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पति-पत्नी के संबंधों पर हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, झटका देगा और खुशी भी

Mon, 26 Feb 2018 02:37 PM IST
विवेक शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
विवेक शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Mon, 26 Feb 2018 02:37 PM IST
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working women have no right of alimony from husband, highcourt decision
couple - फोटो : demo photo
पति और पत्नी के संबंधों को लेकर हाईकोर्ट ने एक ऐसा ऐतिहासिक फैसला सुनाया है, जिसे पढ़कर झटका भी लेगा और एक खुशी भी मिलेगी। दरअसल पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने गुजारे भत्ते को लेकर अहम आदेश जारी करते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि यदि पत्नी खुद को संभालने में सक्षम है तो वह पति से गुजारे भत्ते की हकदार नहीं है।
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इस फैसले के साथ ही हाईकोर्ट ने फाजिल्का निवासी महिला की याचिका को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए महिला ने बताया था कि उसकी शादी जून 2010 में हुई थी। जून 2011 में वह ससुराल छोड़कर वापस अपने मायके आ गई थी।
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याची ने कहा कि उसका पति बड़ा किसान है और इसके साथ ही उसकी डेयरी चलती है तथा फाइनेंस का काम भी है। उसका पति 1 लाख रुपये प्रतिमाह कमाता है। ऐसे में उसको पति से गुजारा भत्ता दिलवाया जाए।
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याची ने हाईकोर्ट को ये मामला बताया

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love couple
याची के पति ने हाईकोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता सरकारी शिक्षक है और अक्तूबर 2011 में उसका वेतन 32 हजार रुपये था। उसकी पत्नी को पोलियो था और इस बात का खुलासा पहले नहीं किया गया था। शादी की रात में ही उसे पता चला की उसकी बीवी पोलियोग्रस्त है।

उसने बताया कि पत्नी ने गुजारे भत्ते के लिए निचली अदालत में याचिका दाखिल की थी जो खारिज हो गई। इसके बाद रिवीजन पिटीशन दाखिल की गई वह भी खारिज हो गई। अब याची ने हाईकोर्ट की शरण ली है। इसके जवाब में महिला ने कहा कि वह कमाती है, केवल इस आधार पर उसे गुजारा भत्ता देने से इनकार नहीं किया जा सकता।

हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि पत्नी का वेतन इतना कम नहीं है कि वह अपने आप को संभाल न सके। इसके साथ ही वह पति की कमाई एक लाख रुपये प्रतिमाह साबित करने में भी नाकाम रही।

कोर्ट ने कहा कि गुजारा भत्ता मामलों में केवल पति की ही नहीं, बल्कि पत्नी की आय के साधन को भी ध्यान में रखना जरूरी है। ऐसे में पत्नी यह साबित करने में नाकाम रही कि वह अपने वेतन से खुद को संभालने में सक्षम नहीं है। हाईकोर्ट ने इस टिप्पणी के साथ ही याचिका खारिज कर दी।
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