संसाधनों पर जनसंख्या का दवाब: चंडीगढ़ के अस्पतालों में 3720 बेड, भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या 35 लाख
चंडीगढ़ के अस्पतालों में दूसरे राज्यों से आने वाले मरीजों का भारी दवाब है। वहीं स्वास्थ्य विभाग विशेषज्ञों की कमी से भी जूझ रहा है। पीजीआई चंडीगढ़ की ओपीडी में एक साल में 28 लाख मरीज आते हैं। जीएमसीएच 32 में भी मरीजों का दवाब बढ़ रहा है। कई राज्यों के लाखों मरीज हर साल चंडीगढ़ इलाज कराने आते हैं। जितनी तेजी से आबादी बढ़ी है उतनी तेजी से संसाधनों में वृद्धि नहीं हुई है। यही वजह है अस्पताल भारी दवाब से जूझ रहे हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
जिस तरह से चंडीगढ़ के अस्पतालों में दूसरे राज्यों के मरीजों की संख्या बढ़ रही है, उसके मुताबिक आने वाले सालों में विशेषज्ञ डॉक्टर व बेड की संख्या कम पड़ जाएगी। चंडीगढ़ के सभी अस्पतालों में कुल 3720 बेड हैं, जबकि इन बेड पर भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या 35 लाख से ज्यादा है। इनमें आधे से ज्यादा मरीज चंडीगढ़ के बाहर के हैं। यही हाल ओपीडी का है।
पीजीआई की ओपीडी में एक साल में 28 लाख मरीज आते हैं, जबकि पीजीआई फेकल्टी मेंबरों की संख्या 590 है और 262 जूनियर रेजिडेंट व 640 सीनियर रेजिडेंट है। पीजीआई में चंडीगढ़ के साथ ही पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, जम्मू कश्मीर, राजस्थान, बिहार, पश्चिम बंगाल और नेपाल तक के मरीज इलाज कराने आते हैं।
पीजीआई के बाद जीएमसीएच 32 दूसरा रेफरल सेंटर है। यहां भी अन्य प्रदेशों के रेफर मरीजों का दबाव बहुत ज्यादा है। इस वजह से बेड की संख्या कम पड़ जाती है। 974 बेड वाले मेडिकल कॉलेज में भी मरीजों का दबाव बहुत ज्यादा है। यहां भी हर साल हजारों की संख्या में मरीज दाखिल किए जाते हैं।
पीजीआई में एक साल में इतने मरीजों का इलाज
- राज्य मरीज
- पंजाब 1087420
- चंडीगढ़ 546468
- हरियाणा 541764
- हिमाचल प्रदेश 359273
- उत्तर प्रदेश 133554
- जम्मू कश्मीर 74131
- अन्य राज्य 91970
विशेषज्ञों का अभाव
स्वास्थ्य विभाग भी विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा है। स्थिति यह है कि डॉक्टरों की कमी के कारण ओपीडी में रोटेशन के अनुसार ड्यूटी लगानी पड़ रही है। जीएमएसएच-16 समेत मनीमाजरा, सेक्टर-22 और सेक्टर-45 के सिविल अस्पताल में ओपीडी में आने वाले कई मरीज बिना इलाज के वापस लौटने को मजबूर हैं। फिलहाल विशेषज्ञ, इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर और रेजिडेंट डॉक्टरों की कुल संख्या 200 है।
शहर की जनता के साथ ही अन्य प्रदेशों से आने वाले मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का लगातार प्रयास जारी है। इसी क्रम में आईसीयू के साथ ही ट्रामा सेंटर का विस्तार हो रहा है। 300 बेड का एमसीएच विंग की कार्य योजना भी प्रगति पर है। विशेषज्ञों की कमी को दूर करने के लिए भी लगातार नियुक्तियां की जा रही हैं। -डॉ. अमनदीप कंग, स्वास्थ्य निदेशक, चंडीगढ़।