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ट्रिब्यूलन के विरोध में वकीलों ने पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में किसी को घुसने नहीं दिया, कामकाज ठप
Wed, 31 Jul 2019 10:26 AM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Wed, 31 Jul 2019 10:26 AM IST
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फाइल फोटो
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हरियाणा एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल की नोटिफिकेशन वापस लेने की मांग पर मंगलवार को भी पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के वकीलों ने काम ठप रखा। इस दौरान हाईकोर्ट के पांचों गेटों पर वकीलों ने धरना दिया और और किसी को भी कोर्ट में प्रवेश नहीं करने दिया। इस दौरान बैठकों में हरियाणा के एडवोकेट जनरल का जमकर विरोध हुआ। एजी बीआर महाजन ने कहा कि वकीलों को यदि ट्रिब्यूनल करनाल में होने से आपत्ति है तो सरकार इसे पंचकूला में स्थापित करने को तैयार है।
बार एसोसिएशन ने मंगलवार को न केवल बाहरी लोगों को हाईकोर्ट में जाने से रोका बल्कि वकीलों को भी अंदर नहीं जाने दिया। हाईकोर्ट के सभी प्रवेश द्वारों पर सुबह 9 से शाम 4 बजे तक धरना प्रदर्शन किया गया। शाम 4 बजे बार एसोसिएशन की आम बैठक में निर्णय लिया गया कि बुधवार सुबह 8 बजे सभी सदस्य गेट नंबर-1 पर एकत्रित होंगे और बुधवार को भी सभी द्वार बंद रखे जाएंगे। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने अब अपने आंदोलन का दायरा बढ़ाने का इरादा बना लिया है।
इसी के चलते उन्होंने बार काउंसिल ऑफ पंजाब एंड हरियाणा सहित दोनों राज्यों की जिला बार एसोसिएशन से अदालतों में वर्क सस्पेंड रखने की अपील की। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की ओर से कहा गया कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने इस मामले में अभी तक बातचीत के जरिए हल निकालने के लिए मिलने का समय नहीं दिया है। बार सदस्यों ने हरियाणा के एडवोकेट जनरल बीआर महाजन पर आरोप लगाया कि वह बार के सदस्य होते हुए भी बार के साथ नहीं बल्कि सरकार के साथ हैं।
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अभी तक एजी ने सीएम से मिलाने की कोई पहल तक नहीं की है। एजी ने कहा कि अभी तक हाईकोर्ट बार की ओर से इस बारे में कोई बात की ही नहीं गई थी। उन्होंने कहा कि सरकार को ट्रिब्यूनल को पंचकूला स्थापित करने में कोई आपत्ति नहीं है।
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बार एसोसिएशन ने मंगलवार को न केवल बाहरी लोगों को हाईकोर्ट में जाने से रोका बल्कि वकीलों को भी अंदर नहीं जाने दिया। हाईकोर्ट के सभी प्रवेश द्वारों पर सुबह 9 से शाम 4 बजे तक धरना प्रदर्शन किया गया। शाम 4 बजे बार एसोसिएशन की आम बैठक में निर्णय लिया गया कि बुधवार सुबह 8 बजे सभी सदस्य गेट नंबर-1 पर एकत्रित होंगे और बुधवार को भी सभी द्वार बंद रखे जाएंगे। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने अब अपने आंदोलन का दायरा बढ़ाने का इरादा बना लिया है।
