां के संबंधों का होता है। जिसका असर बच्चे पर कोख में पालन के दौरान ही हो जाता है। उन्होंने कहा कि जिंदगी में आरजू सबसे ज्यादा समस्या है। यदि आरजू पूरी हो जाती है तो खाली हो जाता है, इसी तरह यदि पूरी नहीं होती तब भी परेशानी होती है। इसके बीच का गैप भरना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि उनका पूरा ख़ानदान शायरों का रहा है, लेकिन उन्होंने 32 वर्ष में पहली शायरी लिखी जिसको उन्होंने अपनी किताब में स्थान नहीं दिया।
गब्बर और मोगैंबो को ज्यादा पसंद करते हैं बच्चे
जावेद अख्तर से जब पूछा गया कि विलेन के किरदारों पर आपने काफ़ी मेहनत की है, तो बोले- वास्तव में बच्चों को विलेन का केरैक्टर ज्यादा पसंद आता है। आप चाहे गब्बर देखें या फिर मोगैम्बो, उनके कैरेक्टरों ने बच्चों के बीच धमाल मचाया। उन कैरेक्टरों को पेश करने का अंदाज जरूरी था।
युवा नकारात्मक न हों
जावेद अख्तर ने कहा कि युवाओं से यही कहूंगा कि आपको नकारात्मक नहीं होना चाहिए। जिंदगी जिंदा चीज है। जिंदगी आसानी से नहीं मानती। फिर उठेगी फिर ठीक होगी। ये धूल जो बदन पर लगी है फिर झाड़कर चल पड़ेगी। फिर वही गहमागहमी, वही हंगामा होगा। ये अजीब प्लेनेट है।