चंडीगढ़: बिना लॉकडाउन भी मैदानी इलाकों से दिख सकती हैं पहाड़ियां, बस इन बातों का रखें ख्याल
विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में पीजीआई के स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के इन्वायरमेंट हेल्थ के विशेषज्ञ प्रो. रविंद्र खैवाल से अमर उजाला ने खास बातचीत की। खैवाल ने कहा कि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सबकी भागीदारी जरूरी है। साल 2024 तक चंडीगढ़ में प्रदूषण में 20-25 फीसदी कमी लाना है।
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चंडीगढ़ का वायु गुणवत्ता सूचकांक पिछले डेढ़ साल से सुखद स्थिति में है। इसके पीछे कोरोना के दौरान लगाई गई पाबंदियां बड़ी वजह रही हैं। अब लोगों के मन में सवाल है कि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए क्या लॉकडाउन ही एकमात्र विकल्प है। क्या बिना लॉकडाउन के शुद्ध हवा का लुत्फ नहीं उठाया जा सकता? चंडीगढ़ में प्रदूषण का सबसे बड़ा विलेन कौन है? विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में ऐसे तमाम सवालों के जवाब के लिए अमर उजाला ने पीजीआई के स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के इन्वायरमेंट हेल्थ के विशेषज्ञ प्रो. रविंद्र खैवाल से खास बातचीत की।
सवाल : डेढ़ साल से हवा की गुणवत्ता सुधरी हुई है। आने वाले दिनों में इसका क्या असर पड़ेगा।
जवाब : चंडीगढ़ में अक्तूबर-नवंबर में प्रदूषण बढ़ता है, लेकिन उसका असर आगे नहीं रहता। प्रदूषण बढ़ने पर फिर से हवा दूषित हो सकती है। इसके लिए हमें निरंतर प्रयास करने होंगे।
सवाल : लॉकडाउन से प्रदूषण नीचे आया है, क्या बिना लॉकडाउन के प्रदूषण नियंत्रित हो सकता है?
जवाब : लॉकडाउन स्थायी समाधान नहीं है। लॉकडाउन लगाए बिना भी मैदानी इलाकों से पहाड़ियां दिख सकती हैं, लेकिन इसके लिए प्रशासन, रिसर्च संस्थान, कम्युनिटी व व्यक्तिगत तौर पर प्रयास करने होंगे। सुनियोजित योजना बनानी होगी। साथ योजना को लागू करने के लिए जोर लगाना होगा। निरंतर रूप से प्रदूषण के स्रोत की जानकारी और उसके अनुरूप रोकथाम के लिए कदम उठाने होंगे। हमारे विकास का एजेंडा साल 2050 रखकर बनाना होगा। उदाहरण के तौर पर प्रशासन को उन जगहों को चिह्नित कर लोगों को बताना चाहिए कि पौधे कहां लगाएं। अभी लोग कहीं भी पौधरोपण कर देते हैं। जब पौधे विशालकाय पेड़ में बदल जाते हैं तो पता चलता है कि उस जमीन पर भवन या सड़क निर्माण होना है। बाद में इन पेड़ों को काटना पड़ता है।
सवाल : चंडीगढ़ में प्रदूषण का सबसे बड़ा स्रोत क्या है?
जवाब : यहां के प्रदूषण के तीन बड़े कारण हैं। पहला ट्रांसपोर्ट, ढाबा व होटलों में जलने वाले तंदूर और आसपास के राज्यों से आने वाला प्रदूषण। अक्तूबर के समय जब पंजाब में पराली जलती हैं तो चंडीगढ़ में प्रदूषण बढ़ने लगता है। हालांकि किससे कितना प्रदूषण निकल रहा है, इसके लिए जानने के लिए एक वैज्ञानिक तरीके से अध्ययन जरूरी है।
सवाल : चंडीगढ़ में लगातार वाहनों का बोझ बढ़ रहा है, फिर भी प्रदूषण नियंत्रित रहता है। इसके पीछे क्या वजह है?
जवाब : चंडीगढ़ के लोग नई गाड़ियों के शौकीन हैं। अधिकतर लोग अपनी गाड़ियां पांच से दस साल में बेच देते हैं। दूसरा, गाड़ियों के इंजन से निकलने वाले धुएं और पेट्रोल की गुणवत्ता में काफी सुधार आया है। अब बीएस-6 को लागू करने की बात हो रही है। चंडीगढ़ में प्रदूषण को नियंत्रण करने में बारिश का भी अहम रोल है। यहां पर समय-समय होने वाली बारिश प्रदूषण के कण को हटा देती है। ट्रैफिक लाइट पर भारी जाम वाली स्थिति चंडीगढ़ में नहीं है।
सवाल : आने वाले समय में चंडीगढ़ में प्रदूषण की स्थिति क्या रहेगी?
जवाब : केंद्र सरकार की ओर से चंडीगढ़ में क्लीन एयर प्रोग्राम पर काम हो रहा है। साल 2024 तक प्रदूषण में 20-25 फीसदी की कमी को लाना है। इसके लिए चंडीगढ़ प्रशासन, पर्यावरण विभाग, नगर निगम, पंजाब यूनिवर्सिटी व पीजीआई के शोधकर्ता काम कर रहे हैं। कई कदम उठाए जा चुके हैं और कुछ पर काम चल रहा है।
सवाल : प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित करने के लिए लोग क्या कदम उठाएं?
जवाब : ट्रैफिक लाइट पर अपनी गाड़ी का इंजन बंद कर दें। कम दूरी पर जाने के लिए पैदल या साइकिल का इस्तेमाल करें। श्मशान घाट में लकड़ियों की जगह एलपीजी या बिजली संचालित उपकरण का प्रयोग करें। अपने आसपास पौधरोपण करें।