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इसी के चलते उन्होंने बार काउंसिल ऑफ पंजाब एंड हरियाणा सहित दोनों राज्यों की जिला बार एसोसिएशन से अदालतों में वर्क सस्पेंड रखने की अपील की। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की ओर से कहा गया कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने इस मामले में अभी तक बातचीत के जरिए हल निकालने के लिए मिलने का समय नहीं दिया है। बार सदस्यों ने हरियाणा के एडवोकेट जनरल बीआर महाजन पर आरोप लगाया कि वह बार के सदस्य होते हुए भी बार के साथ नहीं बल्कि सरकार के साथ हैं।
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अभी तक एजी ने सीएम से मिलाने की कोई पहल तक नहीं की है। एजी ने कहा कि अभी तक हाईकोर्ट बार की ओर से इस बारे में कोई बात की ही नहीं गई थी। उन्होंने कहा कि सरकार को ट्रिब्यूनल को पंचकूला स्थापित करने में कोई आपत्ति नहीं है।
ट्रिब्यूनल से छिन जाएंगे हाईकोर्ट के अधिकार
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष डीपीएस रंधावा ने कहा कि ट्रिब्यूनल का गठन हाईकोर्ट के अधिकार छीनने जैसा है। अब तक केस हाईकोर्ट के जज सुन रहे थे और अब रिटायर जज सुनेंगे। सरकारी नौकरी के विवादों का निपटारा ऐसे लोग करेंगे जिनकी नियुक्ति सरकार कर रही है। जिसकी नियुक्ति सरकार करेगी वह कैसे सरकार के खिलाफ आदेश पारित करेगा। ट्रिब्यूनल का गठन न्यायपालिका की स्वतंत्रता का हनन है।
प्रशासनिक ट्रिब्यूनल के विरोध की सियासत तेज
हरियाणा प्रशासनिक ट्रिब्यूनल के गठन के विरोध की सियासत की तेज हो गई है। कर्मचारी संगठनों के अलावा इनेलो भी इसके विरोध में उतर आया है। इनेलो के प्रधान महासचिव अभय सिंह चौटाला ने कर्मचारियों की आपत्तियों पर गौर किए बिना प्रशासनिक प्राधिकरण का गठन करने को अनुचित ठहराया है। चौटाला ने कहा कि निर्णय के विरोध में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में वकील हड़ताल पर हैं, जिससे न्याय प्राप्त करने में आम आदमी को भी कठिनाई आ रही है।
विचित्र बात है कि ऐसे समय में जब हिमाचल प्रदेश, ओडिसा और मध्यप्रदेश में प्रशासनिक प्राधिकरण की असफलता के बाद सरकारों ने टिब्यूनल को भंग करने का निर्णय लिया है, वहीं हरियाणा सरकार उनके अनुभवों के विपरीत प्राधिकरण का गठन कर रही है। इस प्राधिकरण के गठन से कर्मचारियों को न्याय प्राप्त करने के लिए एक और बाधा को पार करना पड़ेगा। प्राधिकरण के निर्णय के विरोध में कर्मचारी पहले उच्च न्यायालय में अपील करेंगे और उसके पश्चात वे सर्वोच्च न्यायालय में जा सकेंगे। सरकार कर्मचारियों के साथ बैठकर उनके तर्कों को सुने और समझे, उसके बाद विवेकपूर्ण निर्णय लेते हुए ट्रिब्यूनल भंग करने की केंद्र सरकार को सिफारिा करे।
प्रशासनिक ट्रिब्यूनल के विरोध की सियासत तेज
हरियाणा प्रशासनिक ट्रिब्यूनल के गठन के विरोध की सियासत की तेज हो गई है। कर्मचारी संगठनों के अलावा इनेलो भी इसके विरोध में उतर आया है। इनेलो के प्रधान महासचिव अभय सिंह चौटाला ने कर्मचारियों की आपत्तियों पर गौर किए बिना प्रशासनिक प्राधिकरण का गठन करने को अनुचित ठहराया है। चौटाला ने कहा कि निर्णय के विरोध में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में वकील हड़ताल पर हैं, जिससे न्याय प्राप्त करने में आम आदमी को भी कठिनाई आ रही है।
