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गुरुग्राम में जलभराव: हरियाणा मानवाधिकार आयोग हुआ सख्त, मांगा शहर का तकनीकी ऑडिट
Fri, 11 Sep 2026 11:16 AM IST
शाहिल शर्मा
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
Published by: शाहिल शर्मा
Updated Fri, 11 Sep 2026 11:16 AM IST
सार
ऑडिट में नालियों, कल्वर्ट, पंपिंग स्टेशनों और आउटफॉल की क्षमता, सड़क की ऊंचाई व ढलान, सीवरेज और वर्षा जल निकासी के संभावित जुड़ाव तथा भूमिगत पानी और सीवरेज पाइपलाइनों की स्थिति की जांच होगी।
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हरियाणा मानवाधिकार आयोग
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
गुरुग्राम में हर बारिश के बाद होने वाले जलभराव, घंटों लगने वाले जाम और आम लोगों, खासकर स्कूली बच्चों की परेशानी पर हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने शहर की वर्षा जल निकासी व्यवस्था और इससे जुड़े पूरे नागरिक बुनियादी ढांचे का व्यापक तकनीकी ऑडिट कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही अलग-अलग जलभराव वाले स्थानों पर अस्थायी उपायों के बजाय पूरे शहर के लिए एकीकृत नागरिक बुनियादी ढांचा पुनर्गठन योजना तैयार करने को कहा है।
जस्टिस ललित बत्रा की अध्यक्षता वाली फुल बेंच ने अगस्त में प्रकाशित समाचार रिपोर्टों पर स्वत: संज्ञान लेते हुए यह निर्देश दिए। आयोग ने कहा कि 24 अगस्त को करीब 75 मिलीमीटर बारिश के बाद सुभाष चौक, राजीव चौक, नरसिंहपुर, इफको चौक, सोहना रोड, शीतला माता रोड और एनएच-48 समेत कई इलाकों में जलभराव हुआ। कई घंटे जाम रहने से स्कूल बसों में बच्चे फंसे रहे और एंबुलेंस व अन्य आपात वाहनों की आवाजाही भी प्रभावित हुई।
आयोग ने गुरुग्राम के 99 चिन्हित जलभराव वाले स्थानों के साथ प्राकृतिक नालों, पुराने जलमार्गों, तालाबों और बाढ़ मार्गों की भी जांच के निर्देश दिए हैं। इनका जीआईएस आधारित मानचित्र तैयार होगा और जहां जल निकासी में अवरोध, अतिक्रमण या अनधिकृत निर्माण मिले, वहां नियमानुसार कार्रवाई बतानी होगी।
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जस्टिस ललित बत्रा की अध्यक्षता वाली फुल बेंच ने अगस्त में प्रकाशित समाचार रिपोर्टों पर स्वत: संज्ञान लेते हुए यह निर्देश दिए। आयोग ने कहा कि 24 अगस्त को करीब 75 मिलीमीटर बारिश के बाद सुभाष चौक, राजीव चौक, नरसिंहपुर, इफको चौक, सोहना रोड, शीतला माता रोड और एनएच-48 समेत कई इलाकों में जलभराव हुआ। कई घंटे जाम रहने से स्कूल बसों में बच्चे फंसे रहे और एंबुलेंस व अन्य आपात वाहनों की आवाजाही भी प्रभावित हुई।
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आयोग ने गुरुग्राम के 99 चिन्हित जलभराव वाले स्थानों के साथ प्राकृतिक नालों, पुराने जलमार्गों, तालाबों और बाढ़ मार्गों की भी जांच के निर्देश दिए हैं। इनका जीआईएस आधारित मानचित्र तैयार होगा और जहां जल निकासी में अवरोध, अतिक्रमण या अनधिकृत निर्माण मिले, वहां नियमानुसार कार्रवाई बतानी होगी।
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ऑडिट में नालियों, कल्वर्ट, पंपिंग स्टेशनों और आउटफॉल की क्षमता, सड़क की ऊंचाई व ढलान, सीवरेज और वर्षा जल निकासी के संभावित जुड़ाव तथा भूमिगत पानी और सीवरेज पाइपलाइनों की स्थिति की जांच होगी। यह भी देखा जाएगा कि मौजूदा व्यवस्था वर्तमान और भविष्य की बारिश तथा बढ़ते शहरीकरण के अनुरूप है या नहीं।
आयोग ने इंजेक्शन वेल, भूमिगत जलाशय और रिचार्ज संरचनाओं को उपयोगी उपाय माना, लेकिन स्पष्ट किया कि ये मुख्य ड्रेनेज नेटवर्क को मजबूत करने का विकल्प नहीं हो सकते। स्कूल बसों की रियल टाइम ट्रैकिंग, सुरक्षित होल्डिंग प्वाइंट और आपातकालीन कॉरिडोर बनाने के निर्देश भी दिए गए हैं।
GMDA के समन्वय में सभी संबंधित विभाग संयुक्त अनुपालन रिपोर्ट तैयार करेंगे। आयोग ने जरूरत पड़ने पर IIT/NIT जैसे संस्थानों से स्वतंत्र तकनीकी अध्ययन कराने पर भी विचार करने को कहा है। अगली सुनवाई 15 दिसंबर 2026 को होगी और रिपोर्ट इससे एक सप्ताह पहले प्रस्तुत करनी होगी।
आयोग ने इंजेक्शन वेल, भूमिगत जलाशय और रिचार्ज संरचनाओं को उपयोगी उपाय माना, लेकिन स्पष्ट किया कि ये मुख्य ड्रेनेज नेटवर्क को मजबूत करने का विकल्प नहीं हो सकते। स्कूल बसों की रियल टाइम ट्रैकिंग, सुरक्षित होल्डिंग प्वाइंट और आपातकालीन कॉरिडोर बनाने के निर्देश भी दिए गए हैं।
GMDA के समन्वय में सभी संबंधित विभाग संयुक्त अनुपालन रिपोर्ट तैयार करेंगे। आयोग ने जरूरत पड़ने पर IIT/NIT जैसे संस्थानों से स्वतंत्र तकनीकी अध्ययन कराने पर भी विचार करने को कहा है। अगली सुनवाई 15 दिसंबर 2026 को होगी और रिपोर्ट इससे एक सप्ताह पहले प्रस्तुत करनी होगी।