विचित्र बात है कि ऐसे समय में जब हिमाचल प्रदेश, ओडिसा और मध्यप्रदेश में प्रशासनिक प्राधिकरण की असफलता के बाद सरकारों ने टिब्यूनल को भंग करने का निर्णय लिया है, वहीं हरियाणा सरकार उनके अनुभवों के विपरीत प्राधिकरण का गठन कर रही है। इस प्राधिकरण के गठन से कर्मचारियों को न्याय प्राप्त करने के लिए एक और बाधा को पार करना पड़ेगा। प्राधिकरण के निर्णय के विरोध में कर्मचारी पहले उच्च न्यायालय में अपील करेंगे और उसके पश्चात वे सर्वोच्च न्यायालय में जा सकेंगे। सरकार कर्मचारियों के साथ बैठकर उनके तर्कों को सुने और समझे, उसके बाद विवेकपूर्ण निर्णय लेते हुए ट्रिब्यूनल भंग करने की केंद्र सरकार को सिफारिा करे।
कर्मचारियों को देरी से मिलेगा न्याय
सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा ने ट्रिब्यूनल गठित करने पर कड़ी नाराजगी जताई है। संघ के प्रधान धर्मबीर फौगाट, महासचिव सुभाष लांबा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष नरेश कुमार शास्त्री व प्रवक्ता इंद्र सिंह बधाना ने कहा कि इससे कर्मचारियों को देरी से न्याय मिलेगा। गठने से पहले सबसे बड़े स्टेक होल्डर कर्मचारियों के प्रतिनिधियों से बातचीत कर उन्हें विश्वास में लेना भी सरकार ने जरूरी नहीं समझा।
बीस जुलाई को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में भी इसकी कोई जानकारी नहीं दी गई। लांबा ने बताया कि हिमाचल प्रदेश में ऐसा प्रयोग बुरी तरह विफल हो चुका है। ट्रिब्यूनल में सरकार से प्रभावित होकर फैसले किए जाएंगे। सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा 16 अगस्त से पंचकूला में होने वाले तीन दिवसीय राज्य स्तरीय प्रतिनिधि सम्मेलन में सरकार के निर्णय पर मंथन कर आगामी रणनीति बनाएगा।
हसला व एचएमवीए भी विरोध में
हरियाणा स्कूल लेक्चरर एसोसिएशन व हरियाणा मास्टर वर्ग एसोसिएशन ने भी ट्रिब्यूनल के गठन का विरोध किया है। हसला प्रधान दयानंद दलाल व एचएमवीए प्रधान रमेश मलिक ने इसे कर्मचारियों के न्याय प्राप्त करने के अधिकार पर कुठाराघात बताया। उन्होंने कहा कि यह कर्मचारियों को हाईकोर्ट जाने से रोकने का षड्यंत्र है। हाईकोर्ट में जो मामले निपटान के कगार पर हैं, ट्रिब्यूनल में जाने से उन्हें हल होने में और ज्यादा समय लगेगा। सरकार को अपना फैसला वापस लेना चाहिए। इसका विरोध जारी रहेगा।
बीस जुलाई को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में भी इसकी कोई जानकारी नहीं दी गई। लांबा ने बताया कि हिमाचल प्रदेश में ऐसा प्रयोग बुरी तरह विफल हो चुका है। ट्रिब्यूनल में सरकार से प्रभावित होकर फैसले किए जाएंगे। सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा 16 अगस्त से पंचकूला में होने वाले तीन दिवसीय राज्य स्तरीय प्रतिनिधि सम्मेलन में सरकार के निर्णय पर मंथन कर आगामी रणनीति बनाएगा।
हसला व एचएमवीए भी विरोध में
हरियाणा स्कूल लेक्चरर एसोसिएशन व हरियाणा मास्टर वर्ग एसोसिएशन ने भी ट्रिब्यूनल के गठन का विरोध किया है। हसला प्रधान दयानंद दलाल व एचएमवीए प्रधान रमेश मलिक ने इसे कर्मचारियों के न्याय प्राप्त करने के अधिकार पर कुठाराघात बताया। उन्होंने कहा कि यह कर्मचारियों को हाईकोर्ट जाने से रोकने का षड्यंत्र है। हाईकोर्ट में जो मामले निपटान के कगार पर हैं, ट्रिब्यूनल में जाने से उन्हें हल होने में और ज्यादा समय लगेगा। सरकार को अपना फैसला वापस लेना चाहिए। इसका विरोध जारी रहेगा।